
खबर 24 एक्सप्रेस | आकाश ढाके, सोलापुर : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। संभाजी ब्रिगेड के वरिष्ठ नेता प्रवीण गायकवाड पर सरेआम हमला हुआ। हमलावरों ने न सिर्फ मारपीट की, बल्कि उन पर स्याही तक फेंकी गई। इसकी वजह बनी प्रवीण गायकवाड़ की वह टिप्पणी, जिसमें उन्होंने स्वामी समर्थ को लेकर कथित विवादित बात कही थी, जो अब उनके लिए मुसीबत बन गई है।
गायकवाड़ की इस टिप्पणी के बाद उनके साथ हुई मारपीट और खींचतान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। इस बीच भाजपा की ओर से आई प्रतिक्रिया ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा:
“गायकवाड पर हुए हमले से भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है। ऐसी नीच हरकतें करना भाजपा के खून में नहीं है।”
रविवार को सोलापुर जिले के अक्कलकोट गांव में यह विवाद सामने आया। बताया गया कि स्वामी समर्थ पर की गई एक टिप्पणी को लेकर कुछ संगठनों के कार्यकर्ताओं ने गायकवाड पर हमला कर दिया। वीडियो में देखा गया कि उन्हें कार से बाहर खींचा गया और उनके साथ मारपीट की गई।

इस मामले में दीपक काटे सहित सात लोगों के खिलाफ दंगा फैलाने की धाराओं में केस दर्ज किया गया। पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ भी दिया गया। लेकिन तभी सोशल मीडिया पर दीपक काटे के भाजपा नेताओं के साथ कुछ फोटो-वीडियो वायरल हो गए।
इस पर भाजपा से जब सवाल पूछे गए, तो चंद्रशेखर बावनकुले ने दो टूक जवाब दिया:
“जिसने भी ग़लत किया है, वह आरोपी है, चाहे वो किसी भी पार्टी का हो।”
उन्होंने दीपक काटे की हरकत की आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा ऐसे किसी भी कृत्य को स्वीकार नहीं करती।
विपक्ष ने उठाए सवाल, भाजपा ने दिया जवाब
इस पूरे मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष की ओर से शरद पवार और सुषमा अंधारे ने भाजपा पर सवाल उठाए। लेकिन भाजपा की ओर से एमएलसी परिणय फुके ने पलटवार करते हुए कहा:
“विपक्ष हर बार भाजपा को ही जिम्मेदार ठहराता है। ऐसी घटनाओं को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए।”
कानून अपना काम कर रहा है
फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। लेकिन जिस तरह ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति होती है, वह समाज को और अधिक बांट सकती है।
विवाद की जड़ क्या थी?
संभाजी ब्रिगेड के नेता और संस्थापक सदस्य प्रवीण गायकवाड़ ने स्वामी समर्थ को लेकर कहा था:
“स्वामी समर्थ कोई भगवान नहीं थे, बल्कि एक मानसिक रूप से असंतुलित व्यक्ति थे, जिन्हें जबरदस्ती दैवीय दर्जा दिया गया।”
गायकवाड़ की इस टिप्पणी से कई संगठनों की भावनाएं आहत हुईं। इसके बाद गायकवाड़ को कुछ लोग उनकी कार से बाहर खींचते हैं, उनके साथ मारपीट करते हैं और उन पर स्याही भी फेंकी जाती है।

संवेदनशीलता और जिम्मेदारी जरूरी
आस्था का सम्मान और कानून का पालन – दोनों जरूरी हैं।
प्रवीण गायकवाड़ को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था जो श्रद्धालु समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाए।
लेकिन असहमति का जवाब हिंसा नहीं हो सकता।
राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे ऐसे संवेदनशील मामलों में राजनीति के बजाय जिम्मेदारी दिखाएं।
प्रवीण गायकवाड़ को भी यह सोचना चाहिए कि जो बात वो कह रहे हैं, क्या वह आवश्यक है?
कई बार लोग मीडिया में बने रहने के लिए विवादित बयान देते हैं, जो बाद में खुद उनके लिए मुसीबत बन जाते हैं।
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