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सुनेत्रा पवार का चुनाव आयोग को पत्र बना विवाद का कारण? NCP में अंदरूनी खींचतान तेज, अध्यक्ष पद पर खतरा

Maharashtra Breaking News | Bureau News Akash Dhake | Khabar 24 Express



सुनेत्रा पवार द्वारा चुनाव आयोग को लिखे गए पत्र से NCP में नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के साथ टकराव, अध्यक्ष पद पर संकट और पार्थ पवार के भविष्य पर सवाल।


Sunetra Pawar News: चुनाव आयोग को पत्र लिखकर खुद घिरीं सुनेत्रा पवार, NCP में अंदरूनी विवाद गहराया

अजित पवार की कथित प्लेन क्रैश में मौत के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर सियासी समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। पार्टी के अंदर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है, जिससे संगठन में अस्थिरता और बढ़ गई है। इस बीच सुनेत्रा पवार के एक फैसले ने उन्हें ही राजनीतिक घेराबंदी में ला खड़ा किया है।

सूत्रों के मुताबिक, सुनेत्रा पवार NCP के संभावित विलय के लिए तैयार बताई जा रही हैं, लेकिन पार्टी के दो बड़े नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे इस फैसले के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं। माना जा रहा है कि इन नेताओं को डर है कि विलय के बाद पार्टी की कमान शरद पवार के हाथों में जा सकती है, जिससे उनके प्रभाव में कमी आ सकती है।

दिल्ली दौरे के दौरान सुनेत्रा पवार और प्रफुल्ल पटेल के बीच मुलाकात भी हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। इससे साफ है कि पार्टी के भीतर मतभेद अब सुलझने के बजाय और गहराते जा रहे हैं।


चुनाव आयोग को लिखा पत्र बना बड़ा संकट

सुनेत्रा पवार ने राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद केंद्रीय चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने 28 जनवरी के बाद हुए सभी पत्राचार को मान्यता न देने की मांग की थी। लेकिन अब यही पत्र उनके लिए सबसे बड़ा संकट बनता दिख रहा है।

दरअसल, प्रफुल्ल पटेल ने सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने से संबंधित दस्तावेज और कार्यकारिणी बैठक की जानकारी 28 जनवरी के बाद ही चुनाव आयोग को भेजी थी। ऐसे में अगर चुनाव आयोग उस पत्राचार को अमान्य कर देता है, तो तकनीकी रूप से सुनेत्रा पवार की नियुक्ति ही अवैध हो सकती है।

इस स्थिति में उनका अध्यक्ष पद खतरे में पड़ सकता है, जिससे पार्टी के भीतर सत्ता संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।


पार्थ पवार के राजनीतिक भविष्य पर भी असर

इस पूरे विवाद का असर पार्थ पवार के राजनीतिक करियर पर भी पड़ता नजर आ रहा है। पार्थ पवार ने राज्यसभा चुनाव के लिए जो ‘एबी फॉर्म’ जमा किया है, उस पर प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के हस्ताक्षर हैं।

ऐसे में अगर पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर विवाद बढ़ता है या बदलाव होता है, तो पार्थ पवार की उम्मीदवारी पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।


बारामती सीट पर बढ़ी चुनौती

एक ओर जहां पार्टी में अंदरूनी कलह जारी है, वहीं दूसरी ओर सुनेत्रा पवार के सामने बारामती से चुनाव जीतने की चुनौती भी है। कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार उतारे जाने की घोषणा के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

NCP की कोशिश है कि यह सीट उनके कब्जे में बनी रहे, क्योंकि अजित पवार इस सीट से कभी नहीं हारे थे। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए सुनेत्रा पवार के लिए राह आसान नहीं दिख रही।


निष्कर्ष

अजित पवार के निधन के बाद NCP में नेतृत्व संकट और गहराता जा रहा है। सुनेत्रा पवार एक साथ कई मोर्चों पर घिरी नजर आ रही हैं—चाहे वह पार्टी के भीतर की राजनीति हो, चुनाव आयोग का विवाद या फिर चुनावी चुनौती।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सुनेत्रा पवार इस संकट से उबर पाएंगी या फिर NCP में सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा। आने वाले दिनों में पार्टी की दिशा और नेतृत्व पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।


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