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अघोषित आपातकाल, बंगाल में हारे तो ऐसे बदला लेंगे, ये मोदी शाह की कैसी राजनीति है : Khabar 24 Express


बीजेपी बंगाल में सब कुछ करने के बाद भी चुनाव हार चुकी है लेकिन वो अब साम दाम दंड भेद अपना रही है। लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार के खिलाफ केंद्र की मोदी सरकार का यह सबसे शर्मनाक रवैया है। केंद्र सरकार के अधीन आने वाली संस्थाएँ केवल गैर बीजेपी शाषित राज्यों में सतर्क रहती हैं। बीजेपी शाषित राज्य में भले कितने भी घोटाले क्यों न हो जाएं।  ऐसा नहीं है कि हम गैर बीजेपी शाषित प्रदेशों में भ्रष्टाचरियों पर कार्रवाई के खिलाफ हैं। लेकिन सभी भ्रष्टाचरियों के लिए एक समान मानदंड होना चाहिए, चाहे वो बीजेपी गठबंधन का हिस्सा हो या बीजेपी में शामिल हुए नेता हो।
क्योंकि बीजेपी बंगाल में चुनाव हारते ही ममता सरकार को अपने निशाने पर ले रही है। ममता बनर्जी के सपथ लेने से पहले ही पूरे राज्य में दंगे शुरू हो गए थे।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार बनते ही नारदा केस में उनके मंत्री के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। आज सीबीआई ने नारदा मामले में आरोपी फिरहाद हकीम, सुब्रत चटर्जी, सोवन चटर्जी और मदन मित्रा को गिरफ्तार कर लिया है। आज सुबह सीबीआई के अधिकारी फिरहाद हकीम के आवास पर पहुंचे और घर की तलाशी की। इसके बाद फिरहाद हकीम को सीबीआई दफ्तर पूछताछ के लिए ले आए।

सीबीआई द्वारा अपन नेताओं की गिरफ्तारी से भड़कीं सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सीबीआई के दफ्तर पहुंच गईं। ममता बनर्जी ने इस गिरफ्तारी पर नाराजगी जताते हुए सीबीआई के अधिकारियों से कहा कि मुझे भी गिरफ्तार कर लीजिए।


सीबीआई नारदा स्टिंग मामले में आरोपी फिरहाद हकीम को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई है। इसके अलावा बंगाल सरकार में मंत्री सुब्रत मुखर्जी और विधायक मदन मित्रा के घर पर भी छापा मारा और उन्हें सीबीआई दफ्तर पूछताछ के लिए बुलाया। इसके अलावा पूर्व मेयर सोवन चटर्जी पर भी कार्रवाई की गई है।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीश धनखड़ ने फिरहाद हकीम के खिलाफ जांच के लिए सीबीआई के अधिकारियों को मंजूरी दे दी थी। इस मामले में नारदा की ओर से एक स्टिंग ऑपरेशन किया गया था, जिसमें टीएमसी के कई नेता कैमरे पर रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे।  बता दें कि इस केस के कई आरोपी नेता बीजेपी में भी शामिल हुए, इससे पहले भी शारदा केस के आरोपी बीजेपी में शामिल हो चुके हैं लेकिन आजतक उन नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। और बीजेपी के केंद्र में रहते हुए ना भविष्य में ऐसी कोई उम्मीद है।

बता दें कि साल 2016 में बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले नारदा स्टिंग टेप सार्वजनिक किए गए थे। ऐसा दावा किया गया था कि ये टेप साल 2014 में रिकॉर्ड किए गए थे। इसमें टीएमसी के मंत्री, सांसद और विधायक की तरह दिखने वाले व्यक्तियों को कथित रूप से एक काल्पनिक कंपनी के प्रतिनिधियों से कैश लेते दिखाया गया था। यह स्टिंग ऑपरेशन नारदा न्यूज पोर्टल के मैथ्यू सैमुअल ने किया था। साल 2017 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने इन टेप की जांच का आदेश सीबीआई को दिया था। 

इस स्टिंग ऑपरेशन में टीएमसी के जो दो बड़े नेता कैमरे में कैद हुए थे उनमें से एक मुकुल रॉय थे, जिन्होंने साल 2017 में भाजपा का दामन थाम लिया था और दूसरे बड़े नेता शुभेंदु अधिकारी थे जिन्होंने चुनावों से ठीक पहले ममता को बाय बाय कर दिया था और भाजपा की गंगा में नहाकर पाक साफ हो गए थे।

बता दें कि नारद से पहले 2013 के शारदा चिटफंड घोटाले में भी मुकुल रॉय का नाम सामने आया था जैसे ही मुकुल पर शिकंजा कसा वो 2017 में भाजपा में शामिल हो गए।
वहीं, असम के बड़े नेता हिमंता बिस्वा सरमा का भी नाम शारदा घोटाले में आया था और वह 2016 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे और अब पूर्वोत्तर में भाजपा के कद्दावर नेता बन गए हैं व असम के मुख्यमंत्री बन गए हैं।

अब इन सबको देखते हुए इसे बीजेपी का कौनसा चरित्र कहा जायेगा? जहां चुनाव हार जाएंगे तो वहां अघोषित आपातकाल लगाया जाएगा। जो भी भ्रष्टाचारी या आरोपी जैसे ही बीजेपी में शामिल होगा वो पाक साफ हो जाएगा।


बाकी हमारा काम सिर्फ सच्चाई से अवगत करवाना है जब तक हम इस अघोषित आपातकाल में करवा सकते हैं।

Exclusive Article : Manish Kumar Ankur, Khabar24 Express

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