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एक वो नारा था “अबकी बार मोदी सरकार” लेकिन अच्छे दिनों की उम्मीद में महंगाई की मार

जब वर्ष 2014 में मोदी सरकार सत्ता में आई तो हर जगह अच्छे दिन आने की गूंज सुनाई देने लगी मुल्क की आवाम गरीब, मजदूर, किसान आदि को नई सरकार से और नए वज़ीर-ए-आज़म से देश के उमदा मुस्तकबिल और अच्छे दिनों की उम्मीद हो गई। लेकिन हकीकत में अच्छे दिनों का नारा कारगर साबित उन्हीं व्यक्तियों के लिए हुआ है जो 85% संसाधनों में आलीशान जीवन जी रहे हैं गरीब, किसान, कामगार, मध्यम व निम्न वर्ग की दशा तो आज भी वही है जो पहले थी गरीब जनता को देखकर लगता है कि वह मोदी सरकार के अच्छे दिनों से महरूम हो गयी। हां यह अलग बात है कि आज डिजिटलाइजेशन की वजह से लोगों का डिजिटल दुनिया से संचार सशक्त हो गया है और आवास योजना से मुफ़लिस आवाम को सर पर छत प्राप्त होने लगी है।

लेकिन जैसे ही 2019 में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत हुई तो सरकार के रवैये में बहुत कुछ तब्दीली देखने मिली और वर्ष 2020 का आगाज हुआ तो उसके कुछ माह उपरांत कोरोनावायरस का भी भारत में आगाज हो गया जिसे रोकने के लिए सरकार द्वारा बिना योजना बनाये लॉकडाउन लगाया गया और इस लॉकडाउन से भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर काफी निकृष्ट प्रभाव पड़ा जिससे अर्थव्यवस्था में प्रचुर गिरावट आयी है तथा आवाम को भी अपरिमित मुश्किलों का सामना करना पड़ा है तथा अभी भी करना पड़ रहा है एक तो कोरोनावायरस की मार ने ऊपर से महंगाई की मार ने मध्यम एवं निम्न वर्ग की हालत अतीव निकृष्ट कर दी है।

आपको आगाह कर दे कि वर्ष 2018 में खुदरा महंगाई दर 3.4 फीसदी थी जो अप्रैल 2019 में 2.9 फीसदी दर्ज की गई जबकि जुलाई 2020 में सरकारी आंकड़ों के अनुसार खुदरा महंगाई की दर 6.93 फीसदी हो गई थी और यह महंगाई दर है 2019 की तुलना में 2020 में दोगनी थी।

वहीं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2020 में थोक महंगाई दर 1.22 फीसदी पर थी जो जनवरी 2021 में 2.3 फीसदी पर पहुंच गई।
महंगाई के इन आंकड़ों से आप तसव्वुर कर सकते है कि आवाम पर महंगाई का असर किस हद तक पड़ रहा है।

इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार वर्ष 2019 में भारत में न्यूनतम पेट्रोल की कीमत दिल्ली में 68.50 रुपये तथा अधिकतम मुंबई में 74.16 रुपये थी जो वर्ष 2020 में बढ़ कर दिल्ली में न्यूनतम 81.6 रुपये तथा अधिकतम मुंबई में 87.74 रुपये हो गयी थी। वर्ष 2020 के उपरांत फरवरी 2021 में न्यूनतम पेट्रोल मूल्य दिल्ली में 90 रुपये है वहीं अधिकतम मूल्य राजस्थान में 100.13 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

अक्टूबर 2019 में औसतन सोया तेल 90 रुपये प्रति लीटर था जबकि 2020 में औसतन 110 रुपये प्रति लीटर हो गया वहीं फरवरी 2021 में सोया तेल 120 रुपये प्रति लीटर हो गया है यहां तक कि सब्जियां, फल-फूल, मसाले आदि के मूल्यों में भी महंगाई साफ-साफ नजर आ रही है।

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हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण् ने वर्ष 2021-22 का जो बजट पेश किया है उसमें भी बहुत सी चीजों को बताया गया है कि वह महंगी होगीं जैसे कॉटन,सूती के कपड़े, सेब, काबुली चना, यूरिया, डीएपी खाद, चना दाल, पेट्रोल-डीजल आदि इनमें से कुछ चीजों में महंगाई हो भी गयी है हालांकि कुछ चीजें सस्ती भी हुई है लेकिन वस्तुओं की कीमतों तथा बजट की वस्तुओं में जो महंगाई की रेखा दिखाई दे रही है वह बेहद गौर करने योग्य है कोरोना काल के वक्त से जो महंगाई में इजाफा हुआ है उससे मुफ़लिस आवाम का जीना मुहाल हो गया है वहीं दूसरी ओर बेरोजगारी भी अपनी चरम सीमा पर है आज गरीब आवाम महंगाई और बेरोजगारी के मध्य पिस रही है तथा इसी अवस्था में जीने को विवश है जिससे गरीब आवाम की दशा अतीव निकृष्ट हो रही है इस वक्त सरकार की वरीयता में गरीब आवाम की आर्थिक दशा को दुरुस्त करने और महंगाई को कम करने के फलीभूत प्रयास शामिल होने की अपरिहार्यता है।

लेखक: सतीष भारतीय


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