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गुरु मंत्र, जप रहस्य, सिद्धि क्या है? जानें स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज से

 

 

 

 

गुरु मंत्र स्वामी का नाम, गुरु मंत्र ईष्ट का नाम है। गुरु मंत्र से जीवन की सारी बाधाएं आसानी से दूर हो जाती हैं सारे व्यवधान समाप्त हो जाते हैं, जीवन सफल हो जाता है, गुरु मंत्र ईश्वर को पास लाने का वो अचूक मंत्र है जो गुरु द्वारा सभी प्रकार की बाधाओं को दूर कर, हमें अपने परम ज्ञान के माध्यम से ईश्वर के दर्शन करवाते हैं। गुरु मंत्र, गुरु अपने शिष्य को जप करने हेतु देते हैं । गुरु मंत्र के फलस्वरूप शिष्य अपनी आध्यात्मिक उन्नति करता है और अंतत: मोक्ष प्राप्ति करता है। वैसे गुरु मंत्र में जिस देवता का नाम होता है, वही विशेष रूप से उस शिष्य की आध्यात्मिक प्रगति के लिए आवश्यक होते हैं ।

 

 

 

जप क्या है? अक्सर कई लोगों को इसका सही अर्थ नहीं पता। जप करने से यानि अपने ईष्ट, भगवान के नाम को बार-बार याद कर उनके और निकट होना, उनके चरणों में स्थान पाना, उनका दास बनना।

 

सिद्धि शब्द का सामान्य अर्थ है सफलता। सिद्धि अर्थात किसी कार्य विशेष में पारंगत होना। समान्यतया सिद्धि शब्द का अर्थ चमत्कार या रहस्य समझा जाता है, लेकिन योगानुसार सिद्धि का अर्थ इंद्रियों की पुष्टता और व्यापकता होती है। अर्थात, देखने, सुनने और समझने की क्षमता का विकास।

 

 

 

 

 

गुरु-मंत्र-जप-रहस्य-सिद्धि क्या है,इस विषय को स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी ने अपने सत्यास्मि धर्म ग्रंथ में गद्य और पद्य में वर्णित किया है,जिसका एक कवित्त्व अंश यहाँ भक्तों के ज्ञान वर्धन के लिए दिया है…

 

 

 

 

 

मैं कौन हूँ,मैं कौन हूँ
रटने से नहीं होता ज्ञान।
इसी अर्थ संग ध्याना होता
स्थूल स्वरूप में निज भान।।
गुरु बनाना एक पक्ष है
उसे अपने में ले ध्याना होगा।
मैं नहीं केवल गुरु है
इसी भाव को पाना होगा।।
अन्न शरीर से प्राण शरीर तक
और प्राण शरीर से लेकर मन।
अखंड जाप गुरु मंत्र नित करके
स्वयं पाओगे आत्म लक्ष्य सघन।।
सच्च में विद्या चाहो पाना
तो एक ही मंत्र जपो अखंड।
और गुरु में तुम और तुम में गुरु
दो अंड एक कर मिले आत्म ब्रह्मांड।।
और प्रेम जिसे भी अधिक हो करते
उसे संग ले करना ध्यान।
दोनों एक ध्यान बनाओ
तब पाओगे प्रेम आलोकिक विज्ञानं।।
जप सिद्धि जप में छिपी
जप मध्यम स्वर में ध्यान।
स्पष्ट श्रवण कर श्वास संग
जप बने ध्वनिमय ध्यान।।
जप एक स्वर चलता रहे
इष्ट गुरु मंत्र जप नाँद।
मैं मंत्र अर्थ भाव इष्ट
जप कंठ ह्रदय नाभि और नाँद।।
जप करो एक मंत्र कर धारण
जपो रात दिन सिद्ध निवारण।
जपते रहो स्वप्न हो दर्शन
जपते जपते प्रत्यक्ष सिद्ध कारण।।
जप अर्थ है इच्छा दोहराना
जप अर्थ है क्रिया मंथन।
जप अर्थ है मननमय चिंतन
जप अर्थ है ज्ञान अभिनंदन।।
जप ही जीवन भरता रंग
जप जी जीवन आत्म आनन्द।
जप है तो सर्व इच्छा पूरी
जप तग्ये स्वयं बन परमानन्द।।

 

*****

 

स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
www.satyasmeemisson.org


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