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Home / Breaking News / हस्तरेखा विज्ञान (भाग-6) हाथ के अंगूठे से करें भविष्य का अध्ययन, और जाने जीवन की बहुत सारी बातें : श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज

हस्तरेखा विज्ञान (भाग-6) हाथ के अंगूठे से करें भविष्य का अध्ययन, और जाने जीवन की बहुत सारी बातें : श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज

 

 

 

 

हस्तरेखा विज्ञान के छठवें भाग में श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज हाथ के अंगूठे के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दे रहे हैं कि कैसे हाथ के अंगूठे से जीवन की बहुत सारी गहराइयों का पता किया जा सकता है।

 

हस्तरेखा विज्ञान में आज आप जाने कि कैसे अंगूठे में छिपे हैं जीवन के अनेकों राज। अंगूठे के अध्ययन से आप जीवन की बहुत सारी चीजें जान पाएंगे।

 

तो आइए जानते हैं कि कैसे अंगूठे के अध्ययन से जाने अपना भविष्यफल :

 

अंगूठा मनुष्य की आत्मा का प्रतीक है और यो ही शास्त्रों में ब्रह्म को अंगूठे की आकार की ज्योति जैसा बताता है, इस पर कोई भी चिन्ह उस व्यक्ति की आत्मा के पूर्वजन्म से वर्तमान जन्म को मिले शेष जीवन के मूल स्वभाव और तम् रज और सत गुण की कितनी प्रधानता या कमी यानि अवगुण आदि को बताते है, अंगूठे को बड़े ध्यान से पढ़े और जाने।

प्रत्येक व्यक्ति के अंगूठे के तीन भाग होते है-1-उपर का भाग जिसे पोर कहते है- 2-मध्य भाग जो तर्क और ज्ञान की स्थिति केसी है, ये बताता है-3-जड़ का भाग जो शुक्र पर्वत से जुड़ा होने से आत्मा के एश्वर्य का कितना खजाना उसे अब के जीवन में मिला है।
लम्बा अंगूठे वाले यानि तर्जनी ऊँगली के दूसरे भाग तक लम्बाई लिए हो यो,उस के भाग्य में सभी इच्छाएं पूरी होती है।और तर्जनी के पहले भाग तक लम्बाई हो मध्यम लम्बाई वाले अंगूठे के व्यक्ति को आज का किया कर्म का फल 7 दिन बाद या 5 या 7 साल बाद मिलता है।और इससे नीचे का अंगूठे वाले को सदा संघर्ष ही करना पड़ता है।
अंगूठा पुरुष में उसका लिंग जनेंद्रिय है और स्त्री में योनि है। ये जैसा होगा वेसी जनेंद्रिय की स्थिति होती है।और वेसी उसकी भोगवर्ति होगी। लचीले अंगूठे वाले की भोगवर्ति में प्रेम और रोमांस और रोचकता,कल्पनाशीलता का भाव अधिक होता है और 50 वर्ष से पहले ही उसमें ये वृति में आध्यात्मिक पक्ष आने से कमी आ जाती है और खड़े और भारी अंगूठे वाले व्यक्ति या स्त्री में भोगवृति में प्रारम्भ से लेकर अधिक आयु होने पर भी प्रेम और रोमांस और कल्पनाशीलता की मात्रा कम और शौकीन और शारारिक भूख की पूर्ति का विषय अधिक रहता है।

 

 

हस्तरेखा विज्ञान (भाग-4) : हाथ में मंगल पर्वत के प्रभाव को जानिये, मंगल पर्वत कैसे देता है शुभ अशुभ लाभ? श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

 

 

 

 

 

अंगूठे के पहले और दूसरे भाग के बीच में यदि एक लम्बा सा यव जो आँख जेसी आकृति का होता है,वह स्पष्ट और सही बना हो तो उस व्यक्ति का जन्म दिन में और शुक्ल पक्ष में होता है,साथ ही इसकी बीच का खुलापन अंगूठे के बाहर की और बढ़ता जाये तो,दोपहर से साय तक के बीच का जन्म होता जाता है और तर्जनी ऊँगली की और यानि हथेली की और को बढ़ता जाता है,तो प्रातः से उल्टा रात्रि की और यानि 8 से 12 बजे तक का समय बढ़ता जाता है और यदि यहाँ केवल खड़ी रेखा ही दोनों भागों को मिला रही हो,तो साय से रात्रि का जन्म और कृष्ण पक्ष का जन्म होता है।ऐसी सही गणना के लिए पहले सीधे हाथ को और फिर उलटे हाथ यानि दोनों हाथो को देखना चाहिए।
सीधे हाथ के अंगूठे के ऊपरी भाग में चक्र हो और ये हिस्सा भरा हुआ हो और अंगूठा पीछे को नही झुकता हो तो,व्यक्ति गुप्त रूप से भोगवादी वृति का होता है,उसका प्रेम और गृहस्थी जीवन में भी प्रेम केवल शारारिक स्तर और दिखावे भरा होता है। पर विवाद रहते हुए भी लगभग सफल रहता है।और जिनके अंगूठा का ये भाग कम भरा हो और पीछे को मुड़ता हो,वे प्रेम में कल्पनाशीलता यानि आदर्शवादी प्रेम की इच्छा को लेकर जीते है और कई बार प्रेम के व्यवहारिक पक्ष को नही समझ पाने के कारण अच्छे प्रेम के जीवनसाथी बनाने और बनने से चूक जाते है।

 

 

 

हस्तरेखा विज्ञान (भाग-5) हाथ में शनि पर्वत के महत्त्व को जानें, साथ ही जीवन पर पड़ने वाले इसके प्रभाव को जाने : श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

 

और अंगूठे की जड़ वाला और बीच वाला भाग के बीच में छोटी दिव्य आँख हो तो,व्यक्ति ज्योतिष विद्या या किसी भी गणितीय योग या कोडी या पासे आदि के फेंकने या व्यक्ति के अंग शास्त्र आदि रहस्यमयी विद्या पर वो अधूरी ही होती है,उसमे तर्क का उपयोग करके या अनुमान लगाने से भुत वर्तमान भविष्य को अच्छी तरहां बता पता है यानि अधिकतर उसका अनुमान सफल रहता है।ये यदि दोनों हाथ में हो तो,अवश्य चमत्कारिक अनुमान लगा पाता है,भरे अंगूठे में ये शेयर मार्किट या सट्टेबाजी से ऐसे ही सटीक अनुमान से धनवान बनता है।
ज्यादा भारी और लम्बा अंगूठा मोटी बुद्धि और केवल भौतिकवादी और भोगवादी चिंतन और उसीके लिए जीवन जीने वाला व्यक्ति होता है।इसके साथ नाख़ून छोटे हो तो,अड़ियल और जिद्दी या केवल तर्क से बात मानने वाला व्यक्ति होता है।
लचकदार अंगूठा पढ़े गए विषय को अपनी तरहां समझने और बोलने वाला और थोड़ा हिचकने या एक दम से लोगो के सामने आने या उनसे बात करने से बचता है,पर जब उनसे खुल जाता है या उसकी पसन्द के लोग मिलते या जाँच लेता है,तब सहज होकर सदा मित्रता बनाये रखने में और निभाने में विस्वास रखता है।पर उसे उसका फल नहीं मिलता है और ऐसी स्थिति में वो मित्रो या जरूरत वाले के लिए खर्चीले स्वभाव का होने पर धन और मन की हानि और निराशा उठता है।यो चिड़चिड़ा जाता है, यो ही उसे गैस की समस्या रहती है।
सीधा खड़ा बिना झुका और भरे अंगूठे वाला व्यक्ति या स्त्री की सोच वेभ्वशाली,भौतिकता भरी,खान पान के शौकीन भरी,अपनी साहयता और सहानभूति पाने की अधिक इच्छा लिए, गृहस्थी जीने की होती है और नाख़ून लम्बा कम और चोडा हो,और उसपर चन्द्र नहीं हो, तो इनमें स्वार्थ का भाव अधिक होता है,इनकी मुस्कान अच्छी पर निर्विकार यानि भावविहीनता की प्रधानता लिए अधिक होती है और तुरन्त ही गायब हो जाती है।
इन्हें बड़े बड़े पद और प्रतिष्ठा मिलती है पर ये जन या लोकप्रिय अधिक समय तक नहीं रहते है,इनकी अपेक्षा लचक अंगूठे वाले मनुष्य देर से सही पर स्थायी जनप्रिय और लोक प्रसिद्धि पाते है।
अंगूठे का ऊपर का पहला पोर नाख़ून सहित छोटा और गंठा हुआ सा और कठोर होता है,तो वो व्यक्ति हत्याएं करता और अंत में हत्या से म्रत्यु होती है और स्त्री के हाथ में ये उसके गृहस्थी सुख में बड़ी कमी करता है और दो विवाह होते है,या बहुत समय किसी समलिंगी लड़की या लड़के के साथ रहकर अंत में बड़ी उम्र में विदुर व्यक्ति से विवाह होता है।कार्य और क्षेत्र,स्थान और अच्छी लगी लगाई नोकरी छोड़नी पड़ती है और संघर्ष में जीवन जाता है।विवाद या मुकदमे लड़ने या वकील बनकर व्यक्तिगत और उस व्यवसाय में जीवन बीतता है।भला स्वभाव होने पर परिस्थितिवश जीवन विवादस्थ रहता है।
अंगूठे के ऊपर के भाग के बीच में चक्र की जगहां अर्द्ध चक्र या शंख या सीप जैसा चिन्ह हो,तो व्यक्ति चिंतक ज्यादा और उसके अनुपात में काम कम करता है और बातें बनाने में व्यवहारिक और आदर्शवादी ज्ञान के पक्ष को विश्लेषण करके प्रसिद्धि पाता या ऐसे मनोवैज्ञानिक विषय का चिकित्सक या चेहरे पढ़ने वाला और नवीन कला प्रतिभा से लाभ पाने वाला और ध्यान विधि का ज्ञाता और दर्शन शास्त्री होता है।यदि लचक वाला अंगूठा हो तो ये ज्ञान और भी व्यवहारिक बनाकर जनप्रिय बनता है।उसमे नेता के गुण होते है। बस यहां खड़ी या पड़ी रेखा नही हो,अन्यथा उसे ये सबमें सफलता मिलते मिलते रह जाने की विफलता भी देखनी पड़ती है।
और लचीले अंगूठे वाले का गणित विषय या ऐसे ही आंकड़े लगाने वाले विषय कमजोर होते है,उनकी स्म्रति यानि रटन्त विद्या कमजोर होती है,पर उनका विश्लेषण सर्वोत्तम होता है।
और सख्त या खड़े अंगूठे का गणित और रटन्त और आंकड़े बाजी बहुत अच्छी होती है,पर ज्ञान का व्यवहारिक और विश्लेषण करने का पक्ष सुद्रढ़ नहीं होता है।
अंगूठे के ऊपर अंत में नाख़ून से पहले नोकिलापन नही होना चाहिए,ये व्यक्ति की विशेषता को कम करता है और ये गोलाई लिए हो तो,गुणों में व्रद्धि या ठीक जीवन देती है।
अंगूठे के साइड में रेखाएं यदि गहरी और बिना कटी फ़टी हो तो,व्यक्ति को जब भी साहयता की जरूरत पड़ती है,मिल जाने से कार्य बन जात्ते है।अन्यथा समय पर साहयता नहीं मिलती है।
अंगुठे के निचले दोनों भागों में या किसी एक पर खड़ी रेखा हो,तो ये प्रसिद्धि की रेखा होती है,या यहां से शुक्र पर्वत पर रेखा जा रही हो और साफ हो तो,उसे विपरीत लिंगियों से लाभ और प्रेम में सफलता,फ़िल्मी जीवन,वैभव,शुक्र से सम्बंधित सभी सुखो की प्राप्ति होती है।ऐसा व्यक्ति या स्त्री अपनी किसी चित्रांकन,फोटोग्राफी,लेखन, ग्राफिक्स,गाने,एनीमेशन आदि से बहुत प्रसिद्धि मिलती है,यदि ये रेखा थोड़ी भी या छोटी भी हो,तो भी ऐसे शोक से प्रसिद्धि मिलती है।
अंगूठे के पीछे नाख़ून के नीचे की और जो पहली से लेकर अंतिम तक जो गहरी रेखाएं यदि पूरी स्पष्ट हो,तो एक रेखा 20 साल का प्रतिनिधित्व करती है,यो वे वर्ष की गणना करके उस समय के जीवन के सुख दुःख के विषय में सफलता से जाना जा सकता है।यहाँ कटी फ़टी रेखा संघर्ष को देंगे।वहाँ खड़ी रेखा स्पष्ट हो तो, अचानक प्रसिद्धि भी और कटी हो तो, अचानक हानि देती है।यहाँ से मनुष्य का सम्पूर्ण भविष्य का ज्ञान सम्भव है।बस ध्यान से देखने का अभ्यास करें।
नाख़ून पर खड़ी काली या लाल रेखा शरीर में किसी भी रक्त विकार से विष बढ़ने और ह्रदय या केंसर होने जेसे रोग को बताती है।गुलाबी नाख़ून अच्छी सोच और स्वस्थ को बताते है और सफेद नाख़ून व्यक्ति कितना ही देखने में अच्छा लगता हो,वो अंत में धोखा देगा,इसकी सम्भावना अधिक होती है।या यो कहे की स्वार्थी होता है।यहां चन्द्र शुभ होता है,पर ज्यादा बड़ा चन्द्र व्यर्थ की चिंता से अपनी एकाग्रता और उत्तम कल्पनाशीलता का गुण खोने से एकांकी जीवन को देता है,पर देर सवेर वो सफलता पा लेता है।चन्द्र चिन्ह वाले ये लोग भाग्यवादी नहीं होते है,ये अपने निरन्तर परिश्रम और नई सोच से भाग्य बनाते है,बस इन्हें ये जानना भर होता है,जैसा की बिना चन्द्र वालों को पूर्वजन्म के भाग्य से जीवन का सुख दुःख आदि मिलता है।
अंगूठे से हथेली की और जाती मासपेशियों में दर्द रहे,चाहे बहुत लेखन या किसी भी कारण से अंगूठे पर दबाब से,तो व्यक्ति को उलटे अंगूठे से सीधे और सीधे अंगूठे से उलटे कन्धे से गर्दन के बीच में दर्द रहने की शिकायत रहने लगती है,यो इस मांसपेशी को हलके हलके दबाब से दबाने से ये दर्द अति शीघ्र ठीक हो जाता है।
अंगूठे को कभी मुट्ठी में दबाकर नहीं बेठना चाहिए, इससे आत्मबल कम होता जाता है।
उपाय:-
अंगूठे में चांदी का छल्ला पहने से या हीरे को जड़वाकर शुक्रवार के दिन पहनने से शुक्र ग्रह से सम्बंधित सभी गुणों यानि एश्वर्य,प्रसिद्धि और भौतिक दुनियां यानि फ़िल्मी,पत्रकारिता,फिल्मांकन, धातु रोगों में,लक्ष्मी और प्रेम की देवी पूर्णिमां माता की कृपा और सभी सुख सुविधाओं के कार्यों में बड़ा लाभ होता है।

और जैसा की मैने पहले के लिखों में बताया है की-अंगूठे की मालिश करके अपने गुरु मंत्र से या ॐ शुं शुक्राय नमः मन्त्र से जप और ध्यान करने भर से अनेक चमत्कारिक लाभ प्राप्त होते है।

 

 

“इस लेख को अधिक से अधिक अपने मित्रों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों को भेजें, पूण्य के भागीदार बनें।”

अगर आप अपने जीवन में कोई कमी महसूस कर रहे हैं? घर में सुख-शांति नहीं मिल रही है? वैवाहिक जीवन में उथल-पुथल मची हुई है? पढ़ाई में ध्यान नहीं लग रहा है? कोई आपके ऊपर तंत्र मंत्र कर रहा है? आपका परिवार खुश नहीं है? धन व्यर्थ के कार्यों में खर्च हो रहा है? घर में बीमारी का वास हो रहा है? पूजा पाठ में मन नहीं लग रहा है?
अगर आप इस तरह की कोई भी समस्या अपने जीवन में महसूस कर रहे हैं तो एक बार श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के पास जाएं और आपकी समस्या क्षण भर में खत्म हो जाएगी।
माता पूर्णिमाँ देवी की चमत्कारी प्रतिमा या बीज मंत्र मंगाने के लिए, श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज से जुड़ने के लिए या किसी प्रकार की सलाह के लिए संपर्क करें +918923316611

ज्ञान लाभ के लिए श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के यूटीयूब

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श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः

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