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संतों को मंत्री बना विवादों में फंसे शिवराजसिंह चौहान, खूब हो रही है आलोचना, सरकार पर आरोप लगाने वाले बाबाओं के भी बदले सुर

 

 

ये वही संत हैं जिन्होंने शिवराज सरकार को घोटालों की सरकार कहा था और मुख्यमंत्री की जबरदस्त आलोचना की थी। लेकिन पल भर में ऐसा क्या हुआ कि सब कुछ बदल गया और साथ ही बदल गए बाबाओं के सुर?

बता दें कि कल तक जिन पांचों संतों ने शिवराज सिंह चौहान द्वारा पिछले साल नर्मदा किनारे लगाए गए पौधों और अन्य विकास कार्यों की ‘पोल’ खोलने के लिए ‘नर्मदा घोटाला रथयात्रा’ शुरू करने का ऐलान किया था अब मंत्री बनते ही बाबाओं के रुख में भी अचानक बदलाव आया है।

 

 

“अब बाबाओं ने मंत्री पद की हैसियत मिलने के बाद अपनी पूर्व की घोषणा से कदम पीछे खींच लिए हैं। अब ये सभी बाबा जनजागरण करने की बात कर रहे हैं।”

 

बता दें कि सीएम शिवराजसिंह चौहान ने कंप्यूटर बाबा, भय्यू महाराज, अमरकंटक (नर्मदा उद्गम) के हरिहरानंदजी, डिंडोरी के नर्मदानंदजी और पंडित योगेंद्र महंत को राज्य मंत्री पद का दर्जा दे दिया था। ये वहीं पांचों संत हैं जिन्होंने शिवदाजसिंह चौहान के खिलाफ नर्मदा घोटाले के मामले में सीएम को जबरदस्त घेरा था।

 

बीते 28 मार्च को इंदौर के गोम्मटगिरि स्थित कालिका आश्रम में संतों की एक बैठक में एक अप्रैल से 15 मई तक ‘नर्मदा घोटाला रथयात्रा’ निकालने का निर्णय लिया था। यह भी तय किया गया था कि इस यात्रा के दौरान उन छह करोड़ 67 लाख पौधों की गिनती का काम होगा जो मुख्यमंत्री चौहान की नर्मदा सेवा यात्रा कार्यक्रम के तहत गत वर्ष दो जुलाई को लगाए गए थे। इन बाबाओं ने इस सरकारी मेगा शो को महाघोटाला करार दिया था।

लेकिन जैसे ही इस मुद्दे को लेकर हलचल तेज़ हुई वैसे ही मुख्यमंत्री ने बाबाओं से मीटिंग कर सबको साध लिया।
31 मार्च को मुख्यमंत्री शिवराज ने कंप्यूटर बाबा सहित तमाम संतों की बैठक की। इसके बाद ही सरकार ने विभिन्न चिह्नित क्षेत्रों, खासकर नर्मदा किनारे के इलाकों में पौधरोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता सहित अन्य विषयों पर जनजागरण के लिए एक कमेटी गठित कर दी और इन बाबाओं को उसका सदस्य बनाकर राज्य मंत्री का दर्जा दे डाला।

सरकार के ऐलान से पहले कंप्यूटर बाबा व योगेंद्र महंत ने वीडियो जारी कर एक अपील की थी जिसमें उन्होंने आम लोगों से ‘नर्मदा घोटाला रथयात्रा’ में भागीदार बनने का आग्रह किया था। इस अपील में कंप्यूटर बाबा ने नर्मदा किनारे बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध रेत उत्खनन को उजागर करने का दावा किया था। साथ ही बड़ी संख्या में गौ हत्या को भी उजागर करने की बात कही थी। लेकिन जैसे ही इन पांचों संतों को राज्यमंत्री का दर्जा हासिल हुआ वैसे ही बाबाओं के सुरों में बदलाव आ गया।

लेकिन अब कंप्यूटर बाबा समेत पांच संतों को राज्य मंत्री का दर्जा देकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नए विवाद में फंस गए हैं। सरकार के फैसले के खिलाफ अब हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में याचिका दाखिल कर दी गई है। वहीं कांग्रेस ने भी इस फैसले पर सवाल उठाते कहा है कि बाबाओं को मंत्री का दर्जा देना शिवराज सरकार की कमजोरी को दिखाता है।

बता दें कि कंप्यूटर बाबा के साथ इंदौर के भय्यू महाराज, अमरकंटक (नर्मदा उद्गम) के हरिहरानंदजी, डिंडोरी के नर्मदानंदजी और पंडित योगेंद्र महंत को राज्य मंत्री पद का दर्जा देने वाला आदेश राज्य सरकार की ओर से मंगलवार को जारी किया गया। इस फैसले के बाद से सरकार और मुख्यमंत्री के फैसले पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। रामबहादुर शर्मा नाम के एक व्यक्ति की ओर से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने राज्य मंत्री की संवैधानिकता को लेकर याचिका लगाई है। सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।

 

“राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद बाबाओं को वे तमाम सुविधाएं मिलेंगी जो मंत्रिपरिषद के किसी सदस्य को हासिल होती हैं। इनमें वेतन भत्ते से लेकर वाहन, बंगला, पीए और तमाम सुख सुविधाएं शामिल हैं।”

 

वहीं कांग्रेस ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पर बड़े आरोप लगाए हैं।
कांग्रेस नेता राज बब्बर ने पांच बाबाओं को राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने के फैसले को लेकर बुधवार को शिवराज सिंह चौहान सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान को विधानसभा चुनाव में जीत के लिए बाबाओं पर भरोसा करना पड़ रहा है। वह सोचते हैं कि बाबाओं पर भरोसा कर वे चुनाव जीत सकेंगे लेकिन यह असंभव है।’


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