SC-ST एक्ट को लेकर दलितों का भारत बंद और उसमें होने वाली हिंसा की तस्वीरे अब साफ होने लगी हैं। धीरे-धीरे स्पष्ट होता जा रहा है कि इस हिंसा के कौन लोग जिम्मेदार हैं। कई जगह से पुलिसिया कार्रवाई की तस्वीरे सामने आ रही हैं तो हिंसा करने वाले और फैलाने वाले कुछ लोगों के नाम भी सामने आ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल उठता है कि क्या वाकई ऐसा दलितों ने किया?
बता दें कि 2 अप्रैल को एससी-एसटी एक्ट को लेकर दलित देशभर में विरोध प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरते हैं लाखों की संख्या में बिना किसी नेता की अगुवाई में इतनी बड़ी संख्या में दलितों का प्रदर्शन सरकार की नींदें उड़ा देने वाला था, क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में दलितों का सड़कों पर उतरना, सरकार व सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करना वाकई सरकार की नींदे उड़ा देने वाला था।
लेकिन इतनी बड़ी संख्या में लोगों का हिंसक प्रदर्शन यह कहीं न कहीं केंद्र व प्रदेश सरकारों की बड़ी नाकामयाबी दर्शाता है।

SC-ST एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट की नई गाइडलाइन के विरोध में सोमवार को जिस तरह भारत बंद पर हंगामा हुआ ठीक उसी दौरान मध्य प्रदेश के तीन जिलों में जबर्दस्त हिंसा हुई, लोगों ने दलितों के जुलूस पर पत्थर बरसाए और गोलीबारी भी की जिसके बाद पुलिस ने वहाँ कर्फ़्यू लगा दिया। अभी भी कर्फ्यू लगा हुआ है। मुरैना में तो मंगलवार को कर्फ्यू के बावजूद लोग सड़कों पर निकले और फायरिंग हुई। सुरक्षा बलों ने रात भर फ्लैग मार्च किया। पुलिस ने हिंसा में शामिल अनेक लोगों को प्रकरण दर्ज कर हिरासत में लिया है।

सोशल मीडिया में वायरल कुछ इस तरह की तस्वीरें
भिंड में एक व्यक्ति का शव बरामद हुआ है। मृतकों की संख्या भी छह से बढ़कर आठ हो गई है। इस दौरान ग्वालियर के कलेक्टर ने कर्फ्यू प्रभावित इलाके में सभी के शस्त्र लाइसेंस फिलहाल निरस्त कर दिए हैं। उधर उपद्रव को लेकर दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया गया है।
कर्फ्यू के बावजूद ग्वालियर, मुरैना और भिंड में तनाव बना रहा। हिंसा भड़काने की कोशिश भी हुई। मुरैना के उत्तमपुरा में लोगों ने फायरिंग की। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई कर स्थिति को काबू में किया। तीनों जिलों में करीब एक हजार लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। इंटरनेट सेवा आज भी बंद रही, पर कथित वीडियो आज भी वायरल होते रहे।
भिंड के गोहद में राज्य मंत्री लाल सिंह आर्य के निवास पर पथराव किया गया। मंगलवार सुबह भिंड के मछंड में पचास वर्षीय व्यक्ति का शव बरामद होने के बाद सोमवार की हिंसा में मारे जाने वालों की संख्या 8 हो गई है। आठ मौत इन्हीं तीन जिलों में ही हुई हैं। इस बीच राजधानी भोपाल में भी कलेक्टर ने धारा 144 लागू करते हुए सोशल मीडिया पर कई पाबंदी लगा दी हैं। मसलन आपत्तिजनक पोस्ट डालने, उसे पसंद या फॉरवर्ड करने पर 2 जून तक रोक रहेगी।

उधर राजस्थान से भी इसी तरह की खबरें आ रही हैं। हमारे राजस्थान संवाददाता जगदीश जी तेली ने बताया कि शान्ति व्यवस्था बनाये रखने के प्रशासन ने कड़े कदम उठाये हैं। किसी तरह की कोई अप्रिय घटना ने हो इसके लिए डूंगरपुर जिले के आसपुर तहसील व साबला तहसील मे धारा 144 लागू कर दी है।
वहीं दूसरी खबर है कि करणी सेना व विश्व हिंदू परिषद के लोगों ने भारत बंद में दलितों के जुलूस पर पथराव किया व गोली भी चलाई, गोली चलाने वाले युवक की तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें बताया जा रहा है कि वह युवक करणी सेना का है दलितों से उसका कोई लेना देना नहीं।
वहीं सांचौर में पूलिस ने उपद्रवियों के ऊपर फायरिंग की जिसमें कई लोग घायल बताए जा रहे हैं।
राजस्थान में 11 लोगों के मारे जाने की खबर है।
ऐसी ही तस्वीर ग्वालियर से भी है जिसमें बजरंग दल के कुछ युवकों को पुलिस में हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
अब सबसे बड़ा सवाल सरकारी तंत्र की नाकामयाबी पर उठ रहा है कि ऐसा कैसे हुआ? क्या सरकार के पास इस तरह के कोई इनपुट नहीं होते? क्या खुफिया तंत्र इस कदर कमजोर हो गया कि देश में हिंसा हो जाये? लोग एक दूसरे की जान के दुश्मन बन जाएं? सवाल तो कई हैं लेकिन जबाव देने वाला शायद ही कोई हो।
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एमपी से अजय कश्यप के साथ राजस्थान से जगदीश जी तेली की रिपोर्ट
ख़बर 24 एक्सप्रेस
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