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यूपी सरकार का बड़ा फैसला, गैरसरकारी स्कूलों पर मनमानी फीस वसूलने तथा अवैध वसूली करने पर लगेगी लागम, पढ़ें यह ख़बर

 

 

 

 

“गैरसरकारी स्कूल जो मनमाने तरीके से फीस वसूलते हैं, कई और तरीकों से अभिभावकों से पैसा ऐंठते हैं अब यह सब बन्द होने जा रहा है। यूपी सरकार इसके लिए जल्द ऐसा नियम लागू करने जा रही है जिससे सीधे तौर पर प्राइवेट स्कूल में पढने वाले छात्रों व उनके अभिभावकों को फायदा मिलेगा।”

 

 

 

 

यूपी सरकार के इस फैसले से अब यूपी के निजी स्कूल मनमाने तरीके से फीस नहीं वसूल पाएंगे। बता दें अच्छी शिक्षा के लिए प्राइवेट स्कूल का मुंह देखने वाले अभिभावकों की यही सबसे बड़ी परेशानी होती है कि पहले एडमिशन के वक़्त मोटी रकम जमा करो, उसके बाद किताबों का बोझ, फिर महीने की फीस और इसके बाद… इस चीज के लिए पैसे, उस चीज के लिए पैसे.. अभिभावकों की नाक में दम आ जाता है। कई स्कूल तो ब्लैकमेलिंग पर उतर आते हैं। पिछले साल यानि 2017 में इस तरह की एक लाख सत्तर हजार से अधिक शिकायत केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय में आईं, अब सोचिए प्रदेशों में ऐसी कितनी शिकायतें होती होंगी जो पहुंचती ही नहीं होगी।

 

 

यूपी में निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए योगी कैबिनेट ने मंगलवार को शुल्क निर्धारण अध्यादेश के प्रारूप को मंजूरी दे दी। इसके मुताबिक निजी स्कूल न तो मनमानी फीस वसूल सकेंगे और न ही पांच साल से पहले यूनिफॉर्म बदल सकेंगे। यूपी स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क का निर्धारण) अध्यादेश-2018 के दायरे में 20 हजार रुपये से अधिक सालाना फीस लेने वाले सभी स्कूल आएंगे।

 

 

सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि प्रस्तावित अध्यादेश शैक्षिक सत्र 2018-19 से लागू होगा। सीबीएसई, आईसीएसई और यूपी बोर्ड समेत सभी शिक्षा बोर्डों पर ये नियम लागू होंगे। स्कूल किसी खास दुकान से किताबें व यूनिफॉर्म खरीदने को बाध्य भी नहीं कर सकेंगे। अल्पसंख्यक संस्थान भी इसके दायरे में आएंगे।

संभावित शुल्क : इसमें पंजीकरण, प्रवेश, परीक्षा और संयुक्त वार्षिक शुल्क शामिल होगा।
वैकल्पिक शुल्क : बस का किराया, बोर्डिंग, मेस, डाइनिंग, शैक्षणिक भ्रमण और अन्य मद। यह शुल्क तभी लिया जा सकेगा जब छात्र इन सेवाओं का इस्तेमाल कर रहा होगा।

 

 

“डॉ. शर्मा ने कहा कि निजी स्कूल वार्षिक फीस में 5 फीसदी से अधिक वृद्धि नहीं कर सकेंगे। अन्य मदों को भी मिला दें तो अधिकतम वृद्धि 7-8 फीसदी ही कर सकेंगे। फीस स्ट्रक्चर अनिवार्य रूप से वेबसाइट पर प्रदर्शित करना होगा। एडमिशन फीस सिर्फ एक बार ही वसूल सकेंगे। फीस निर्धारण के लिए वर्ष 2015-16 को आधार वर्ष माना जाएगा।”

 

 

 

 

शुल्क नियंत्रित करने के लिए प्रत्येक मंडल में मंडलीय समिति बनाई जाएगी। इसका निर्णय न मानने पर स्कूल प्रबंधन पर पहली बार एक लाख रुपये, दूसरी बार 5 लाख रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। तीसरी बार मान्यता रद्द कर दी जाएगी। अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा संजय अग्रवाल ने बताया कि प्रस्तावित विधेयक के प्रावधान उन्हीं स्कूलों पर लागू नहीं होंगे, जो सिर्फ प्री स्कूलिंग शिक्षा देते हैं।


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