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70 के दशक के मशहूर रोमांटिक अभिनेता और कपूर खानदान के शशि बाबा अब नहीं रहे

 

हम गायब होने वालों में से नहीं है..जहां-जहां से गुजरते हैं जलवे दिखाते हैं…दोस्त तो क्या, दुश्मन भी याद रखते है (शशि कपूर, फ़िल्म सिलसिला)

 

अपने दौर के सबसे सुंदर और रोमांटिक छवि वाले, कपूर खानदान के शशि बाबा नहीं रहे। 79 साल की उम्र में शशि कपूर हम सबको अलविदा कह गए।

ये वही शशि कपूर थे जिनका नाम लेते ही उनकी रोमांटिक छवि आंखों के सामने घूमने लग जाती है।
ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मिली, आओ ना तरसाओ ना….
तोता मैना की कहानी तो पुरानी पुरानी हो गई…
ले जाएंगे दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे…
बांहों में तेरी मस्ती के घेरे…
मोहब्बत बड़े काम की चीज है..

ये आल टाइम फेवरेट गाने जहां में आते ही शशिकपूर की तस्वीर दिल में उतर आती है। लगता है कि बस कल की ही तो बात थी। उनको देखकर आज भी लाखों दिलों की धड़कने तेज़ हो जाती हैं।
शशि कपूर की यादें, शशि कपूर के डायलॉग, उनकी बेहतरीन फिल्में हमेशा याद रहेंगी। शशि कपूर जवां दिलों को धड़कन बनकर हमेशा लोगों की ज़हन में जिंदा रहेंगे।

अपने दौर के सबसे हैंडसम एक्टर शशि कपूर की मौत के बाद पूरे बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई। शशि कपूर को साल 2014 से चेस्ट में तकलीफ थी। इससे पहले उनकी बायपास सर्जरी भी हुई थी। लंबे समय से बीमार चलने के बाद आखिरी सांस
बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता शशि कपूर का 79 साल की उम्र में सोमवार शाम निधन हो गया। 70 और 80 के दशक में रोमांस के प्रतीक रहे शशि ने कोकिला बेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में अपनी अंतिम सांसे लीं। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और पिछले तीन हफ्ते से उनकी हालत ज्यादा खराब थी।
वर्ष 2014 में फिल्मी दुनिया के सबसे बड़े ‘दादा साहब फालके पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। 18 मार्च 1938 में कोलकाता में जन्मे शशि ने अभिनय के साथ ही कई फिल्मों का निर्देशन भी किया। शशि साहब की मौत की खबर सुनते ही बॉलीवुड के कई दिग्गज कलाकारों, निर्देशक-निर्माताओं ने शोक प्रकट किया।

शशि कपूर का असली नाम बलबीर राज कपूर था। प्यार से शशि कहलाए जाने वाले एक्टर ने फिल्मों में इसी नाम से आने का फैसला लिया। अपने दोनों भाई राज कपूर और शम्मी कपूर से छोटा होने के कारण उन्हें शशि बाबा भी कहा जाता था।

1961 में ‘धर्मपुत्र’ से शशि ने अपना करियर शुरू किया। इस फिल्म का निर्दशन यश चोपड़ा ने किया था जो ‘आचार्य चतुरसेन’ नामक उपन्यास पर आधारित थी। 1961 को इस फिल्म को प्रेसिडेंट सिल्वर मेडल मिला। शशि ने जब बतौर हीरो अपना करियर शुरू किया तब उनके भाई राज कपूर और शम्मी कपूर अपने करियर के शीर्ष पर थे।

‘नमक हलाल’ और ‘दीवर’ जैसी फिल्मों के लिए मशहूर शशि के बारे में कहा जाता है कि लड़कियां और महिलाएं उनकी दीवानी थी। शशि कपूर को बड़ी सफलता फिल्म ‘जब जब फूल खिले’ (1965) से मिली। मधुर संगीत, रोमांटिक कहानी और शशि कपूर-नंदा की जोड़ी ने सभी का मन मोह लिया।

शशि ने 70 और 80 के दशक के मध्य तक 116 फिल्मों में काम किया। आग, आवारा, जब जब फूल खिले, शर्मीली, चोर मचाए शोर, दीवार, कभी-कभी, सत्मय शिवम सुंदरम, सुहाग, काला पत्थर, शान, क्रांति, नमक हलाल को शशि कपूर के करियर की यादगार फिल्में माना जाता है।

 

ख़बर24 एक्सप्रेस की पूरी टीम की तरफ से सदी के एक बेहतरीन, सदाबहार और रोमांटिक हीरो शशि कपूर को सच्ची श्रद्धांजलि।

 

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