
आरुषि हेमराज की मर्डर मिस्ट्री अभी तक अनसुलझी है। आज कोर्ट ने हत्या के आरोपी आरुषि के मम्मी पापा को बरी कर दिया। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर ये दोनों आरोपी नहीं थे तो आरुषि हेमराज को किसने मारा? 15 मई 2008 से चले आ रहे इस केस में अभी तक कोई ससबूत नहीं मिला है लेकिन आरुषि के मम्मी पापा को सीबीआई ने दोषी माना और निचली अदालत ने दोनों को उम्र कैद की सजा सुनाई।
अब जब आरुषि के मम्मी पापा यानि तलवार दंपति को बरी कर दिया गया है तो अब ऐसे में सीबीआई जांच पर सवाल खडे हो गए है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर आरुषि और हेमराज की हत्या किसने की। आरुषि-हेमराज हत्याकांड की जांच 9 साल बाद फिर उसी जगह आकर अटक गई है। 9 साल पहले 15 व 16 मई 2008 की रात को जब आरुषि की हत्या हुई थी तब सवाल यह उठा था कि हत्यारा कौन है? मामले की जांच शुरू हुई और जांच एजेंसी की बदलती थिअरी और उस पर उठते सवालों के बीच यह केस आगे बढ़ता रहा। शुरू से लेकर आखिर तक यह केस मिस्ट्री बनी रही और अब भी यह सवाल कायम है कि आखिर कातिल कौन है? आपको बता दें कि डॉ तलवार की नाबालिग पुत्री आरुषि की हत्या वर्ष 2008 में 15 मई की रात नोएडा के सेक्टर 25 स्थित घर में ही कर दी गई थी।
विवेचना के दौरान अगले ही दिन घर की छत पर उनके घरेलू नौकर हेमराज का शव भी पाया गया था। इस हत्याकांड में नोएडा पुलिस ने 23 मई को डॉ. राजेश तलवार को बेटी आरुषि और नौकर हेमराज की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। 1 जून को इस मामले की जांच सीबीआई को स्थानांतरित हो गई। सीबीआई की जांच के आधार पर गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट ने 26 नवंबर, 2013 को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। तब से तलवार दंपति जेल में बंद हैं। लेकिन, अब हाईकोर्ट ने दोनों को इस मामले में बरी कर दिया और आज भी सवाल यही बना हुआ है कि आखिर आरुषि और हेमराज की हत्या किसने की?
आरुषि-हेमराज हत्याकांड के मामले में हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए कहा कि तलवार दंपति ने अपनी बेटी आरुषि की हत्या नहीं की है। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि माता-पिता को सिर्फ इसलिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि वह घटना की रात घर में मौजूद थे। उन्हें इस मामले से बरी किया जाता है। न्यायमूर्ति बी.के. नारायण और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र की खंडपीठ ने जांच एजेंसी की जांच में कई खामियां पाई और राजेश तलवार और नुपूर तलवार को को बरी कर दिया।
तलवार दंपती का दावा था कि सीबीआई की कहानी यह है कि आरुषि और हेमराज आपत्तिजनक अवस्था में थे और जब तलवार दंपती ने इसे देखा तो एकाएक गुस्से में पहले गोल्फ स्टिक से दोनों के सिर पर वार किया और फिर ब्लेड से गला काट दिया। इसके बाद हेमराज की बॉडी छत पर घसीटकर ले गए। तलवार का कहना था कि अगर ऐसा ही हुआ कि कत्ल नीचे कमरे में हुआ तो कमरे में हेमराज के खून के धब्बे मिलने चाहिए थे और सीबीआई को वह धब्बे क्यों बरामद नहीं हुए।
सीबीआई ने आरुषि के बेड से लेकर तमाम जगह सैंपल उठाए लेकिन हेमराज के खून के निशान क्यों नहीं दिखे। सीबीआई का दावा था कि दोनों आपत्तिजनक अवस्था में थे तो ऐसे में मौके पर सीबीआई को हेमराज के शरीर का कोई सैंपल क्यों नहीं मिला। आरुषि का सैंपल भी नेगेटिव पाया गया था। सीबीआई के गोल्फ स्टिक की थिअरी पर भी तलवार दंपती ने सवाल उठाया था और कहा था कि पहले सीबीआई ने कहा कि स्टिक नंबर 5 से वार हुआ था, लेकिन बाद में कहा कि स्टिक नंबर 4 से वार किया गया था। तलवार दंपती का कहना था कि सीबीआई की चार्जशीट में इस बात का जिक्र नहीं है कि कृष्णा के तकिए से हेमराज के खून के निशान कैसे मिले, जबकि शुरुआती जांच में ये बातें आई थीं।
सीबीआई ने इस मामले में नया तर्क गढ़ा कि जब जांच के लिए तकिए को भेजा गया था तो तकिए की अदला-बदली हो गई थी। कृष्णा के तकिए पर हेमराज का खून मिलना एक अलग ही ऐंगल बताती है और यह पुख्ता सबूत था, लेकिन सीबीआई ने इसे नजरअंदाज कर दिया। साइंटिफिक टेस्ट में नौकरों के खिलाफ पॉजिटिव रिपोर्ट थी, लेकिन सीबीआई ने कहा कि सबूत नहीं है। सीबीआई के पास इस बात के पुख्ता सबूत नहीं है कि हेमराज और आरुषि आपत्तिजनक अवस्था में थे। दोनों का कत्ल कमरे में हुआ और फिर हेमराज के शव को घसीटकर छत पर ले जाया गया। तलवार का दावा था कि केस परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और साक्ष्यों की कडिय़ां टूट रही हैं।
अदालत का फैसला सामने आने के बाद डॉसना जेल के अधिकारियों ने कहा, हमें मालूम चला है कि तलवार दंपति को बरी कर दिया गया है। फैसले के दिन सुबह वह थोड़ा तनाव में दिख रहे थे, लेकिन फैसला आने के बाद वे काफी खुश हैं। जेलर से यह पूछे जाने पर कि दोनों को कब तक रिहा किया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि जैसे ही न्यायालय के फैसले की कॉपी उन्हें मिल जाएगी उन्हें कानूनी प्रक्रिया पूरी कर छोड़ दिया जाएगा। गौरतलब है कि इस मामले में आरोपी दंपति डॉ़ राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने सीबीआई अदालत गाजियाबाद की ओर से आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की थी।
अदालत का फैसला आने के बाद राजेश तलवार और नुपूर तलवार के वकील तनवीर अहमद ने मीडिया से बातचीत में कहा, चार महीने की लंबी बहस के बाद अदालत ने मेरे दोनों मुवक्किल को मामले से बरी कर दिया है। उम्मीद है कि वह शुक्रवार दोपहर तक जेल से रिहा हो जाएंगे। तनवीर अहमद ने कहा, पिछले चार महीने से इस मामले में बहस चल रही थी। यह बहस बुधवार को पूरी हुई थी, जिसके बाद दो खंडपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को पीठ ने अपना फैसला सुनाया, जिसमें उसने साफ तौर पर कहा कि माता-पिता को सिर्फ इसलिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता कि वह घटना की रात घर में मौजूद थे।
तनवीर अहमद ने कहा, चार महीने के दौरान दोनों पक्षों के बीच इस मामले को लेकर काफी सकारात्मक माहौल के बीच बहस हुइ थी। अदालत ने इस दौरान दोनों पक्षों के वकीलों को इस बात के लिए भी धन्यवाद दिया कि दोनों पक्ष काफी अच्छे माहौल में बहस कर रहे हैं। इस बीच सीबीआई के वकील ने मीडिया से सिर्फ इतना कहा कि अदालत का फैसला पूरी तरह से पढऩे के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा। फिलहाल हमें फैसले की कॉपी का इंतजार है।
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