Breaking News
BigRoz Big Roz
Home / Breaking News / स्वतंत्रता दिवस पर विशेष… मैं जश्न-ऐ-आज़ादी कैसे मनाऊँ

स्वतंत्रता दिवस पर विशेष… मैं जश्न-ऐ-आज़ादी कैसे मनाऊँ

90 बच्चों की मौत पर… मैं जश्न-ऐ-आज़ादी कैसे मनाऊँ…

सरहद पर कटते जवानों के सर… मैं जश्न-ऐ-आज़ादी कैसे मनाऊँ…
राक्षसों के हाथों लूटती बेटी की अस्मत… मैं जश्न-ऐ-आज़ादी कैसे मनाऊँ…
नेताओं के हाथों लुटता देश… मैं जश्न-ऐ-आज़ादी कैसे मनाऊँ…
धर्म के नाम पर एक दूसरे के खून के प्यासे लोग… मैं जश्न-ऐ-आज़ादी कैसे मनाऊँ…

और अब में मैं क्या लिखूँ….??

*****

कोई बता दें मुझे
आज मैं क्या लिखूँ….
कटे हुए शहीदों के शीश लिखूँ…
या खून से लथपथ शहीदों की पीठ लिखूँ…
खंड-खंड होता भारत लिखूँ..
नारी का क्षीण-क्षीण होता सम्मान लिखूँ…
उसकी लूटती इज्ज़त का बखान लिखूँ..
उसे देखने वाली तमाशबीन भीड़ लिखूँ…
90 बच्चों की मौत का जश्न लिखूँ
उन रोती बिलखती माँओं के दर्द लिखूँ…
इंसान से डरते इंसान का भय लिखूँ…,
रोटी छीनते हुए नेता की भूँख लिखूँ
या कचरे से बीनते गरीब के उस निवाले को लिखूँ
कोई तो बता दे मुझे…
आज मैं क्या लिखूँ ??

जाग गया हूँ आज मैं…
मुझे क्या लिखना है।
मैं जोश लिखूँ…
जूनून लिखूँ..
जज्बा लिखूँ,
दुधारी तलवार लिखूँ..

अब पता है मुझे क्या लिखना है..
अब मैं यलगार लिखूँ..
ललकार लिखूँ..।
जगाना है मुझे इस सोते समाज को..
मैं क्रांति लिखूँ
अंगार लिखूँ..।

ना जाने किस आज़ादी का जश्न हम मना रहे हैं… अगर आपको फिर भी लगता है तो ये आज़ादी मुबारक..।

***

मनीष कुमार


Discover more from Khabar 24 Express Indias Leading News Network, Khabar 24 Express Live TV shows, Latest News, Breaking News in Hindi, Daily News, News Headlines

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Check Also

चांगोली के श्रीभगपीठ में ‘सिद्ध पितृ मोक्ष समाधि’ की अनोखी महिमा, चार दीप और पितृ यज्ञ से मिलती है पितरों को मुक्ति

चांगोली के श्रीभगपीठ में ‘सिद्ध पितृ मोक्ष समाधि’ की अनोखी महिमा, चार दीप और पितृ यज्ञ से मिलती है पितरों को मुक्ति

One comment

  1. Bahut sundar shabd likhe hain sir

Leave a Reply

Discover more from Khabar 24 Express Indias Leading News Network, Khabar 24 Express Live TV shows, Latest News, Breaking News in Hindi, Daily News, News Headlines

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading