धूम धूम भयंकर ध्वनिदिल दहलाती सबके।डीजे नाम मुसीबत जन्मीतीज त्योहार बज हर तबके।।बेस नाम कंपाती गूंजेदूर सदुर घर हिलाकर।नींद उचाटे सिर दर्द करतीमुहं से निकले गाली दिलकर।।बच्चे पढ़ नहीं पाते दिन मेंनहीं पढ़े रात इस शोर।कहे भी जाकर उस उत्सव मेंमचे विवाद बदले में जोर।।डॉक्टर प्रतिरोध करे नमरीज बढ़े घोर …
Read More »विश्व एड्स दिवस 2020 पर कविता इस दिवस पर अपने सामाजिक जागरूकता ज्ञान के साथ अपनी कविता के माध्यम से जनसंदेश देते स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी कहते है कि,
वर्ष 1988 में इस विश्व एड्स यानी एचआईवी दिवस के मनाने की शुरुवात की गई।वर्ष 1988 से 1 दिसंबर को हर साल इस महामारी से बचाव के समस्त उपायों के साथ जनजागरूकता देते हुए सम्पूर्ण विश्व भर में ये एड्स दिवस मनाया जाता है।जिसका उद्देश्य एचआईवी संक्रमण के प्रसार की …
Read More »कार्तिक पूर्णिमाँ 30 नवम्बर 2020 को गंग स्नान दीप दीपावली पर्व पर नियमों लॉकडाउन चलते कैसे पर्व मनाये बता रहें है स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी
30 नवम्बर 2020 को कार्तिक पूर्णिमा देव दीपावली ओर गुरु नानक प्रकाशोत्सव है,ओर इस दिवस पर अनगिनत हिंदू भक्तजन अपने पितरों को गंगा जी या पवित्र नदियों में दीपदान करते मंत्रानुष्ठान भोज व भंडारे कराते आये है,पर इस बार कोरोना महामारी के प्रति लोगो मे जो परस्पर दूरी नहीं रखने …
Read More »कार्तिक पूर्णिमा योग ज्ञानकविता इस कार्तिक माह की महापुर्णिमा पर्व की महामहिमा पर अपनी ज्ञान कविता से बता रहें है स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी
खिल उठा चंद्रमा निलंभरसोलह कला संग करता रास।बदल गया स्वरूप चन्द्र काबन ज्ञान पूर्णिमा कार्तिक मास।।दिव्य ओषधि रस नभ से टपकेचंद्र पूर्णिमा प्रेम ओस बनकर।जिस पर पड़ती अमृत सुख देतीहरती पीड़ा तन मन झरकर।।श्वेत रंग मिल निलवर्णीय आभाशुभ्र ज्योतिर्मयी कृपा जग दे।बनते सभी वृक्ष ओषधिस्फूर्ति जीव नव रग रग दे।।सत्य …
Read More »अंतर ओर बहिर शौच अर्थ इस अंतर बहिर शौच के विषय पर बता रहें है,अपनी क्रमबद्ध सत्संग ज्ञान कविता के माध्यम से स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी
आत्मा की इच्छा मन हैओर मन के है दो भाग।अंतर नाम सूक्ष्म इच्छाबहिर नाम है स्थूल राग।।शौच कहे अनियम कोजिसे कहते आदत बुरी।असंतुलित जीवन बताये जोउस जीवन चले शौच नाम छुरी।।जैसे प्रातः सोता रहेओर जागे सारी रात।खाये भोजन चटपटाफिर पेट शौच पाये घात।।पानी पिये बहुत कमया पिये भोजन बीच।या डाल …
Read More »एक लक्ष्य यानी जीवन मिशन बता रहें है,किसी के जीवन में दिखाई दे रही वर्तमान की बुलंदियां,उसके अनगिनत जन्मों की तपस्या को एक ही लक्ष्य बनाकर रखते हुए अंत मे पाता है,यो इस सबको क्रमबद्ध रूप से अपनी कविता के माध्यम से स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी
जीवन स्वयं एक लक्ष्य हैजो पिछले जन्मों का है चिंतन।उसे बदलते कर्म पथ बनाछोटे से बड़े रूप कर मंथन।।ऐसा क्या करूँ मेरा नाम होयही पहली पनपती सोच।आगे बढ़ता उस राह परजिस पर होती इस सोच की पहुँच।।उसी पहुँच की प्राप्तिकरता ले हर सम्भव सहयोग।कभी हारता बाजी जीतकरकभी लक्ष्य से होता …
Read More »काम का मनचाहा दाम कैसे मिले बता रहे है स्वामी सत्येंद्र जी…
काम चाहे कोई करोचाहे दूजे या निज काम।धीरज समझ परख बिननिपटाओ न जल्द काम।।संतुष्टि संग रख एकाग्रताबिन बिताये समय व्यर्थ।जब स्वयं को वो उत्तम लगेतभी लौटना उस मालिक अर्थ।।तब मिले देख संतुष्टि सबओर गलती निकले कम।सब मिले खुशी पुरुषकार संगकिया कर्म मिले बढ़ हम।।यो जल्दी किया काम कभीउत्तम फल नहीं …
Read More »भगवान कालभैरव जयंती यानि जन्मोउत्सव Kala Bhairav Jayanti 2020 Subh Muhurat 7 दिसंबर 2020 को मनाया जाता है, और कैसे जन्मे भैरव, भगवान शिव ने इन्हें क्या और कैसा दायित्त्व भार सौंपा…इस विषय में बता रहें हैं स्वामी सत्येंद्र सत्य साहिब जी…
मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 7 दिसंबर 2020 को महाकाल भैरव जयंती यानि जन्मोउत्सव मनाया जाएगा। इस दिन भगवान महाकाल भैरव का अवतार का प्राकट्य हुआ था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिव के अवतार महाकाल भैरव का जन्म कैसे हुआ ?.. हमारी पुराणों में वर्णित …
Read More »किस धर्म ने किस धर्म की नींव पर महल खडा करा?क्या वैदिक धर्म को जैन धर्म ने ओर जैन धर्म को बौद्ध धर्म ने ओर फिर बौद्ध धर्म को पुनः वैदिक धर्म ने रूपांतरण किया है,क्या है इन सबका धर्म प्रचार में अवतारवादी राजाशाही चार मूल अवतारों की प्रचलित श्रंखला रहस्य? प्रमाण,,बता रहें है स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी
आज अनेक बौद्ध मतावलियों ने चैनलों पर ये प्रचारित कर रखा है कि,उन्हीं के सपूतों को तोड़ मरोड़ कर कथित हिन्दू धर्म खड़ा है।और बाहर से आये अल ब्रूनी आदि ने अपने यात्रावृतांतों में इन व्रतों व देवियों देवो का कहीं उल्लेख नहीं किया है।मतलब वे करते तो हमारा धर्म …
Read More »राष्टीय प्रेस दिवस 16 नवम्बर इस विषय पर स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी ज्ञान और कविता के माध्यम से कहते है कि,,
भारत में प्रथम प्रेस आयोग ने प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा एवं पत्रकारिता में उच्च आदर्श को उच्चतम स्तर व निष्पक्षीय स्तर तक लाने के उद्देश्य से एक प्रेस परिषद की यथार्थवादी कल्पना की थी। इसी यथार्थवादी पहल के परिणाम स्वरूप 4 जुलाई, 1966 को भारत में प्रेस परिषद की …
Read More »यदा यदा ही धर्मस्य..ओर इसी श्लोक में अर्थित ज्ञान की कैसे है अंग्रेज पूज्य इस विषय पर अपनी ज्ञान कविता केमाध्यम से बता रहें है स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी,,
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥ शब्दार्थ-मै प्रकट होता हूं, मैं आता हूं, जब जब धर्म की हानि होती है, तब तब मैं आता हूं, जब जब अधर्म बढता है तब तब मैं आता हूं, सज्जन लोगों …
Read More »माँ, माँ नाम का सच्चा अर्थ सहित ज्ञान उपदेशक कविता कहते स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी बता रहे है कि,,,
माँ में तीन शब्द है प्रकटम आ ओर अंग।म मैं हूं सदा संग तेरेआ आ लग कृपालु मुझ अंग।।यहां मैं अहंकार रहित हैदाता बन जन अपना रूप।आवाहन है सर्व जीव आत्मा।अंग से उद्धभव ओंकार अनूप।।किस मां को तुम सब जग ढूढोंजो तुम जननी है पूरक रूप।उसे छोड़ प्रतिरूप पूजतेओर मंगते …
Read More »ध्यान कैसे बढ़े-सेवा ज्ञान,,,बता रहें है स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी
ध्यान के सदा तीन सूत्र जानोसेवा तप और दान।सबसे बड़ा सेवा कर्मदूजे तप और तीजे दान।।सेवा से समर्पण बढ़ेसेवा तन दे जोड़।सेवा बढ़ती जाती जितनीउतना मन दे अंदर मोड़।।स्वप्न बदले सेवा करतेदेखोगे सेवा कर इष्ट।सेवा स्वप्न बढ बढ़ दिखेस्वप्न सफल वर मिले अभीष्ट।।घर की सेवा संसारी फल देजन सेवा प्रसिद्धि …
Read More »दीपावली पर करें सर्व संकट निवारण अचूक उपाय जाने,,
बता रहें स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी इस कीलन में इस सिद्धासिद्ध महामंत्र से जप और यज्ञाहुति दे-“सत्य ॐ सिद्धायै नमः ईं फट् स्वाहा”और जो सभी प्रकार के संकट और मनोकामना के अर्थ को देने वाले मंत्र में विश्वास करते है की मुझे मंत्र जपते में लगे की मेरी मनोकामनाएं सिद्ध …
Read More »जाने ध्यान के तीन तरीके और उनमे से कोईं एक चुने ओर ध्यानस्थ हो ओर प्राप्त करे उपलब्धि,कैसे,,
बता रहें है महायोगी स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी मुख्यतया ध्यान तीन तरहां से किये जाते है-1-दूसरे में ध्यान:-इसके तीन प्रकार है-१-जीवित व्यक्ति में ध्यान:-जिसमें आप प्रेम करते है,आप जैसा ही मनुष्य यानी स्त्री हो या पुरुष।उसमे ध्यान करना।इसमे प्रारम्भ में विपरीतलिंगी होने से ओर उसके अनजान रहने पर ध्यान करने …
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