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Nepal में हुई हिंसा की असली वजह क्या है? Social Media Ban नहीं, ये थी असली सच्चाई Manish Kumar Ankur की रिपोर्ट

Manish Kumar Ankur | Khabar 24 Express: नेपाल में हिंसा की असली वजह क्या है? क्या सिर्फ सोशल मीडिया बैन ने पूरे देश को आग में झोंक दिया? या इसके पीछे है राजनीति, भ्रष्टाचार और युवाओं का गुस्सा?

नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगने के बाद देश में हिंसा भड़क उठी। अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। लेकिन क्या वाकई सोशल मीडिया बैन ही इसका मुख्य कारण है? या फिर यह किसी गहरे संकट और राजनीतिक असंतोष का नतीजा है?

खबर 24 एक्सप्रेस आपको बताता है कि नेपाल में फैली हिंसा की असली जड़ क्या है।

नेताओं की ऐशो-आराम की ज़िंदगी और युवाओं की बेबसी

नेपाल के कई बड़े नेता आराम की जिंदगी जी रहे हैं। उनके बच्चे विदेशों में पढ़ाई कर रहे हैं, वहीं वे बड़े-बड़े आयोजनों में शामिल होकर मौज मस्ती कर रहे हैं। लेकिन आम युवाओं के पास न पर्याप्त शिक्षा है, न रोजगार के मौके। भविष्य की अनिश्चितता और आर्थिक संकट ने युवाओं के भीतर असंतोष भर दिया।

युवाओं की इसी नाराजगी ने सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ माहौल बनाना शुरू कर दिया। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और प्रशासन की विफलताओं के खिलाफ आवाजें उठने लगीं। जैसे-जैसे लोगों ने खुले शब्दों में विरोध करना शुरू किया, सरकार घबरा गई।

सोशल मीडिया बैन – समाधान नहीं, समस्या का बहाना

सरकार ने डर और असुरक्षा में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन इससे स्थिति और खराब हो गई। युवाओं का गुस्सा बढ़ गया और हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे हिंसा में बदल गया।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं। 21 लोगों की मौत हुई। गुस्साई भीड़ ने तोड़फोड़ शुरू कर दी। संसद भवन को आग के हवाले कर दिया गया, कई मंत्रियों पर हमले हुए, सड़कें जलीं और सरकारी भवनों में आग लगा दी गई। पूरा नेपाल मानो बर्बादी की आग में जल उठा।

असली वजह – भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और राजनीतिक असमानता

दरअसल नेपाल में सोशल मीडिया में कई ऐसी वीडियो वायरल हुई जिनमें नेताओं और मंत्रियों के बच्चों को ऐशों आराम करते हुए दिखाया गया था। वहीं दूसरी ओर दिखाया गया कि नेपाल में बच्चे भूखें मर रहे हैं, शिक्षा नहीं मिल पा रही है, रोजगार के लिए नेपाली युवा देश छोड़कर भारत या अन्य देश जा रहे हैं।

इसकी वजह से पूरे नेपाल में गुस्से का गुब्बार फूटा। नेपाली युवा प्रदर्शन करने लग गए। इसके बाद सरकार ने सोशल मीडिया पर ही प्रतिबंध लगा दिया। युवा और भड़क गए। और फिर शुरू हुई फायरिंग…।

फायरिंग में 21 लोगों की मौतों ने नेपाल के लोगों के गुस्से को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। और फिर इसका फायदा उठाया कुछ नेताओं ने जो नए नवेले नेता नेपाल को अपने हाथ में लेना चाहते थे। और वो सफल भी हुए। पूरा नेपाल जला… और जली नेपाल की शांति।

यह साफ है कि यह हिंसा सिर्फ सोशल मीडिया बैन की वजह से नहीं हुई। असली वजह है –
✔ नेताओं की लापरवाही
✔ युवाओं की समस्याओं की अनदेखी
✔ बेरोजगारी, शिक्षा की कमी और भविष्य की चिंता
✔ भ्रष्टाचार और प्रशासन पर अविश्वास

सोशल मीडिया सिर्फ बहाना बना। असली आग तो लंबे समय से अंदर ही अंदर सुलग रही थी। जिसका फायदा किसी ने तुंरत उठा लिए और नेपाल को जी के हवाले कर दिया।

क्या सोशल मीडिया बैन समाधान है?

हिंसा से यह सवाल उठता है कि क्या सोशल मीडिया बंद करना समाधान है? या फिर युवाओं की आवाज़ सुनकर उनकी समस्याओं का समाधान तलाशना चाहिए?

आपकी क्या राय है? नीचे कमेंट में बताइए – क्या सरकार को युवाओं की मांगों पर ध्यान देना चाहिए या सोशल मीडिया जैसे प्लेटफार्म बंद करना सही है?

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एक्सक्लूसिव : रिपोर्ट मनीष कुमार अंकुर


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