केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि E20 यानी इथेनॉल मिश्रित ईंधन के खिलाफ सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा अभियान पैसे देकर चलाया जा रहा है।
उनका कहना है कि यह अभियान उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के लिए चलाया जा रहा है। खैर गडकरी ये तो कह रहे हैं लेकिन लगता है वो अपने ही किए वायदों को भूल गए हैं। जबकि उन्होंने ही कहा था कि इथेनॉल मिलाने से पेट्रोल के दाम सस्ते होंगे और गाड़ियों का माइलेज बढ़ेगा। जबकि ऐसा नहीं हुआ…। अब आलोचना नहीं होगीं तो क्या होगा?
“दरअसल, सोसाइटी ऑफ ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के वार्षिक सम्मेलन में उनसे पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने को लेकर उठ रही चिंताओं पर सवाल किए गए थे। इसका जवाब देते हुए गडकरी ने कहा”

“जिस तरह आपका उद्योग काम करता है, उसी तरह राजनीति भी काम करती है। सोशल मीडिया अभियान सशुल्क था। यह मुझे राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के लिए था। इसमें कोई तथ्य नहीं है। सब कुछ स्पष्ट है। इथेनॉल मिश्रण आयात का विकल्प, लागत-प्रभावी, प्रदूषण-मुक्त और स्वदेशी है।”
गडकरी ने कहा कि भारत जीवाश्म ईंधन के आयात पर भारी रकम खर्च करता है। उन्होंने पूछा क्या जीवाश्म ईंधन के आयात को कम करना और बचाई गई राशि को भारतीय अर्थव्यवस्था में लगाना आर्थिक रूप से सही कदम नहीं है?
नितिन गडकरी ने जैसे जबाव दिया ऐसा लगा कि वे अपने खिलाफ हो रही आलोचनाओं से परेशान हैं।
लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सच में ऐसा हो रहा है?
तो हम आपको इस पर विस्तार से बताते हैं। E20 यानी इथेनॉल को लेकर नितिन गडकरी ने खुद कहा था कि पेट्रोल के दाम सस्ते हो जाएंगे, प्रदूषण कम होगा और आम जनता को राहत मिलेगी, किसानों को फायदा पहुंचेगा। लेकिन हकीकत क्या है?

पेट्रोल के दाम हुए?
सरकार खुद कह रही है कि इथेनॉल पेट्रोल से महंगा पड़ रहा है।
लोगों की गाड़ियां खराब हो रही हैं और एवरेज गिर रहा है।
तो फिर सवाल तो उठेंगे ही.. क्या नितिन गडकरी ने जनता को गुमराह किया था?
या फिर यह सब केवल एक राजनीतिक नाटक है?
जब उन्होंने खुद कहा कि इथेनॉल मिलाने से पेट्रोल सस्ता होगा, तो फिर अब सरकार क्यों कह रही है कि इथेनॉल महंगा पड़ रहा है?
जबकि इथेनॉल मिलाने से आम लोगों की गाड़ियां खराब हो रही हैं, इंजन की समस्याएं आ रही हैं… तो क्या सरकार और नितिन गडकरी ने इन शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया?
यही नहीं… सवाल और भी गहरा हो जाता है।
नितिन गडकरी के बेटों की कंपनी इथेनॉल बनाने के कारोबार में शामिल है।
तो क्या यही वजह है कि सरकार बार-बार इथेनॉल मिलाने की बात कर रही है?
क्या इथेनॉल का फायदा सच में किसानों को मिल रहा है या कुछ चुनिंदा कंपनियों को इससे फायदा पहुंचाया जा रहा है?
अब नितिन गडकरी कह रहे हैं कि लोग पैसे लेकर उन्हें बदनाम कर रहे हैं… लेकिन अगर सवाल हैं तो उठने ही चाहिए..।
क्या गडकरी अपनी बात भूल गए?
क्या इथेनॉल सिर्फ एक दिखावा था ताकि उनके परिवार की कंपनी को फायदा हो?
क्या आम जनता की परेशानियों को नजरअंदाज किया गया?
क्या उन्होंने झूठ बोला कि पेट्रोल सस्ता होगा?
जब वायदे पूरे नहीं होते, तो जनता सवाल उठाती है। और यही लोकतंत्र की ताकत है।
नितिन गडकरी ने कई बार इथेनॉल से होने वाले फायदों की बातें कीं… लेकिन अब जब लोग सवाल कर रहे हैं तो इसे राजनीति का हिस्सा बताकर किनारे कर दिया जा रहा है।
क्या यह सच में जनता के हित में है… या सिर्फ सत्ता और कारोबार का खेल?
कमेंट में अपनी राय बताइए।
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Exclusive Report : Manish Kumar Ankur

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