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वन मंत्री गिरीश महाजन ने भाषण में नहीं लिया अंबेडकर का नाम, तो रो पड़ी वन कर्मी माधवी जाधव

Forest Minister Girish Mahajan | Madhavi Jadhav | Baba Saheb Ambedkar | Bureau Report Akash Dhake | Khabar 24 Express

26 जनवरी… जब पूरा देश संविधान और गणतंत्र का जश्न मना रहा था, उसी दिन महाराष्ट्र से एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसने राजनीति को झकझोर कर रख दिया।

एक महिला वन कर्मी, मंच के सामने रोती हुई, चिल्लाती हुई… और सवाल सिर्फ एक आखिर संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का नाम भाषण में क्यों नहीं लिया गया?

मंत्री ने माफी मांगी, लेकिन मामला थमा नहीं। अब इस पर ‘क्राइम’ का आरोप लग रहा है। पूरा विवाद क्या है, किसने क्या कहा, और ये मामला कहां तक जाएगा… देखिए इस रिपोर्ट में।

26 जनवरी 2026 को नासिक में गणतंत्र दिवस का सरकारी कार्यक्रम चल रहा था। मंच पर महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन भाषण दे रहे थे।

इसी दौरान सामने बैठी वन रक्षक माधवी जाधव अचानक भावुक हो गईं और जोर-जोर से रोते हुए हंगामा करने लगीं। वजह थी मंत्री के पूरे भाषण में डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम न लिया जाना।

माधवी जाधव ने मंच के सामने खड़े होकर कहा कि जिस व्यक्ति ने संविधान दिया, उसी का नाम अगर गणतंत्र दिवस पर न लिया जाए, तो यह सिर्फ भूल नहीं, पहचान मिटाने की कोशिश है।

उन्होंने कहा कि उन्हें सस्पेंड कर दीजिए, जेल भेज दीजिए, लेकिन बाबासाहेब को मिटाने नहीं दूंगी। वीडियो में वह कहती दिखती हैं कि वह मेहनत-मजदूरी कर सकती हैं, ट्रक उतार सकती हैं, लेकिन संविधान निर्माता का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगी।

मौके पर मौजूद अधिकारियों और पुलिस ने उन्हें शांत कराने की कोशिश की, लेकिन हंगामा बढ़ता गया। आखिरकार माधवी जाधव को कार्यक्रम स्थल से हटाया गया और कुछ समय के लिए हिरासत में भी लिया गया। यह पूरा दृश्य कैमरे में कैद हो गया और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

विवाद बढ़ने पर मंत्री गिरीश महाजन ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर का नाम भाषण में न आ पाना अनजाने में हुआ। उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और कहा कि उनका इरादा किसी भी महापुरुष का अपमान करने का नहीं था।

लेकिन माफी के बावजूद राजनीतिक तूफान और तेज हो गया। वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रमुख और डॉ. अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर ने इस मामले को अपराध बताया।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत यह मामला बनता है। प्रकाश अंबेडकर ने दावा किया कि उन्होंने खुद माधवी जाधव से बात की है और अगर पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया, तो वे खुद कानूनी कार्रवाई करेंगे।

कांग्रेस सांसद वर्षा एकनाथ गायकवाड़ ने भी वन कर्मी माधवी जाधव को हीरो बताते हुए मंत्री पर हमला बोला और कहा कि भाजपा के नेताओं को बार-बार डॉ. अंबेडकर के अपमान की आदत है।

अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक भाषण की चूक थी या फिर इससे कहीं बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश जुड़ा है?

गणतंत्र दिवस, संविधान और बाबासाहेब… इन तीनों को अलग नहीं किया जा सकता। लेकिन जब यही सवाल सत्ता के मंच से उठता है, तो विवाद तय है। अब देखना यह होगा कि यह मामला सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहता है या फिर कानूनी मोड़ लेता है।

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