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बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा, शंकराचार्य के अपमान और UGC बिल को लेकर योगी सरकार से नाराज़गी

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उत्तर प्रदेश के बरेली से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों से लेकर सियासी बहस तक भूचाल ला दिया है।

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट और PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस के दिन अपने पद से इस्तीफा देकर सरकार, प्रशासन और UGC के नए नियमों पर सीधे सवाल खड़े कर दिए।

इस्तीफे के बाद उन्होंने ब्राह्मण विरोध, संतों पर मारपीट, UGC 2026 और खुद को DM आवास में बंधक बनाए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती, क्योंकि कुछ ही घंटों में सरकार ने उन्हें सस्पेंड कर दिया।

बरेली सिटी मजिस्ट्रेट रहे PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने अपने सात पेज के इस्तीफे में उत्तर प्रदेश सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य में लंबे समय से ब्राह्मण विरोधी माहौल बनाया जा रहा है। जेल में डिप्टी जेलर द्वारा एक ब्राह्मण की पीट-पीटकर हत्या, थाने में दिव्यांग ब्राह्मण की मौत और प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई मारपीट को उन्होंने इसका उदाहरण बताया।

अलंकार अग्निहोत्री ने साफ कहा कि चोटी और शिखा जैसे धार्मिक प्रतीकों का अपमान पूरे ब्राह्मण समाज का अपमान है। उन्होंने खुद को BHU शिक्षित, 2019 बैच का राजपत्रित अधिकारी बताते हुए लिखा कि मौजूदा शासन में जनतंत्र और गणतंत्र नहीं, बल्कि भ्रमतंत्र चल रहा है।

इस्तीफे में दूसरा बड़ा मुद्दा UGC 2026 के नए नियम हैं। अग्निहोत्री का दावा है कि 13 जनवरी 2026 के गजट नोटिफिकेशन के जरिए सामान्य श्रेणी के छात्रों को संभावित अपराधी की तरह देखा जा रहा है, जिससे भविष्य में झूठे केस और उत्पीड़न का रास्ता खुलेगा। उन्होंने इसे काला कानून बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की।

इस्तीफे के बाद मामला और गर्म हो गया, जब अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि उन्हें बरेली DM आवास में करीब 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया। उनका कहना है कि लखनऊ से आए एक फोन कॉल में अपशब्द कहे गए और रातभर वहीं रोके जाने की साजिश थी।

इसी डर और असुरक्षा के कारण उन्होंने आधी रात सरकारी आवास खाली कर बरेली छोड़ दिया और हाईकोर्ट जाने का संकेत दिया।

वहीं दूसरी तरफ जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। DM का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट स्वयं बातचीत के लिए आए थे, बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई, कोई दबाव या बंधक जैसी स्थिति नहीं थी। प्रशासन ने आरोपों को तथ्यहीन और भ्रामक बताया।

इसी बीच सरकार ने बड़ा एक्शन लेते हुए अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर शामली कलेक्टर कार्यालय से अटैच कर दिया है। मामले की जांच बरेली मंडलायुक्त को सौंपी गई है। उधर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अलंकार अग्निहोत्री से बातचीत कर उन्हें धर्म के क्षेत्र में बड़ी जिम्मेदारी देने का ऑफर भी दिया है।

अब सवाल ये है कि क्या यह एक अफसर का निजी विरोध है या सिस्टम के अंदर गहराती असंतोष की आवाज़? क्या UGC 2026 वाकई सामान्य वर्ग के खिलाफ है या इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है? और क्या प्रशासनिक अफसरों का इस तरह खुलकर सामने आना आने वाले दिनों में नई बहस छेड़ेगा?

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