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राजस्थान के 100 मजदूरों को महाराष्ट्र में बनाया बंधक, प्रतापगढ़ पुलिस ने ऐसे किया रेस्क्यू

Crime Report | Maharashtra / Rajasthan News | Bureau Report Jagdish Teli | Khabar 24 Express

राजस्थान से महाराष्ट्र तक इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। रोज़गार का सपना दिखाकर आदिवासी मजदूरों को बंधक बना लिया गया, उनसे जबरन काम करवाया गया और एक रुपया भी नहीं दिया गया। लेकिन जब यह खबर प्रतापगढ़ पुलिस तक पहुंची, तो पूरी रणनीति के साथ महाराष्ट्र में दबिश दी गई और दर्जनों मजदूरों को आज़ादी दिलाई गई। आखिर कैसे हुआ यह पूरा रेस्क्यू ऑपरेशन, चलिए आपको बताते हैं।

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के आदिवासी इलाकों से 100 से ज्यादा मजदूरों को 500 रुपये रोज़ की मजदूरी, मुफ्त खाना और रहने की सुविधा का लालच देकर ले जाया गया। इन मजदूरों से कहा गया कि उन्हें मध्यप्रदेश के इंदौर में काम मिलेगा। लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली।

करीब एक महीने बाद मजदूरों को पता चला कि उन्हें इंदौर नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के शोलापुर जिले के अलग-अलग गांवों में गन्ने की खेती में झोंक दिया गया है। वहां उनसे जबरन मजदूरी करवाई जा रही थी, मेहनताना नहीं दिया जा रहा था और विरोध करने पर मारपीट तक की जाती थी।

इस पूरे मामले की जानकारी तब सामने आई, जब कुछ मजदूर मौका पाकर जमींदारों के चंगुल से भागने में कामयाब हो गए और पुलिस तक पहुंचे। सूचना मिलते ही प्रतापगढ़ एसपी बी. आदित्य ने तुरंत विशेष टीम का गठन किया। एडिशनल एसपी गजेंद्र सिंह जोधा के निर्देशन में सब इंस्पेक्टर सोहनलाल और उनकी टीम ने महाराष्ट्र पहुंचकर अलग-अलग इलाकों में दबिश दी।

पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 53 मजदूरों को रेस्क्यू किया, जिनमें 13 महिलाएं और 40 पुरुष शामिल हैं। सभी मजदूर आदिवासी समुदाय से हैं और प्रतापगढ़ के घंटाली, पीपलखूंट, पारसोला, वरदा, जामली, मालिया, गोठड़ा, उमरिया पाड़ा और आसपास के गांवों के रहने वाले हैं।

जांच में सामने आया कि सीताराम पाटिल नामक दलाल ने 18 लाख रुपये और खान नामक दलाल ने 9.5 लाख रुपये जमींदारों से एडवांस में ले लिए थे। इसके बावजूद मजदूरों को एक भी पैसा नहीं दिया गया। जमींदारों का दावा है कि उन्होंने पूरी रकम दलालों को दे दी थी।

रेस्क्यू के बाद पुलिस मजदूरों को देर रात प्रतापगढ़ लेकर पहुंची। उन्हें चाय-नाश्ता कराया गया और फिर सुरक्षित रूप से उनके गांव भेजा गया। फिलहाल पुलिस फरार दलालों की तलाश में जुटी है।

यह मामला सिर्फ बंधुआ मजदूरी का नहीं, बल्कि मानव तस्करी और शोषण की एक खौफनाक तस्वीर है। सवाल यह है कि आखिर कब तक गरीब और आदिवासी मजदूर ऐसे दलालों के जाल में फंसते रहेंगे?

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