
Manish Kumar Ankur | Exclusive Report | Yavatmal: विदर्भ की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो गया है। भाजपा के वरिष्ठ और सम्मानित नेता विजय चोरड़िया ने पार्टी को अलविदा कहते हुए अब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना (शिंदे गुट) का दामन थाम लिया है।
यह कदम सिर्फ एक राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि वणी और यवतमाल की सियासत में नए समीकरणों की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
मुंबई में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पालकमंत्री संजय राठौड़ की मौजूदगी में विजय चोरड़िया ने औपचारिक रूप से शिवसेना में प्रवेश किया।
इस दौरान उनका स्वागत पूर्व विधायक विश्वास नांदेडकर ने किया और कहा

विजय चोरड़िया का नाम वणी क्षेत्र में समाजसेवा, व्यवसाय और जनसंपर्क के लिए बेहद सम्मान से लिया जाता है।
वे वर्षों से भाजपा में सक्रिय रहे और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य के रूप में संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
उनके पुत्र एड. कुणाल चोरड़िया भी भाजपा के जिला उपाध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं।
लेकिन हाल के दिनों में पार्टी में चल रही आंतरिक मतभेदों और अनदेखी के कारण चोरड़िया असहज महसूस कर रहे थे।
पार्टी की नीतियों और स्थानीय निर्णयों में हो रही उपेक्षा से आहत होकर उन्होंने आखिरकार ‘नया रास्ता, नई सोच’ अपनाने का फैसला किया।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चोरड़िया के इस कदम से भाजपा को वणी तालुका में बड़ा झटका लगा है, क्योंकि वे यहां के सबसे लोकप्रिय और भरोसेमंद चेहरों में से एक माने जाते हैं। वहीं शिवसेना (शिंदे गुट) के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है, जो अब विदर्भ में अपनी पकड़ को और मजबूत कर सकेगी।
सोशल मीडिया पर भी चोरड़िया के इस फैसले की चर्चा जोरों पर है।
समर्थक इसे “वणी की राजनीति का टर्निंग पॉइंट” बता रहे हैं।
कई लोगों का मानना है कि उनके अनुभव, व्यवहार और समाजसेवी छवि से शिवसेना को स्थानीय स्तर पर नई ऊर्जा मिलेगी।
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विजय भाऊ चोरड़िया: जनता के दिलों में बसने वाला नाम, जिन्हें भाजपा ने नज़रअंदाज़ कर दिया
बता दें कि विजय भाऊ चोरड़िया सिर्फ वणी के ही नहीं, बल्कि पूरे विदर्भ क्षेत्र के एक बड़े और सम्मानित नेता माने जाते हैं।
उनकी लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे राजनीति में आने से पहले से ही समाजसेवा के जरिए लोगों के दिलों में जगह बना चुके थे।
विजय चोरड़िया अपने क्षेत्र में गरीबों, जरूरतमंदों और किसानों के हितों के लिए लगातार कार्यरत रहे हैं।
वे अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा समाजसेवा और जनकल्याण कार्यों में खर्च करते हैं, यही वजह है कि लोग उन्हें नेता से ज्यादा अपना परिवारजन मानते हैं।
उनके द्वारा किए गए स्वास्थ्य शिविर, शिक्षा सहयोग और गरीब परिवारों की आर्थिक मदद जैसी पहलें वणी और आसपास के इलाकों में मिसाल बन चुकी हैं।
यही कारण था कि वर्ष 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में वणी सीट से विजय चोरड़िया को एक मजबूत दावेदार माना जा रहा था।
जनता को उम्मीद थी कि भाजपा इस बार क्षेत्र के सच्चे जनसेवक को मौका देगी।
लेकिन पार्टी ने टिकट संजिवरेड्डी बापूराव बोडकुरवार को दे दिया — जिनके खिलाफ लोगों में पहले से ही गहरी नाराज़गी थी।
स्थानीय लोगों का आरोप था कि बोडकुरवार ने वणी के विकास के लिए कोई ठोस काम नहीं किया।
इसके बावजूद भाजपा ने उन्हें दोबारा टिकट देकर जनता की भावना को अनदेखा कर दिया — और नतीजा वही हुआ जिसकी आशंका थी…
बोडकुरवार को करारी हार का सामना करना पड़ा।
इस दौरान पार्टी नेतृत्व ने विजय चोरड़िया से यह वादा किया था कि चुनाव के बाद उन्हें संगठन में सम्मानजनक स्थान दिया जाएगा,
लेकिन समय बीतता गया और उनकी लगातार अनदेखी होती रही।
आख़िरकार उन्होंने “स्वाभिमान को संगठन से ऊपर” रखते हुए भाजपा से अलग होने का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया।
Exclusive Report : Manish Kumar Ankur
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