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जैसलमेर में बस बनी आग का गोला… जिंदा जल गए 21 लोग, क्या पटाखों ने लील ली 21 जिंदगियां?


Report Jagdish Teli | Rajasthan : जैसलमेर से जोधपुर जा रही एक बस कुछ ही मिनटों में आग का गोला बन गई। 21 लोगों की मौके पर ही जलकर मौत हो गई।

दर्द ऐसा कि देखने वालों की रूह कांप जाए… और सवाल कई, क्या ये हादसा पटाखों की वजह से हुआ? क्या दिवाली के नाम पर मौत को बुलाया गया?
और सबसे बड़ा सवाल त्योहारों के समय पुलिस-प्रशासन सो क्यों जाता है?

लापरवाही का खेल, जिसने छीन ली 21 जिंदगियां

त्योहार का वक्त था, सड़कें रौनक से भरी थीं… लेकिन इसी बीच जैसलमेर में ये बस हादसे की भेंट चढ़ गई।
गवाहों के मुताबिक, बस में तेज धमाका हुआ और कुछ ही सेकंड में आग ने पूरी बस को निगल लिया।
कई यात्रियों ने खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन 21 लोगों को ज़िंदा जलने से कोई नहीं बचा सका।

अब जांच में यह बात भी सामने आ रही है कि बस में पटाखे रखे गए थे। अगर यह सच है — तो यह केवल हादसा नहीं, लापरवाही से हुई सामूहिक हत्या है।

प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल

त्योहारों से पहले जब चेकिंग अभियान चलता है, तो फिर इस बस की जांच क्यों नहीं हुई?
अगर बस की ठीक तरह से सुरक्षा जांच, लोडिंग इंस्पेक्शन और पटाखों की तलाशी ली जाती — तो शायद आज 21 लोग ज़िंदा होते।
पर नहीं… यहाँ भी वही हुआ जो अक्सर होता है —
कागज़ पर सब कुछ दुरुस्त, ज़मीन पर सब ढीला!

चंद सेकंड में मातम में बदली रौनक

कई परिवार एक साथ जल गए… एक सैनिक परिवार भी इस हादसे में खत्म हो गया। जिनके घर में दिवाली की तैयारियाँ चल रही थीं, वहाँ अब बस राख और आंसू बचे हैं।
लोग पूछ रहे हैं “क्या त्योहार मनाने का मतलब अपनी और दूसरों की जान को खतरे में डालना है?”

आखिर कब सुधरेगी सिस्टम की आंख?

हर साल ऐसे हादसे हमें झकझोरते हैं, मगर सबक कोई नहीं लेता। ना बस मालिकों को डर है, ना ट्रांसपोर्ट विभाग की कोई जवाबदेही तय होती है। दो अधिकारी निलंबित हुए, लेकिन क्या 21 जानों की कीमत सिर्फ इतनी है?

खबर 24 एक्सप्रेस की अपील

दिवाली खुशियों का त्योहार है… मौत का नहीं। अगर आप पटाखों की शोर-गुल भरी दिवाली मनाने के लिए बस, ट्रक या घर में इस तरह का बारूद भर रहे हैं, तो ये मज़ा नहीं, मौत का खेल है।

जैसलमेर में जो हुआ, वो सिर्फ हादसा नहीं — एक चेतावनी है उन सबके लिए जो बिना सोचे-समझे पटाखों को लेकर घूमते हैं।
थोड़ी देर की खुशी, वो धमाका, वो आवाज — कई घरों की चुप्पी बन गई।

इस दिवाली, शोर-शराबे और कानफोड़ बमों से नहीं, प्रेम, भाईचारे और भक्ति से दिवाली मनाइए। अपने घर खुशियाँ लाइए — मातम नहीं।


ब्यूरो रिपोर्ट : जगदीश तेली, जैसलमेर


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