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Nagpur में ‘मौत’ के 36 साल बाद घर लौटी महिला, परिवार से हुआ भावुक मिलन, चमत्कार देखकर हर कोई रह गया हैरान

नागपुर में एक ऐसी घटना सामने आई है, जो किसी फिल्म से कम नहीं है। जयताला इलाके से 1989 में गायब हुई एक महिला, जिसे परिवार ने मृत मान लिया था, पूरे 36 साल बाद अपने परिवार के बीच लौट आई।


58 साल की यह महिला जब घर पहुंची तो परिवार वालों की आँखों में खुशी के आँसू थे और अविश्वास साफ दिख रहा था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला ने गर्भवती होने के बावजूद घर छोड़ दिया था। उस समय वह दो बच्चों की मां थी। पति की शराब की लत और सास की क्रूरता से परेशान होकर वह बिना किसी को बताए चली गई। परिवार ने वर्षों तक उसे खोया हुआ मानकर शोक मनाया। पति की छह साल पहले मौत हो चुकी थी, जबकि बेटा दो साल पहले बीमारी से चल बसा।

उसकी बेटी अब 38 साल की है। वह नागपुर के बाहरी इलाके बुटिबोरी में अपने नाना के साथ रहती थी। मां के गायब हो जाने की रहस्यमयी घटना ने उसके जीवन पर स्थायी असर छोड़ा।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, गायब होने के समय महिला ने एक बेटी को जन्म दिया था, जो बाद में बंगाली बोलने लगी और पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के एक सरकारी आश्रय में पली-बढ़ी।

काउंसलरों ने 2018 में उसे आश्रय गृह से ढूंढ निकाला। वह टूटी-फूटी मराठी बोलती थी, जिससे उसके नागपुर से जुड़ाव का संकेत मिला।
2024 में उसे और उसकी बेटी को मुंबई के कस्तूरबा महिला गृह में शिफ्ट किया गया। वहाँ के कर्मचारियों ने बुटिबोरी का ज़िक्र सुनते ही आशंका जताई कि वह नागपुर से हो सकती है।
सितंबर 2025 में उसे नागपुर के प्रियदर्शिनी महिला गृह में भेजा गया।

मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के चलते वह पागलखाना चौक के क्षेत्रीय मानसिक अस्पताल में पहुँची। सोशल सर्विसेज सुपरिंटेंडेंट कुंदा बिदकर और मनोचिकित्सक पंकज बागड़े ने धैर्य और देखभाल से उसका इलाज किया।
सत्रों में उसने “सोना राजा” नाम बताया, जो संभवतः झूठा नाम था। उसने बुटिबोरी का ज़िक्र किया, जहाँ उसके पिता कभी डाकघर अधीक्षक थे। कई रिकॉर्ड खोजने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला।

लेकिन आखिरकार, उसने जयताला का नाम लिया – वही जगह जहाँ उसका ससुराल था।
इंस्पेक्टर गोकुल महाजन और कांस्टेबल ऊषा कुंडलकर की मदद से दरवाज़े-दरवाज़े तलाश की गई और आखिरकार परिवार से उसका मिलन करवा दिया गया।

जब परिवार के सामने वह महिला पहुँची तो हर कोई भावुक हो गया। उसकी बेटी रोते हुए बोली –
मैंने 36 साल पहले अपनी माँ को खो दिया था। हम सोचते थे वो मर चुकी है… आज ऐसा लग रहा है जैसे सपना देख रही हूं!”

यह कहानी इंसान की मजबूरी, दर्द, संघर्ष और परिवार की अनकही ताकत की मिसाल है। आप क्या सोचते हैं? नीचे कमेंट करके बताइए!


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