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छात्र नेता से लेकर गवर्नर तक, मोदी सरकार के मुखर आलोचक… किसान नेता सत्यपाल मलिक का निधन

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन, मोदी सरकार पर करते थे खुलकर वार

नई दिल्ली | 5 अगस्त 2025 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखर आलोचक और जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।
उन्होंने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में दोपहर 1:12 बजे अंतिम सांस ली।

उनके निधन की पुष्टि उनके एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट से की गई, जिसे उनके निजी सचिव केएस राणा ने भी सार्वजनिक रूप से स्वीकारा।

लेकिन सत्यपाल मलिक सिर्फ एक पूर्व राज्यपाल नहीं थे, वे एक ऐसे राजनेता थे जिनका सफर छात्र राजनीति से लेकर गवर्नर हाउस तक पहुंचा… और फिर वहां से सरकार के आलोचक बनने तक जारी रहा।


राजनीति की शुरुआत: समाजवाद से सत्ता के गलियारों तक

  • जन्म: 24 जुलाई 1946, हिसावदा गांव, बागपत (उत्तर प्रदेश)
  • शुरुआत: मेरठ कॉलेज से छात्र राजनीति, लोहिया विचारधारा से प्रभावित
  • पहली जीत: 1974 में बागपत से विधायक बने, टिकट दिया था भारतीय क्रांति दल ने
  • राज्यसभा सदस्य: 1980 में पहली बार

सियासी उठापटक: कांग्रेस, जनता दल और बीजेपी तक

  • 1984 में कांग्रेस में शामिल, वही कांग्रेस जिसके खिलाफ वो इमरजेंसी में जेल जा चुके थे
  • 1987 में बोफोर्स घोटाले के खिलाफ वी.पी. सिंह का साथ दिया
  • 1989 में अलीगढ़ से सांसद, जनता दल के बैनर तले
  • 1996 में सपा में गए, हार का सामना
  • 2004 में भाजपा में आए, चुनाव फिर हारे

भाजपा में भूमिका और राज्यपाल का सफर

  • 2005: यूपी भाजपा उपाध्यक्ष, किसान मोर्चा प्रभारी
  • 2012: राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, नरेंद्र मोदी से नजदीकियां बढ़ीं
  • 2017: बिहार के राज्यपाल नियुक्त
  • फिर: जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय के राज्यपाल रहे

अनुच्छेद 370 और सबसे विवादित कार्यकाल

जम्मू-कश्मीर में रहते हुए 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाया गया, विधानसभा भंग हुई और सारा प्रशासन राज्यपाल के हाथों में आ गया।
मलिक का ये कार्यकाल सबसे ज्यादा चर्चित रहा।


बेबाक बयान, मोदी सरकार पर तीखे वार

  • रिटायरमेंट के बाद सत्यपाल मलिक ने खुलकर मोदी सरकार की आलोचना की
  • किसान आंदोलन, पुलवामा हमला, जम्मू-कश्मीर की नीतियों पर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया
  • बार-बार ऐसे बयान दिए जिसने भाजपा नेतृत्व को असहज किया


निष्कर्ष: एक बागी और बड़े किसान नेता की विदाई

एक बेबाक, सिद्धांतों से समझौता न करने वाले नेता का अंत हो गया।
सत्यपाल मलिक चले गए, लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा और सत्ता से टकराने का साहस, भारतीय राजनीति में हमेशा याद रखा जाएगा


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