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मिसाल : जब कहीं नहीं मिला खून तो डॉ. ने अपना खून देकर बचाई मरीज की जान

कहते हैं कि इंसानियत अगर जिंदा है, तो अच्छाई भी जिंदा है, नेक नियत भी जिंदा है। जी हां! यही मिसाल देखने को मिली

कही खून नही मिला तो इलाज कर रहे डॉ.ने खुद ही ब्लड देकर बचाई मरीज की जान !!

सौसर-इलाज में कोताही के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अक्सर अस्पतालों में मरीज के परिजनों और डॉक्टरों के बीच नोकझोंक और मारपीट की घटनाएं सामने आती रहती हैं। लेकिन कुछ मामले ऐसे हैं, जिनमें डाॅक्टर खुद को धरती के भगवान होने की मिसाल पेश करते हैं। ऐसा ही मामला मध्यप्रदेश के सौसर के सिविल अस्पताल में देखने को मिला।

आम तौर पर इस अस्पताल की पहचान सीरियस मरीजों को छिन्दवाड़ा या नागपुर रेफर करने भर की है, लेकिन दिनांक 10 अगस्त 2019 की घटना है। जहां मरीज दिव्यांनी चौधरी उम्र 17 वर्ष रहवासी – साईंखेड़ा को गंभीर स्थिति में इस अस्पताल में भर्ती करवाया गया। युवती का इलाज डॉ.सन्दीप नखाते कर रहे थे। लेकिन युवती में खून की कमी पाई गई जिसकी वजह से युवती की जान बचाने में दिक्कत हो रह थी। डॉ ने खून के लिए परिजनों को बात बताई लेकिन ब्लड ग्रुप मैच न होने की वजह से और परिजनों की आनाकानी की वजह से ब्लड मिलने में देरी हुई। तब डॉ.ने अपना खून देकर उसकी जान भी बचाई।
बता दें कि मरीज के शरीर मे कम खून होने के कारण काफी गंभीर हालत में थी। उनका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव था। लेकिन ब्लड बैंक नजदीक नही होने के कारण ओ पॉजिटिव ब्लड की व्यवस्था नहीं हो पाई। रिश्तेदारों और परिचितों में भी इस ग्रुप का खून खोजा गया, लेकिन निराशा ही मिली।
दिव्यानी को लेकर उनका परिवार शनिवार सुबह सिविल अस्पताल सौसर पहुंचा। डाॅ. नखाते ने देखा कि मरीज की हालत ज्यादा खराब है, तो उसे देख भर्ती करने और ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दी। सौसर अस्पताल में खून की जांच के बाद रिपोर्ट दिखाने के बाद डॉक्टर ने कहा कि दिव्यानी में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम है। तुरंत O + खून चढ़ाना जरूरी है। इसके बाद परिवार सोच में पड़ गया कि ब्लड बैंक तो सौसर में था ही नहीं। अब वे जाएं तो जाएं कहाँ? ब्लड कहा मिलेगा? छिन्दवाड़ा या नागपुर के सिवाय कोई उपाय भी नहीं था। ब्लड की व्यवस्था परिवार के लिए लाना असंभव था, बच्ची की हालत काफी और खराब होते जा रही थी। लेकिन वहां इस ग्रुप का एक यूनिट ब्लड भी नहीं मिला। सूचना मिलने पर और भी रिश्तेदार पहुंचे, लेकिन किसी का भी ब्लड मैच नहीं हुआ। इसी बीच डॉ. संदीप नखाते राउंड पर निकले और दिव्यानी की रिपोर्ट देखकर कहा कि चिंता न करें। मेरा ब्लड ग्रुप O पॉजिटिव है। इसके बाद वे ब्लड बैंक पहुंचे और रक्तदान कर परिजनों को दे दिया।

अगर सही वक्त पर दिव्यानी को ब्लड नही मिलता तो देर हो जाती और उसको बचाने में बड़ी मुश्किल हो सकती थी।
स्थिति की गंभीरता और ओ पॉजिटिव खून उपलब्ध नहीं होता देख उन्होंने अपना खून मरीज का ईलाज कर रहे स्वयं डॉ.सन्दीप नखाते ने डोनेट किया।
इस बेहतरीन मिसाल के लिए डॉ. संदीप नाखते की चर्चा हो रही है, हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है।

रिपोर्ट : विकास बनसोड
नागपुर ब्यूरो – खबर 24 एक्सप्रेस
(नई सोच, नया भारत)


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