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मिस्टर पीएम…. जितनी आपकी समझ : मनीष कुमार “अंकुर” की कलम से












मिस्टर पीएम आप आज़ाद हैं कुछ भी टिप्पणी करने के लिए। अगर राजीव जी #बीजेपी के नेता होते तो राजीव जी पर आपकी टिप्पणी बदली हुई होती।

पार्टी विशेष की नज़रों से दूसरे बुरे ही लगते हैं। बाकी दोषियों के लिए कोर्ट है, सबूत दीजिये सजा दिलवाइये। लेकिन सबूत न होने की वजह से राजीव जी आपकी ही पार्टी के जमाने में बरी हो गए थे।
नरेंद्र मोदी जी आप पर भी हत्या, दंगे फसाद करवाना, लोगों को भड़काना, रिश्वत कांड में आपका नाम आना, सेक्स सीडी कांड में नाम आना, लड़की की जासूसी करवाना, अमेरिका में आपकी बदसलूकी इत्यादि कई आरोप लगे लेकिन साबित नहीं हुए।

आप आज राजीव जी पर आरोप लगा रहे हैं… जिनकी हत्या एक कायरनापूर्ण आतंकवादी हमले में हुई, इसे आपकी हमारी संस्कृति और संस्कारी शब्दों में शहादत कहते हैं। स्व. राजीव जी ने देश के लिए बहुत से योगदान ऐसे दिए जिनके लिए देश आज भी उन्हें याद करता है।

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बाकी आप जैसा दिखाना चाहेंगे वैसा सबको नहीं दिखेगा, आप अपने भाषणों में सबसे ज्यादा गांधी परिवार को रोते हैं, नेहरू को रोते हैं। लेकिन आप ही की पार्टी में गांधी परिवार के दो मुख्य सदस्य हैं।

राजीव जी की कम्प्यूटर क्रांति और आपकी मोबाइल क्रांति, भले झूंठ, भ्रम फैलाने के भी काम आती हो। लेकिन कहते हैं न झूंठ, सच के सामने ज्यादा देर तक नहीं टिक पाता है… और सच्चाई सामने आ ही जाती है… हर बार ऐसा होता है।
आप #कांग्रेस को कहते हैं कि राजीव गांधी के नाम पर वोट मांग कर देखो जनता सबक सिखा देगी…. सर आप अपने कार्यों के लिए भी तो वोट मांगिये… राहुल के नाम के पीछे गांधी लगा है उतना ही काफी है वोट मांगने के लिए। कई पीढ़ियों से चला आ रहा सरनेल है उनके पास, जो राजीव जी के पास भी था। सर न आप पर मुद्दे हैं न कांग्रेस पर। कई दशकों से भारत में मुद्दे जस के तस बने हुए हैं। इनके लिए भले जनता खुद को दोषी न मानें, लेकिन हमारा दोष है। और आजतक जितनी भी सरकारें आईं वे भी कम दोषी नहीं थीं, हैं।

आप #जीएसटी, #आधारकार्ड, #नोटबन्दी इन सब मुद्दों को जनता के आगे बोलिये और कहिए जनता से कि इन सब कार्यों के लिए वे आपको वोट करें। 2014 की तरह फिर से कहिए न कि 2 करोड़ रोजगार देंगे। 100 दिन में #कालाधन वापस लाकर दिखा देंगे, राम मंदिर बनवा देंगे। धारा 370 हटाएंगे। #पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाएंगे कि करांची तक हमारा वर्चस्व होगा। #चीन को सड़क पर ला देंगे। डॉलर को 40 पर ला देंगे। पेट्रोल डीज़ल सस्ता करवा देंगे। सर 15 लाख की बात मैं नहीं करूंगा क्योंकि वो भ्रामक प्रचार आपने नहीं बल्कि आप ही के आईटी सेल ने फैलाया था आपने तो बस इतना कहा था कि विदेशों में भारत का जितना कालाधन है अगर हम ले आये तो हर किसी को यूं ही 15-15 लाख रुपये मिल जाएंगे, जिसे भ्रामक तरीके से आप ही कि पार्टी ने प्रचारति किया था। बाद में आप ही के प्यारे चहेते अमित शाह ने जिसे खुलेआम जुमला करार दिया।

सर आप क्यों गड़े मुर्दे उखाड़ रहे हैं…. मुर्दे आपके भी गड़े हुए हैं, कोई उखाड़ने वाला मिल नहीं रहा… अगर उखड़े तो आप अपना आपा खो देंगे….।

सर आपको 5 साल मिले कार्य करने के लिए। मैं यह नहीं कहूंगा कि आपने कुछ नहीं किया, बहुत कुछ किया, अगर नहीं किया होता तो पार्टी आपके नाम पर वोट नहीं मांग रही होती और न आप यूपी जैसे बड़े प्रदेश में भारी बहुमत से जीतते, (जीत चाहे जैसे मिली हो, जीत तो जीत होती है।)
सर आपको हम सब 5 साल से देख रहे हैं आप गांधी परिवार को जबरदस्त तरीके से निशाना बना रहे हैं, सर निशाना बनाइये किसी ने नहीं रोका लेकिन मरे हुओं को जिंदा क्यों कर रहे हैं? सर कांग्रेस अपनी गलतियों से 44 सीटों पर आ गई लेकिन आपने उसका नाम ले लेकर #पंजाब, #एमपी, #राजस्थान, #छत्तीसगढ़ में फिर से जिंदा कर दिया।

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मिस्टर पीएम आप सबके चहेते पीएम हैं। देश की जनता को आप पर अब भी नाज़ है। कम से कम उन लोगों के बारे में सोचिए जो आंख बंद कर आप पर अब भी भरोसा किये हुए हैं।

सर भरोसा टूटने में देर नहीं लगती। आप जैसी ही गलती कई नेता पहले भी कर चुके हैं। इंदिरा गांधी सबसे बड़ा उदाहरण हैं, उन्हें लगता था कि उनके आगे कोई नेता नहीं है उन्हें कोई नहीं हरा सकता है। देश के लोग उनके लिए जान देते थे, उन्होंने काम भी अच्छे किये थे। लेकिन उनके कुछ फैसले ऐसे निकले जो जनता के बीच जगह नहीं बना पाए… जनता को फायदे के मुकाबले नुकसान ज्यादा हुए।

इसके बाद चौधरी चरण सिंह, भले वे कुछ समय के लिए देश के पीएम रहे लेकिन उन्हें यह भरोसा हो गया था कि ‘किसानों का देश भारत, अपने सच्चे #किसान नेता को कभी नहीं हरा पायेगा।’
इसके बाद #मायावती, उन्होंने दलितों की ऐसी राजनीति की कि वो खुद को भगवान से ऊपर मान बैठीं, और अपने स्टेचू वाकायदा महापुरुषों के बीच में खड़े करवा दिए…।
लेकिन इन सबका हुआ क्या? गलतियों से सीखकर इंसान बहुत आगे बढ़ जाता है…। इंदिरा गांधी जी को अपनी गलतियों का एहसास हुआ और वे फिर हारकर ऐसे जीतीं कि हमेशा के लिए अमर हो गईं। मायावती ने भी गलतियों से सीख ली भले आज वो गठबंधन का हिस्सा हैं लेकिन उन्हें गलती से सीखने में काफी वक्त लगा नहीं तो 2016 के यूपी विधानसभा चुनाव जीतकर आज वे मुख्यमंत्री होतीं।
सर घमंड तो हिटलर का भी ज्यादा दिन नहीं रह सका।

और हां एक सलाह भी…. आपको कोई “#चौकीदार_चोर_है” बोले, या “भ्रष्टाचारी” बोले, “हत्यारा बोले”, पत्नी को छोड़कर भागने वाला बोले, आपको कोई कुछ भी कहे। आप स्वयं आरोप प्रत्यारोप के जाल में मत फंसिए। जनता है ना जबाव देने वाली, अपने वोट से जनता को जबाव देने दीजिये। आप क्यों डरते हैं। जनता आपको बेहद प्यार करती है..।
आप ये सोचिए कि आपके कर्म कितने अच्छे रहे होंगे कि जनता आपकी तुलना इंदिरा गांधी से कर रही है। जनता कह रही है कि इंदिरा गांधी के बाद कोई ऐसा बढ़िया पीएम आया है जो जनता की सोचता है।… सर मीडिया भी तो आपका ही है।
फिर आप भी सड़कछाप वाली भाषा ले आएंगे तो देश कैसे आगे बढ़ेगा सर।

भाषा की मर्यादा तोड़ने के लिए विपक्ष है, छुटभैये नेता हैं लेकिन इस तरह की भाषा आपको शोभा नहीं देती #मोदी_जी।

बाकी आप समझदार है। अपना अच्छा, भला, बुरा सब जानते हैं। (वैसे भी आप किसी की सुनते कहाँ हैं… आप ही कि पार्टी के नेताओं के आरोप हैं, खुद #आरएसएस भी यह मानती है।)






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मनीष कुमार “अंकुर”

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