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मुनाफ़े के लिए ये लोग इतने गिर जाएंगे कि किसी की सेहत से भी खिलवाड़ करेंगे…. देखें ये रिपोर्ट

 

 

 

अबतक आपने मावे में शक्कर, दाल में कचरा, बेसन में मटर का भूसा, दूध में पानी और मिठाई में आलू आदि की मिलावट की बात सुनी होगी। लेकिन बाजार में अब मिलावटी सब्जियां और फल भी बिकने लगे हैं। सब्जियों में हार्मोन, केमिकल और खतरनाक रंगों की मिलावट कर लोगों के स्वास्थ के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ इस तरह के खिलवाड़ के खिलाफ सेहत विभाग आंख मूंदकर बैठा है।
मुनाफ़े के लिए लोग इतने गिर जाएंगे ये किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। हरी भरी सब्जियों को ताजा दिखाने के लिए मुनाफाखोर खतरनाक कैमिकल का इस्तेमाल करते हैं इतना ही नहीं वो सब्जियों को जल्दी बड़ा या पकाने के लिए एक खतरनाक दवाई का इस्तेमाल करते हैं। ऑक्सीटोसिन एक बेहद खतरनाक चीज है जो इंसान को बहुत नुकसान पहुंचाती है और लोग इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं।

अगर आप मार्केट में हरी व ताजी सब्जियां देख कर खरीदने का सोच रहे हैं, हरे-हरे खीरे देख कर सलाद बनाने की योजना बना रहे हैं, तो जरा ठहरिइए. सोचिए और थोड़ा विचार कर लीजिए कि बाजार में मौजूद करैला, भिंडी, खीरा, लौकी व परवल कहीं ज्यादा हरा तो नहीं है, पालक इतना फ्रेश कैसे है. और भी बहुत कुछ. अगर आप इन बातों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, तो विश्वास करिए कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों को दावत दे रहे हैं. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि डॉक्टर व कृषि वैज्ञानिक इन बातों को प्रमाणित कर रहे हैं. उनका कहना है कि बाजार में हरी-ताजी दिखनेवाली सब्जियां शरीर में कई प्रकार के रोग पैदा करती हैं, क्योंकि इन सब्जियों के उत्पादन व उन्हें फ्रेश लुक देने के लिए धड़ल्ले से केमिकल का इस्तेमाल हो रहा है. ये केमिकल एलर्जिक रिएक्शन के साथ-साथ कई गंभीर बीमारियों के वाहक हैं. डॉक्टर बाबू की माने तो इन सब्जियों के सेवन से लीवर व पेट को ज्यादा खतरा है. सरसों का तेल व केमिकल से सब्जियों पर चढ़ाया जाता है रंग: एक सब्जी विक्रेता के ही मुताबिक, एक बरतन में पहले पानी भर कर उसमें रंग घोला जाता है. इसके बाद उसमें सरसों का तेल व केमिकल मिलाया जाता है. इसके बाद उसी पानी में सब्जियां डूबा कर निकाली जाती हैं. इससे उनका रंग और गहरा हो जाता है। 10 मिनट तक उस पानी में डूबे रहने के बाद निकलीं सब्जियां कई दिन हरी व ताजी नजर आयेंगी. इनके अलावा सब्जियों को जल्द तैयार करने के लिए उनमें हार्मोन इंजेक्ट किया जाता है. इससे सब्जियों का ग्रोथ रातोंरात बढ़ जाता है. कई बार तो खेत की मिट्टी में ही केमिकल मिला दिया जाता है. केमिकल का ज्यादा प्रयोग पहुंचा रहा नुकसान कृषि वैज्ञानिक डाॅ गोविंद कुमार ने बताया कि सबसे पहले तो यह कि कई ऐसे केमिकल हैं, जिनका प्रयोग पूरी तरह वर्जित है. लेकिन, कुछ किसान इसका प्रयोग करते हैं. दूसरा यह कि कई ऐसी दवाएं हैं, जो वर्जित तो नहीं हैं, लेकिन किसान द्वारा उसका ज्यादा प्रयोग नुकसानदेह साबित हो जाता है. इसे एेसे समझा जा सकता है कि आॅफ सीजन में कोई सब्जी उगायी जा रही हो, तो मौसम अनुकूल नहीं होने के कारण सब्जी खराब हो सकती है. ऐसे में किसान उन पर अधिक और बार-बार केमिकल का प्रयोग करते हैं. केमिकल का असर समाप्त होने से पहले ही वह सब्जी बाजार में पहुंच जाती है और वहां से घरों में. केमिकलवाली सब्जी का ही लोग सेवन कर रहे होते हैं. उन्होंने कहा कि एेसे केमिकलों का सबसे ज्यादा प्रयोग बैगन व फूलगोभी के उत्पादन में किया जाता है. जिन सब्जियों पर चढ़ाया जाता है रंग करैला, लौकी, नेनुआ, भिंडी, मिर्च पर हरा रंग चढ़ाया जाता है। इन सब्जियों की बिक्री ज्यादा होती है, इसी वजह से ही दुकानदार अधिक मात्रा में इन सब्जियों की खरीद करता है. एक-दो दिन में यह सूखने लगते हैं, इनकी चमक बरकरार रखने व उन्हें फ्रेश रखने के लिए ही हरे रंग के केमिकल से इन्हें रंग दिया जाता है। हरा रंग व मोम कैंसर के कारण डाॅ गोविंद कुमार के मुताबिक, आज कल सब्जियों को ताजा-हरा दिखाने के लिए जिस तरह से हरे रंग का प्रयोग हो रहा है. वह मनुष्य के शरीर में कैंसर का एक बड़ा कारण हो सकता है। उन्होंने कहा कि हरा रंग बेहद खतरनाक होता है. शरीर में जाने के बाद यह पाचनतंत्र को बुरी तरह से प्रभावित करता है. डाॅ कुमार ने कहा कि सबसे खतरनाक तो यह है कि कई ऐसी सब्जियां व फल हैं, जिनका हम सीधा सेवन करते हैं, मतलब बिना पकाये। इससे केमिकल सीधे शरीर में प्रवेश कर जाता है। दूसरी ओर सेव जैसे फलों को फ्रेश लुक देने के लिए उन पर मोम या वैसलीन का लेयर चढ़ा दिया जाता है. व्यक्ति इसे सीधा सेवन करता है, जो शरीर में जा कर आंतों को नुकसान पहुंचाता है।

दिल्ली में ये काम बड़ी ही आसानी से किया जा रहा है जिसका खुलासा हुआ।
आदर्श नगर और महिंद्रा पार्क में रॉ अदरक को एसिड से चमकीला और सुंदर बनाने का कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा था। अधिक मुनाफे के लिए खेल को अंजाम दिया जा रहा था। एसडीएम मॉडल टाउन ने मामले में चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि अदरक की धुलाई करवाने वाले और धोने वाले लोग अलग-अलग हैं।

आढ़ती किसानों से पहले अदरक खरीदते हैं। इसे चमकीला बनाने के लिए ऐसिड से धुलाई करवाते हैं। आढ़ती टन के हिसाब से धुलाई करने वालों को पेमेंट करते हैं। अदरक को चमकीला बनाने के लिए ऐसिड में पानी मिक्स किया जाता है। पहले एक हौज में रॉ अदरक रखी जाती है। दूसरे ड्रम में ऐसिड। इसके बाद समबर्सिबल से आ रहे पानी में ड्रम में रखा ऐसिड पानी में मिक्स होता रहता है। एसडीएम ने बताया कि कोई भी ऐसिड मिलाने का काम करने से पहले नशा करता है। ऐसिड में खतरनाक गैस होती है। इससे दम घुंटता है और आंखो में जलन होती है।

एसडीएम ने बताया कि कई जगहों से सूचना मिली है कि हरी सब्जियों की भी धुलाई ऐसिड से की जा रही है। जानकारियां जुटाई जा रही है। ऐसे तत्वों को जल्द दबोच लिया जाएगा।

आजादपुर मंडी के आस-पास एक साल पहले भी प्रशासन ने छापामारी कर सैकड़ों लीटर एसिड और सैकड़ों टन अदरक जब्त की थी। इसके बाद एसिड गोदाम को आदर्श नगर और महिंद्र पार्क में शिफ्ट कर दिया। पुलिस इसके सरगना की तलाश में जुटी है।


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