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उत्तर प्रदेश के संभल जिले से जुड़ा एक बड़ा और संवेदनशील घटनाक्रम सामने आया है। संभल हिंसा मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर का तबादला कर दिया गया है। उन्हें संभल से हटाकर सुल्तानपुर भेजा गया है। अहम बात यह है कि इस तबादले में उन्हें CJM पद से हटाकर सिविल जज (सीनियर डिविजन) बनाया गया है।
यह तबादला ऐसे समय पर हुआ है, जब संभल जिले में कोर्ट और पुलिस प्रशासन के बीच टकराव की चर्चा तेज है।
संभल हिंसा केस में CJM का सख्त आदेश
संभल के शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में हुई हिंसा और कथित फर्जी एनकाउंटर के मामले में CJM कोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, थाना प्रभारी अनुज तोमर समेत कुल 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ 7 दिन के भीतर एफआईआर दर्ज कर रिपोर्ट पेश की जाए।
पीड़ित परिवार के गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता यामीन, जो नखासा थाना क्षेत्र के खग्गू सराय इलाके का निवासी है, ने आरोप लगाया था कि उसका 24 वर्षीय बेटा आलम 24 नवंबर 2024 को पापड़ बेचने निकला था। इसी दौरान शाही जामा मस्जिद के पास पुलिस ने उसे गोली मार दी।
परिवार का आरोप है कि घटना के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बजाय घायल युवक के खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया। डर और दबाव के चलते आलम का इलाज छुपकर मेरठ में कराया गया।
कोर्ट बनाम पुलिस: टकराव खुलकर सामने आया
मामला जब अदालत पहुंचा, तो CJM कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया मामले में गंभीर लापरवाही और अधिकारों का दुरुपयोग सामने आया है।
हालांकि, कोर्ट के आदेश के बाद संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार ने बयान दिया कि इस आदेश को चुनौती दी जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी और मामले में पहले ही न्यायिक जांच हो चुकी है।
क्या कोर्ट के आदेशों की अवहेलना?
एसपी के इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या संभल में न्यायालय के आदेशों की अनदेखी की जा रही है। क्या यह मामला सिर्फ प्रशासनिक असहमति का है या फिर यह कोर्ट और पुलिस के बीच टकराव का संकेत है?
इसी बीच, FIR का आदेश देने वाले CJM विभांशु सुधीर का तबादला हो जाना कई नए सवाल खड़े कर रहा है।
तबादले पर उठे सवाल
हालांकि तबादले को प्रशासनिक प्रक्रिया बताया जा रहा है, लेकिन समय और परिस्थितियों को देखते हुए इसे संभल हिंसा केस से जोड़कर देखा जा रहा है। CJM से सिविल जज (सीनियर डिविजन) बनाए जाने को लेकर भी कानूनी और न्यायिक हलकों में चर्चा तेज है।
संभल मामला अभी खत्म नहीं
फिलहाल संभल हिंसा और कथित फर्जी एनकाउंटर का मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। एक ओर पुलिस अपील की तैयारी कर रही है, तो दूसरी ओर पीड़ित परिवार न्याय की मांग पर अड़ा हुआ है।
आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कोर्ट के आदेशों का पालन होता है या यह मामला न्यायिक और प्रशासनिक टकराव का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आता है।
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