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किसानों के आंदोलन से घबराई मोदी सरकार, पेट्रोल डीजल के दामों में 2.50 रुपये की कटौती से गहरे जख्मों पर मामूली सा मरहम लगाने की कोशिश

 

 

 

पेट्रोल डीजल में बेहताशा वृद्धि के बाद लोगों में सरकार के प्रति गुस्सा अपने चरम पर पहुंच रहा रहा था जिसको देखते हुए आज सरकार ने पेट्रोल डीजल पर 2.50 रुपये वैट घटाने की घोषणा की। लेकिन लोगों का मानना है कि जिस प्रकार पेट्रोल डीजल के दामों में जबरदस्त वृद्धि हुई है ये 2.50 रुपये की कमी नाकाफी है।

 

2 अक्टूबर को किसानों के दिल्ली घेराव ने सरकार को आखिर पेट्रोल डीजल के दाम घटाने पर मजबूर कर ही दिया। लाखों किसानों के दिल्ली कूंच करने और उनके साथ दुर्व्यवहार करने के बाद सरकार बैकफुट पर नज़र आयी। किसानों की ज्यादातर मांगों पर विचार करने के बाद आज पेट्रोल डीजल पर भी सरकार ने नरम रुख दिखाया।

आज केंद्र सरकार ने पेट्रोल डीजल पर 2.50 रुपये प्रति लीटर कटौती करने का ऐलान किया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बात की घोषणा करते हुए कहा कि यह कटौती एक्साइज ड्यूटी में की गई है। इसमें 1.50 रुपये केंद्र सरकार और 1 रुपया तेल मार्केटिंग कंपनियां कटौती करेंगी।

वित्त मंत्री के ऐलान के तुरंत बाद गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने 2.50 रुपये वैट घटाने की घोषणा कर दी है। अब इन राज्यों में लोगों को पांच रुपये प्रति लीटर सस्ता पेट्रोल-डीजल मिलेगा। इन दोनों राज्यों के बाद अन्य भाजपा शासित राज्य भी देर शाम तक ऐसा कदम उठा सकते हैं।

वित्त मंत्री जेटली ने राज्य सरकारों ने भी कीमत घटाने का अनुरोध किया – यदि राज्य भी इतनी ही कटौती करें, तो दामों में पांच रुपये प्रति लीटर की कमी आएगी।
साथ ही आज गुरुवार को भी इनके दामों में क्रमश: 15 पैसे और 20 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों ने गुरुवार को जारी अधिसूचना में बताया कि पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमश: 15 पैसे और 20 पैसे प्रति लीटर बढ़ाये गए हैं। इस वृद्धि के बाद दिल्ली में पेट्रोल अब 84 रुपये प्रति लीटर तथा डीजल 75.45 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। यह दोनों का सर्वकालिक उच्च स्तर है।

ईंधन के बढ़ते दाम से किसानों की पहले से बदहाल स्थिति और खराब होने की आशंका है। विशेषकर रबी फसलों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ने का अनुमान है। डीजल अभी रिकॉर्ड उच्च कीमत पर बेचा जा रहा है। यह कृषि क्षेत्र में सर्वाधिक इस्तेमाल किया जाता है। खेत जोतने के लिए ट्रैक्टर से लेकर सिंचाई के पंपसेट तक डीजल से ही चलते हैं। अत: डीजल महंगा होने से किसानों पर इसका असर पड़ना तय है।

माना जा रहा है कि दोनों मंत्रियों ने कच्चे तेल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों तथा रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिरते जाने के प्रभावों को दूर करने पर चर्चा की। साथ ही सब्सिडी वाला घरेलू रसोई गैस सिलेंडर भी पहली बार 500 रुपये प्रति सिलिंडर को पार कर गया है।

वहीं कांग्रेस का कहना है कि पेट्रोल-डीजल-घरेलू गैस में जिस प्रकार से वृद्धि देखने को मिली है यह भारत के इतिहास में अब तक कि सर्वाधिक वृद्धि है। सरकार के प्रति लोगों में गुस्सा है। बेरोजगारी, मंहगाई, असुरक्षा के मुद्दे ज्यों के त्यों हैं। मोदी सरकार को लोगों के बारे में सोचना चाहिए। झूंठ फैलाकर गद्दी हासिल करने वाली मोदी सरकार सत्ता का लालच छोड़ लोगों का हित साधे।

 

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