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शनि जयंती पर विशेष, शनि भगवान ही हैं कर्म फलदाता शनि भगवान् ही हैं विघ्नहर्ता

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श्री शनि भगवान को कर्म फल दाता, न्याय के दाता के रूप में जाना जाता है। आज शनि जयंती है और इस दिन का बहुत ही महत्त्व होता है।
यूँ तो हर शनि मंदिर में इस दिन विशेष पूजा का आयोजन होता है लेकिन इस बार उत्तरप्रदेश के जिला बुलंदशहर में कचहरी रोड़ स्थित शनि मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन हुआ। स्वामी सतेंद्र जी महाराज ने सुबह 6:30 बजे दीपक जलाकर शोभा यात्रा के लिए शनि भगवान् के सुन्दर फूलों से सजे रथ को रवाना किया।

 

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पूरे शहर में शनि भगवान् की शोभा यात्रा निकाली गयी इस मौके पर दूर-दूर से आये भक्तजनों ने हिस्सा लिया।

पूरे शहर में शनि भगवान् के सजे धजे रथ के साथ बड़ी धूमधाम से शोभा यात्रा निकाली गयी सुबह 9 बजे मंदिर में वापस आकर शोभा यात्रा का समापन हुआ। स्वामी सतेंद्र जी महाराज ने शनि भगवान् के साथ साथ सभी देवी देवताओं को भोग लगाया और भक्तों में प्रसाद बांटा।

शनि जयंती के इस शुभ अवसर पर स्वामी सतेंद्र जी महाराज की तरफ से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। सभी भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे में सभी वर्गों के लोगों ने हिस्सा लिया और प्रसाद भी लिया। सभी धर्म के लोग भंडारे में हिस्सा लेते हुए भोजन प्रसाद ग्रहण किया।

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इस मंदिर की ख़ास बात यह है कि यहाँ सभी धर्मों के लोग शनि भगवान् की पूजा अर्चना करते हैं। यह देश का ऐसा इकलौता मंदिर है जहाँ पुरुष पुजारी के साथ-साथ महिला पुजारी भी शनि भगवान की पूजा अर्चना करवाती हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेवजी का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को हुआ था, इसलिए इस दिन को शनि जयंती के रूप में मनाते हैं। इस बार शनि जयंती 25 मई यानी गुरुवार के दिन है। नवग्रहों में शनि ही एक मात्र ऐसे ग्रह हैं, जिनका जन्मोत्सव मनाया जाता है।

 

 

 
बुलंदशहर में स्थित शनि भगवान् के मंदिर के संस्थापक स्वामी सतेंद्र जी महाराज बताया कि आज गुरूवार के दिन इस दिन देव पितृ कार्य अमावस्या भी होने के कारण पितृों को प्रसन्न करने का भी विशेष दिन है। इस बार शनिदेव का गुरू की राशि “धनु” में गोचर होना अधिक शुभ एवं गुरूवार को शनि जयंती होना धार्मिक पूजा-पाठ करने से इच्छित फल की प्राप्ति सम्भव है। इस वर्ष विशेष तौर पर शनिदेवजी का मंगल की राशि में कुछ दिनों भ्रमण होने के कारण हनुमान जी से सम्बन्धित शनि के उपाय अत्यधिक लाभदायक होंगे। इस वर्ष शनि का अग्नि तत्व राशि ‘धनु’ में गोचर होने के कारण एवं सूर्य “नक्षत्र कृतिका” में शनि जयंती होेने के कारण तापमान में अधिक वृद्धि होगी। शनि जयंती, गुरूवार के दिन सूर्य नारायण ‘रोहिणी नक्षत्र’ में प्रवेश करेंगे एवं चन्द्रमा वृष राशि में प्रवेश करेंगे। इस शनि जयंती के दिन महाकालेश्वर की नगरी में द्वादश लिंगों, “महाकाल लिंग” जिसे शनिदेव की उच्च राशि तुला का ज्योतिर्लिंग माना जाता है, की पूजा अर्चना से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।

 

 

 

पूजा के मुहूर्त
स्वामी सतेंद्र जी महाराज के अनुसार प्रातः 06 बजे से 07:30 बजे तक शुभ चौघड़िया में
प्रातः 10:30 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक चर, लाभ, अमृत के चौघड़िया में
सायं 04:30 बजे रात्रि 09 बजे तक शुभ, अमृत, चर के चौघड़िया मुहुर्त में।

ऐसे करें उपाय
शनि जयंती के दिन सायंकाल सूर्यास्त के बाद स्नान आदि के बाद हरड़ का तेल शरीर पर लगाएं, पश्चिम दिशा की ओर एक चौकी रखकर उस पर काला वस्त्र बिछाएं। नीले लाजवंती के पुष्प बिछाएं तथा पीपल के पत्ते पर शनि यंत्र स्थापित करें। सरसों के तेल का दीपक, धूप जलाएं। नैवेद्य चढ़ाने के लिए काली उड़द का हलवा, काले तिल से बने लड्डू, अक्षत, गंगाजल, बिल्ब पत्र, काले रंग के फूल आदि रखें। चौकी के चारों ओर तिल के तेल से भरी कटोरियां रखें। इसमें काले तिल के दाने, एक सिक्का, एक पंचमुखी रूद्राक्ष डालें, शनि के मंत्रों का जाप, साधना आदि करने के उपरान्त सात अथवा ग्यारह शनिवार को इन कटोरियों में अपने चेहरे की छाया देखने के बाद शनिदेव जी के स्मरण के साथ शनि का दान लेने वालों को दे दें। इस प्रकार पूजा अर्चना करने से दुर्घटना, गंभीर रोग, अकाल मृत्यु, शास्त्राघात से शनिदेवजी मुक्त रखते हैं।

 

 

 

शनिव्रत विधान
शनिवार का व्रत शनि ग्रह की शांति के लिए किया जाता है। यह व्रत रोग, शोक, भय व बाधा को दूर करता है तथा भूमि, गृह निर्माण, गाड़ी, मशीनरी आदि का लाभ देता है। इस व्रत के लिए स्नान आदि से निवृत्त होकर पीपल वृक्ष के नीचे, शनि मंदिर में अथवा शनिदेव का चित्र का पूजन कर शनिदेव के दस नामों का निरंतर उच्चारण करें। उसके बाद पीपल वृक्ष के चारों ओर सात बार कच्चा सूत लपेट कर सात परिक्रमाएं एवं उनका पूजन करें। सूर्याेदय होने से पहले ही यह पूजा होनी चाहिए। प्रत्येक मास के प्रथम शनिवार को उड़द की खिचड़ी-दही, द्वितीय शनिवार को तूवीर, तृतीय को खजला व चतुर्थ को पूड़ी तथा घी का भोग लगाएं। भोेग लगाने तथा यही सामग्री ग्रहण करने से शनि संतुष्ट होते हैं। प्रत्येक शनिवार को इस व्रत को करने से साढ़ेसाती एवं ढैय्या का अशुभ प्रभाव समाप्त होता है।

 

 

 
शनि हवन
शनि ग्रह से सम्बंधित दोष व पीड़ा शांति के लिए हवन करने का विधान है। यह हवन शुभ मुहुर्त में पचांग में अग्निवास देखकर शमीकाष्ठ सेे हवन करना श्रेष्ठ रहता है।
शनि दान उपाय
काले तिल, लोहा, तेल, साबुत उड़द, काली छतरी, भैंस, चमड़े के जूते, काले कपडे़ आदि।
शनिदेव का गोचर
26 अप्रेल 2017 से वक्री तथा 20 जून 2017 से वक्री रहते हुये पुनः वृश्चिक राशि में 26 अक्टूबर 2017 तक, 25 अगस्त से शनि मार्गी होकर भी 26 अक्टूबर तक वृश्चिक राशिस्थ रहेंगे।

 

 
साढ़े साती एवं ढैय्या
26 जनवरी से 20 जून तक शनि धनु राशि में रहते हुये वृषभ एवं कन्या राशि वाले जातक शनि की ढैय्या से प्रभावित रहेंगे। 20 जून 2017 से 26 अक्टूबर 2017 तक शनि वक्री होकर वृश्चिक राशि में रहते हुये मेष एवं सिंह राशि वाले जातक पुनः शनि की ढैय्या से प्रभावित रहेंगे। 26 अक्टूबर 2017 से वर्ष समाप्ति तक शनि के धनु राशि में रहते वृष एवं कन्या राशि वाले शनि की ढैय्या से प्रभावित रहेंगे। इस राशि वाले जातकों को शनि की साढ़ेसाती एवं ढैय्या की परेशानी से छुटकारा पाने के लिए नीचे लिखे उपायों का अनुसरण करना हितकर रहेगा।

 

 

 

शनि शांति के हनुमानजी के सम्बन्धित उपाय
1. शनिवार के दिन कच्ची धानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमानजी की आरती करें। संकट दूर होगा और धन भी प्राप्त होगा।
2. शनिवार के दिन काले रंग के पशुओं को रोटी खिलायें।
3. शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसो के तेल का दीया जलाएं, दीए में काले उड़द के तीन दाने डालें, इससे सभी कार्य पूर्ण होंगे।
4. शनिवार के दिन सिंदूर और चमेली के तेल का दीपक जलाकर हनुमानजी को लाल लंगोट अर्पित करें।
5. शनिवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में एक नारियल पर स्वास्तिक बनाकर हनुमानजी को अर्पण करें। साथ ही हनुमान चालीसा, बजरंग बाण का पाठ करें।
6. शनिवार या मंगलवार के दिन हनुमानजी को सिंदूर और तेल का चोला चढ़ायें।
7. शनिवार के दिन हनुमान जी के सम्मुख रात्रि में चौमुखा दीपक जलाये।
8. शनिवार को प्रातःकाल किसी पीपल के पेड़ को जल चढ़ाये और सात परिक्रमा करें। इसके बाद पीपल के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। इस उपाय को करने से शनि व मंगल दोनों के दोष दूर होते हैं।
9. शनिवार एवं मंगलवार को ग्यारह पीपल के पत्ते लेकर साफ जल से धोकर इन पत्तों पर चन्दन से श्रीराम लिखें। इसके बाद हनुमानजी के मंदिर में हनुमानजी को अर्पित करें।
10. प्रत्येक शनिवार एवं मंगलवार को बनारसी पान चढ़ायें। ऐसा करने से हनुमान जी की कृपा बनी रहती है।
11. प्रत्येक शनिवार एवं मंगलवार को हनुमान मंदिर में ग्यारह उड़द के दाने, सिंदूर, चमेली का तेल, फूल, प्रसाद अर्पित करें। साथ ही सुन्दरकाण्ड का पाठ करें।
12. शनि जयंती वाले दिन भोजन में काली मिर्च व काले नमक का प्रयोग अवश्य करें।
13. शनि जयंती वाले दिन शमीवृक्ष की जड़ को काले कपड़े में बांधकर अपनी दायीं भुजा में बांधे।
14. शनि जयंती वाले दिन मांसाहार, मदिरापान त्यागने का प्रण करें।
15. शनि जयंती के दिन शमीवृक्ष का रोपण करें।
16. शनिवार को 800 ग्राम काले तिल पानी में भिगोकर शनि जयंती वाले दिन गुड़ में कूट कर लड्डू बनाकर कर काले घोड़े को खिलायें। यह उपाय लगातार आठ शनिवार को करने से शनि पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
ॐ शं शनैश्चराय नमः

 


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