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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: आवारा कुत्तों पर सख्ती, डॉग लवर्स भी नहीं बचेंगे

सड़कों पर घूमते ये आवारा कुत्ते… और कई बार इनके आतंक से आप भी आतंकित हुए होंगे। अब इसी को देखते हुए सुप्रीमकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।


आवारा कुत्ते जो किसी भी वक्त, किसी को भी अपना शिकार बना सकते हैं… और फिर शुरू होता है दर्द, डर और मौत का सिलसिला!
कभी बाइक स्कूटी के पीछे भागना तो कभी राह चलते महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों पर हमला बोल देना, कुत्तों का आतंक कई जगहों पर तो इतना बढ़ चुका था कि लोगों का वहां से निकलना दुश्वार हो गया था।
आज सुप्रीम कोर्ट ने इस खतरनाक सच्चाई पर ऐसा फैसला सुनाया है, जिससे पूरे देश के डॉग लवर्स भी सकते में आ जाएंगे।
डॉग लवर्स सकते में ही नहीं आ जाएंगे बल्कि अब उन्हें भी जेल हो सकती है।
तो आइए जानते हैं कि आवारा कुत्तों पर सुप्रीमकोर्ट का क्या है फैसला और क्या करने से डॉग लवर्स को हो सकती है जेल?

दिल्ली एनसीआर में आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर के नागरिक प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिनमें आवारा कुत्तों को पकड़ने, उन्हें जीवाणु रहित करने और उन्हें आश्रय गृह में रखने के निर्देश शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति या संगठन आवारा कुत्तों के खिलाफ कार्रवाई में अड़ंगा डालता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई करें।
आवारा कुत्तों के लोगों पर हमलों और रेबीज संक्रमण के कई मामले सामने आने के चलते सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि एनसीटी-दिल्ली, एमसीडी, एनएमडीसी तुरंत आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान शुरू करें और खासकर उन इलाकों में जहां आवारा कुत्तों का खतरा ज्यादा है। अदालत ने कहा कि आवारा कुत्तों के खिलाफ कार्रवाई में कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति या संगठन इस काम में आड़े आए तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई करें।


शीर्ष अदालत ने ये भी कहा कि आवारा कुत्तों को स्टर्लाइज यानी जीवाणु रहित बनाने के बाद सड़कों या कॉलोनियों में वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि जनता के हित को ध्यान में रखते हुए वे ये निर्देश दे रहे हैं। पीठ ने कहा कि नवजात, छोटे बच्चे किसी भी कीमत पर इन आवारा कुत्तों के शिकार नहीं बनने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने एक हेल्पलाइन स्थापित करने के भी निर्देश दिए। इस हेल्पलाइन पर लोग कुत्तों के काटने की घटनाओं को रिपोर्ट कर सकें। सुप्रीम कोर्ट ने बीती 28 जुलाई को आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाओं की मीडिया रिपोर्ट्स पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया है – अगर कोई भी व्यक्ति, चाहे वो कितना भी बड़ा डॉग लवर क्यों न हो, आवारा कुत्तों के खिलाफ कार्रवाई में अड़ंगा डाले… तो उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी एक्शन होगा!”

अब बात करते हैं कुत्तों के आतंक की तो आंकड़े डरा देने वाले हैं… सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, हर साल भारत में करीब 20,000 लोगों की मौत रेबीज से होती है… और इनमें से 95% मामले कुत्तों के काटने से होते हैं।
केवल दिल्ली-एनसीआर में ही पिछले 5 सालों में कुत्तों के काटने के 3 लाख से ज्यादा मामले दर्ज हो चुके हैं।
ज़रा सोचिए, हर दिन दर्जनों लोग अस्पतालों में सिर्फ इसलिए पहुंच रहे हैं क्योंकि किसी मोहल्ले के कोने में पल रहा एक आवारा कुत्ता उन्हें नोच गया।”

“रेबीज… वो बीमारी जिसका नाम सुनते ही अच्छे-अच्छों के पैरों तले जमीन खिसक जाए… एक बार अगर इंसान में इसके लक्षण आ गए, तो फिर इसका कोई इलाज नहीं… सिर्फ और सिर्फ दर्दनाक मौत!


वैज्ञानिक भी मानते हैं कि रेबीज का वायरस दिमाग पर हमला करता है, इंसान को पागलपन और मौत के मुंह में धकेल देता है।”

“लेकिन, हैरानी की बात ये है कि जब भी प्रशासन ऐसे खतरनाक आवारा कुत्तों को पकड़ने की कोशिश करता है… तब एक वर्ग सामने आकर इसे रोकने की कोशिश करता है…
ये खुद को ‘डॉग लवर’ कहते हैं, लेकिन हकीकत में इनका रवैया कई बार गंदा और गैरजिम्मेदार होता है।
ये सड़कों पर आवारा कुत्तों को खिलाते हैं, उन्हें इंसानों के बीच रहने के लिए प्रोत्साहित करते हैं… लेकिन जब वही कुत्ते किसी बच्चे को नोच डालते हैं, तो ये चुप हो जाते हैं…
इनके लिए इंसान की जान से ज्यादा कुत्ते का पेट भरना ज़रूरी हो जाता है।”

“सुप्रीम कोर्ट ने इस खतरे को गंभीरता से लिया है और दिल्ली-एनसीआर के सभी प्रशासन को आदेश दिया है कि –

  • आवारा कुत्तों को तुरंत पकड़ा जाए
  • उन्हें स्टरलाइज किया जाए
  • और सुरक्षित आश्रय गृह में रखा जाए
    लेकिन सबसे बड़ा निर्देश ये – इन्हें वापस सड़कों पर छोड़ने की गलती अब नहीं होनी चाहिए।
    और अगर कोई बीच में अड़ंगा डाले, तो उसे भी नहीं बख्शा जाएगा!”

“अब सवाल ये है… क्या हम इंसानों की जिंदगी बचा पाएंगे, या फिर इंसानियत को एक बार फिर डॉग लवर्स के हाथों कुर्बान कर देंगे?


क्योंकि सच ये है – सड़कों पर घूमता एक आवारा कुत्ता, महज एक जानवर नहीं… बल्कि रेबीज जैसी धीमी और दर्दनाक मौत का चलता-फिरता खतरा है!”

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