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महागठबंधन में महासंग्राम महासंग्राम, कांग्रेस नहीं चाहती Raj Thackeray की MNS Uddhav Thackeray की Shivsena के साथ आए

Akash Dhake | Maharashtra Politics| Mumbai : महाराष्ट्र की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा धमाका हो रहा है… और वो भी राज ठाकरे को लेकर। महागठबंधन यानी MVA के अंदर ही बड़ी फूट खुलकर सामने आ गई है।

कांग्रेस के भीतर दो टुकड़े एक धड़ा चाहता है कि मनसे के साथ गठबंधन हो, ताकि बीजेपी को टक्कर दी जा सके… और दूसरा धड़ा साफ कह रहा है… “मनसे से हाथ मिलाना नामुमकिन!”


दिलचस्प ये है कि जिस वक्त शिवसेना (उद्धव गुट) और मनसे के रिश्ते नजदीक आ रहे हैं, उसी वक्त कांग्रेस के भीतर सबसे बड़ी खींचतान शुरू हो गई है। मतभेद इतने गहरे कि महाराष्ट्र का पूरा चुनावी समीकरण हिलकर रह गया है।


क्या कांग्रेस टूट जाएगी? क्या MVA का खेल बिगड़ जाएगा? या फिर ये सब सिर्फ दबाव की राजनीति है? आज की पूरी कहानी आपको चौंका देगी। चलिए शुरू करते हैं।

महाराष्ट्र निकाय चुनाव नजदीक हैं… और इसी बीच कांग्रेस के अंदर गहरे मतभेद सामने आ गए हैं। मुद्दा है राज ठाकरे की पार्टी MNS को महागठबंधन में शामिल किया जाए या नहीं!

एक तरफ हैं विजय वडेट्टीवार, जिन्होंने खुलकर कहा है… चुनाव एकजुट होकर लड़ना जरूरी है बीजेपी को रोकने के लिए विपक्षी एकता ज़रूरी और मनसे ने MVA के “सत्याग्रह मोर्चा” में हिस्सा भी लिया था

मतलब वडेट्टीवार साफ संकेत दे रहे हैं कि मनसे को साथ लेने में कोई बुराई नहीं। लेकिन… कहानी यहाँ पलट जाती है। क्योंकि मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ और प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल इसके बिल्कुल खिलाफ खड़े हैं। वर्षा गायकवाड़ का साफ बयान “कांग्रेस उन लोगों से गठबंधन नहीं करेगी जो कानून हाथ में लेते हैं, डराते-धमकाते हैं।”

सपकाल ने तो साफ कहा “बीएमसी चुनाव के लिए गठबंधन पर फैसला मुंबई इकाई ही करेगी। हिंसा करने वालों से हाथ नहीं मिलाया जाएगा।”

यानी एक तरफ कांग्रेस का राज्य नेतृत्व “MNS को साथ लेने” पर विचार कर रहा है… और दूसरी तरफ मुंबई कांग्रेस “कड़ी ना” कह चुकी है।

मामला इसलिए गर्म है क्योंकि शिवसेना (उद्धव गुट) और मनसे की नजदीकियाँ आजकल बढ़ रही हैं। दोनों ठाकरे भाइयों के बीच सियासी बर्फ पिघलती दिख रही है… और ऐसे में कांग्रेस का विरोध करना चुनावी रणनीति को उलझा रहा है।

कांग्रेस को डर ये भी है कि यदि MNS को साथ लिया गया, तो उसका मुस्लिम वोट बैंक साथ ही उत्तर भारतीय वोटर नाराज़ हो सकते हैं। उधर शिवसेना और NCP चाहते हैं कि विपक्ष एकजुट होकर लड़े ताकि बीजेपी को रोका जा सके।

मतलब महागठबंधन के अंदर ही गहरे अविश्वास और रणनीतिक मतभेद सामने आ चुके हैं।

वडेट्टीवार यहीं नहीं रुके… उन्होंने बीजेपी पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा “मुंबई चुनाव में बीजेपी की बढ़त का दावा एक मनगढ़ंत कहानी है। ये जनता को दिमाग़ी तौर पर प्रभावित करने की कोशिश है।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुंबई में नए वोटर आईडी “रहस्यमय तरीके” से मिले और शायद बीजेपी वही खेल खेल रही है जो उसने बिहार में किया था।

यह बयान महाराष्ट्र की सियासत में हलचल मचा रहा है।

तो कुल मिलाकर महागठबंधन में राज ठाकरे एंट्री को लेकर ऐसा संग्राम हुआ है कि कांग्रेस दो टुकड़ों में बंटी दिख रही है। बीएमसी और निकाय चुनाव पास हैं… शिवसेना-मोर्चा अपनी रणनीति बना रहे हैं… और कांग्रेस के अंदर की यह फूट महागठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

आपको क्या लगता है? क्या MNS को साथ लेने से विपक्ष मज़बूत होगा… या कांग्रेस का फैसला सही है?

कमेंट में बताइए। वीडियो को Like और Share करें और चैनल Khabar 24 Express को Subscribe करना न भूलें। धन्यवाद

Akash Dhake | Maharashtra Politics| Mumbai



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