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Jagdeep Dhankhar ने उपराष्ट्रपति पद से क्यों दिया इस्तीफा, ये है उसके पीछे की असली वजह

राजनीति का मास्टर स्ट्रोक या बगावत?
जगदीप धनखड़ ने क्यों छोड़ा उपराष्ट्रपति का पद?
क्या सरकार से टकराव बनी इस्तीफे की वजह?

राजनीति में दोस्त कब दुश्मन बन जाए और दुश्मन कब अपना – कुछ कहा नहीं जा सकता!
देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया है!
पर क्या ये सच में ‘स्वेच्छा से’ लिया गया फैसला था… या इसके पीछे है एक गहरी राजनीतिक साजिश?
कहानी शुरू होती है बंगाल से… जहां साल 2019 में बीजेपी ने एक बड़ा दांव खेला –
जगदीप धनखड़ को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाकर भेजा गया।

 


मकसद साफ था – ममता बनर्जी की राजनीति को तोड़ना, दबाना और हटाना!
धनखड़ ने भी मोर्चा खोल दिया।
ममता सरकार पर एक के बाद एक हमला – आरोप ये तक लगे कि राज्यपाल ममता को काम नहीं करने दे रहे।
विवाद पर विवाद… टकराव चरम पर!
बीजेपी ने उनके ‘साहस’ को इनाम में बदला और 2022 में बना दिया देश का उपराष्ट्रपति।

“साल 2023 के अंत तक तो सब ठीक ठाक रहा। लेकिन जैसे ही आंकड़ों में आया कि इस बार विपक्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में काफी कुछ कर सकता है, फिर धनखड़ की टोन विपक्ष के खिलाफ थोड़ी नरम पड़ गई।”

लेकिन असली मुश्किल तो अब शुरू हुई।
विपक्ष लगातार धनखड़ को एकतरफा, पक्षपाती और ‘सरकार का प्रवक्ता’ कहने लगा।
उन पर आरोप लगे कि वो संसदीय मर्यादाओं का पालन नहीं कर रहे।

2024 चुनाव के बाद सियासी गणित बदला। क्योंकि लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मिली जीत अधूरी थी।
बहुमत नहीं, सत्ता जोड़-तोड़ से आई।
विपक्ष मजबूत हुआ, और धनखड़ बन गए विपक्ष के निशाने पर!”

चापलूस’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल हुआ, वहीं पूरा विपक्ष उनके खिलाफ एकजुट हो गया। अब ऐसे में जगदीप धनखड़ ने अपनी इमेज सुधारने का फैसला लिया। उन्हें लगा कि उनके दमन पर दाग ज्यादा लग गए हैं। इसके बाद उन्होंने विपक्ष के सांसदों से मिलना जुलना शुरु कर दिया। उनकी समस्याएं सुनने लग गए।
और यहीं से शुरू हुई एक नई चाल…

उन्होंने अरविंद केजरीवाल से लेकर उद्धव ठाकरे गुट तक, कांग्रेस से लेकर जयराम रमेश तक –
धनखड़ सबके करीब आने लगे।
न्यायपालिका पर सरकार से अलग स्टैंड, और मंत्रियों पर सवाल।
ये सब बातें मोदी सरकार को रास नहीं आईं।

धनखड़ अब सत्ता के लिए ‘असहज’ हो गए थे।
और जैसा कि राजनीति में होता है…
जो नेता पार्टी लाइन से बाहर जाता है –
उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।

धनखड़ को इशारा मिला – इस्तीफा दो।
उन्होंने इस्तीफा दे दिया…
लेकिन देश की राजनीति में एक बड़ा सवाल छोड़ गए –
क्या ये इस्तीफा था… या सत्ता के शिखर से गिरने की सज़ा?”

अब सवाल उठता है कि क्या धनखड़ अगला बड़ा सियासी मोहरा बनेंगे?
या ये था उनका राजनीतिक अंत?
क्या मोदी सरकार को चुनौती देना इतना महंगा पड़ सकता है?
या फिर… ये सब एक और मास्टर प्लान का हिस्सा है?”

जवाब शायद जल्द ही सामने होगा…
फिलहाल खबर 24 एक्सप्रेस पर बने रहें।

जहां मिलती है राजनीति की सबसे तेज़, सबसे सटीक और सबसे सनसनीखेज़ खबर!”

“क्या मोदी सरकार से टकराने की सज़ा मिली धनखड़ को?”
“राजनीति में कोई स्थायी दोस्त नहीं होता, सिर्फ फायदे होते हैं!”
“आप क्या सोचते हैं? कमेंट में ज़रूर बताएं!”

Bureau Report : Khabar 24 Express


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