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नसीरुद्दीन शाह ने आखिर ऐसा कह क्या दिया कि चारों ओर हंगामा मच गया और वो देशद्रोही हो गए? हंगामा भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वो मुसलमान हैं?

मतलब कोई सरकार की जरा सी आलोचना क्या कर दे, बस फिर क्या, तथाकथित राष्ट्रवाभक्तों द्वारा वो देशद्रोही हो जाता है। इसके बाद उसे सुनियोजित तरीके से गद्दार करार दे दिया जाता है। कोई पाकिस्तान भेजने की सलाह देता है तो कुछ लोग थोक के भाव मुफ्त में गद्दारी का सर्टिफिकेट बांटने लग जाते हैं। जैसे यह देश उनके बाप की बपौती है। या हम हिंदुस्तान में नहीं बल्कि तालिबान में रह रहे हों?

आज इस देश में सिर्फ राष्ट्रवादी सरकार है और उसके राष्ट्रवादी भक्त। जी हां ये कड़ी टिप्पणी इसलिए क्योंकि जो आज हो रहा है वो बेहद ही निंदनीय है और साथ ही चिंताजनक भी। आज इस देश में जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है उसे देखकर यही लग रहा है कि इस देश में सिर्फ हिन्दू-मुसलमान, मंदिर-मस्जिद और गाय के मुद्दे बचे हैं। इस देश में न तो बेरोजगारी मुद्दा है, न भ्रष्टाचार मुद्दा है। महँगाई तो बिल्कुल भी नहीं है। हर कोई आज इस देश में सुखी है। अगर कुछ दुःख है तो यहां यहां पर हिन्दू-मुसलमान का है।
मुसलमान हिंदुओं को कुछ करने नहीं देते तो हिन्दू मुसलमान को कुछ नहीं करने देते। बचे हुए लोग मंदिर-मस्जिद के झगड़े में लगे हैं तो कुछ गाय गोबर करने में व्यस्त हैं।

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बस यही मुद्दे इस देश में बचे हैं और अगर इस बीच बेचारा कोई आम आदमी इन सबसे परेशान होकर इन मुद्दों पर जरा टिप्पणी कर दे तो फिर क्या? फिर वो देशद्रोही, गद्दार, पाकिस्तानी न जाने क्या-क्या हो जाता है। और टिप्पणी करने वाला अगर गलती से मुसलमान निकल आये तो वो पक्का गद्दार, पाकिस्तानी ही होगा। और हिन्दू हुआ तो वामपंथी आतंकवादी।

जी हां आज यही परिभाषाएं गढ़ी जा रही हैं। और इन सब में भरपूर साथ मिल रहा है हमारी कथित राष्ट्र्वादी सरकार का।
सरकार को आलोचना पसंद नहीं है और जिसे अपनी आलोचना पसंद नहीं होती वो अपनी एक ऐसी सेना बना लेता है जो आलोचकों के मुंह बंद कर सके। आलोचकों का मुंह तभी बन्द हो सकता है जब कुतर्की अपने कुतर्कों से उसका जीना हराम न कर दें।

जी हाँ, आज के समय का यही कटु सत्य है। हमारी सरकार को अपनी आलोचना पसंद नहीं है। क्योंकि हम अमेरिका नहीं हैं जहां पर लोगों के पास दिमाग है। वहां के लोग मीडिया के साथ मिलकर सरकार की आलोचना ही नहीं करते बल्कि अपने हक के लिए सरकार से दो-दो हाथ करने के लिए तैयार हो जाते हैं।

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अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों लिखा जा रहा है अब ऐसा क्या हुआ? क्योंकि ख़बर 24 एक्सप्रेस गलत को गलत और सही को सही कहने की हिम्मत रखता है। इसके पत्रकार भी यही हौसला और जज्बा रखते हैं।
सरकार कोई भी रही हो। 2011 से हम यही काम कर रहे हैं।

बॉलीवुड के मशहूर फिल्म अभिनेता ने एक मुद्दा क्या उठाया लोगों ने उनका जीना हराम कर दिया। मुद्दा भी ऐसा जो सरकार की आलोचना करता हो। वैसे इसी मुद्दे पर मैं अपनी बेबाक राय रख चुका हूँ और इस मुद्दे पर 2 लेख भी लिख चुका हूँ, उन लेखों में बहुत सारे तथ्य भी मौजूद हैं।

अब बात आती है कि मुद्दा आखिर है क्या और नसरुद्दीन शाह ने ऐसा क्या कह दिया कि हंगामा बरप गया?
मुद्दा है मॉब लिंचिंग, भीड़ तंत्र, भीड़ के हाथों लोकतंत्र की हत्या, और इस हत्या में सरकार का भरपूर सहयोग।
इसी को लेकर फ़िल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने भीड़ तंत्र पर एक कड़क टिप्पणी क्या कर दी वो गद्दार हो गए।
नसरुद्दीन शाह ने केवल इतना कहा कि कई जगहों पर पुलिस अफसर से ज्यादा गाय की हत्या को महत्व दिया जा रहा है। शाह ने अपने बेटे की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि पूरे देश में जहर फैल चुका है, इस जिन्न को बोतल में बंद करना मुश्किल होगा। कुछ लोगों को कानून अपने हाथों में लेने की खुली छूट मिल गई है।

शाह ने एक इंटरव्यू में कहा, “मुझे मजहबी तालीम मिली थी। लेकिन रत्ना (पत्नी) को नहीं। वे लिबरल परिवार से आती हैं। मैंने अपने बच्चों को मजहबी तालीम नहीं दी, क्योंकि मेरा ये मानना है कि अच्छाई और बुराई का मजहब से कुछ लेना-देना नहीं। मुझे फिक्र होती है कि अपने बच्चों के बारे में कि कल को उनको अगर भीड़ ने घेर लिया कि तुम हिंदू हो या मुसलमान, तो उनके पास तो कोई जवाब ही नहीं होगा।”

उन्होंने कहा, “मुझे इस बात की फिक्र होती है कि हालात जल्दी सुधरते नजर नहीं आ रहे। इन बातों से मुझे डर नहीं लगता, गुस्सा आता है। ये गुस्सा हर सही सोचने वाले इंसान को आना चाहिए। ये हमारा घर है, हमें यहां से कौन निकाल सकता है।”

उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर में 3 दिसंबर को गोकशी के शक में हिंसा हुई थी। इस दौरान भीड़ ने पुलिस टीम पर भी हमला किया था। हमले में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की मौत हो गई थी। भीड़ ने उनके साथ जबरदस्त बदसलूकी की इसके बाद गोली मार कर हत्या कर दी थी। और यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था। और एक छोटा सा शांत शहर पूरे देश में बदनाम हो गया था।


मनीष कुमार
Editor-in-Chief
Khabar 24 Express
+91-9654969006


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