
“जिसे आप ‘संयोग’ कहते हैं, वो दरअसल ‘ईश्वर की योजना’ होती है।”
जब ईश्वर देने पर आता है, तो न वह सीमा देखता है, न हालात। वह छप्पड़ फाड़कर देता है। कई बार ऐसा होता है कि हम अपनी मेहनत में लगे रहते हैं, मगर परिणाम देर से आता है। हम सोचते हैं कि कोई सुन नहीं रहा, कोई देख नहीं रहा। लेकिन सच्चाई यह है कि ईश्वर सब देख रहा होता है, और सही समय पर वह आपकी मदद के लिए किसी को भेज देता है।
ईश्वर खुद तो सामने आकर सहायता नहीं करते, लेकिन वो आपके जीवन में कुछ लोगों को एक माध्यम बना देते हैं। वो ऐसे इंसानों को भेजते हैं, जो आपकी मुश्किलों को आसान बना देते हैं। लेकिन उसी समय एक और सत्य सामने आता है — कुछ लोग थोड़ा सा पाकर खुद को सर्वश्रेष्ठ समझने लगते हैं।
उनके शब्दों में विनम्रता खत्म हो जाती है, व्यवहार में बदलाव आ जाता है। उन्हें लगता है कि जो मिला, वो सिर्फ उनकी मेहनत का नतीजा है, जबकि सच्चाई यह होती है कि उन्हें जो मिला है, उसमें कई और लोगों की मेहनत, दुआएं और ईश्वर की कृपा भी शामिल होती है।
“घमंड वहीं शुरू होता है, जहां इंसान यह मान लेता है कि उसका होना ही सबकुछ है, और वह ईश्वर से ऊपर है।“
“ईश्वर के आगे किसी का घमंड नहीं चलता”—हमें यही सिखाता है कि इंसान को जितना भी मिले, उसे विनम्र रहना चाहिए। हर मोड पर उसका धन्यवाद करो ईश्वर ने जिसे तुम्हारे लिए चुना, जरिया बनाया। दुकान चलाने वाला ग्राहक को भगवान इसीलिए मानता है क्योंकि ईश्वर उन्हें जरिया बनाकर भेज रहा है तभी तो उसका कारोबार चल रहा है। अगर वही कारोबारी जब विनम्रता भूल जाता है, ईश्वर के भेजे गए मददगारों का जब वो अपमान करता है या वो उनका निरादर करता है तो ऐसे इंसान अर्श से फर्श पर आ जाते हैं और फिर वे दुबारा ईश्वर को ही दोषी ठहरा देते हैं।
सबसे बड़ी बात ये है:
ईश्वर जरिया उन्हीं लोगों को बनाते हैं जो दूसरों की मदद करने के लिए मेहनत और नीयत दोनों साथ लेकर चलते हैं।
जो व्यक्ति घमंड करता है, असल में वह ईश्वर के द्वारा दी गई भूमिका को समझ ही नहीं पाता। वह यह भूल जाता है कि अगर वो किसी की मदद कर रहा है, तो यह भी भगवान की ही योजना है। अगर भगवान चाहते, तो मदद का जरिया कोई और होता।
इसलिए जरूरी है कि –
- जब आपको कुछ मिले तो धन्यवाद कहें, घमंड न करें।
- जब आप किसी की मदद करें, तो खुद को भगवान न समझें।
- और जब जीवन कठिन लगे, तो ईश्वर पर भरोसा रखें — वो जरिया जरूर भेजेगा।
- जीवन में किसी का अपमान न करें।
- दूसरों के बढ़ते कद, दूसरों की कमाई और उनके ऐशो आराम से चिढ़े नहीं।
- सभी लोग मेहनत से पैसा कमाते हैं, किसी की धन दौलत को देखकर ईश्वर को न कोसें, बस ये सोचे कि इसके पीछे उसकी कितनी मेहनत है।
- सफलता उन्हें ही मिलती है जो खुद की इज्जत करते हैं, साथ ही दूसरों को भी सम्मान देते हैं।
- आपको स्वयं की बढ़ाई आपको 10 कदम पीछे धकेल देती है। आप स्वयं कुछ भी नहीं है क्योंकि आप अपनी बढ़ाई करते करते सिर्फ थोड़े में सीमित हो जाते हैं जबकि आपके समान काम करने वाले आगे बढ़ जाते हैं।
अंत में एक सीख:

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