
मुंबई : महाराष्ट्र की सियासत में एक साधारण कार्यकर्ता से प्रदेशाध्यक्ष पद तक का सफर तय करना कोई आसान काम नहीं। लेकिन चंद्रशेखर बावनकुले ने यह कर दिखाया। भारतीय जनता पार्टी के विचारों को अपने जीवन का संकल्प बनाकर उन्होंने पार्टी के लिए तीन दशकों तक अथक परिश्रम किया और आज जब वे प्रदेशाध्यक्ष के कार्यकाल को अलविदा कह रहे हैं, तो उनके इस सफर की हर बात कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
साधारण कार्यकर्ता से प्रदेशाध्यक्ष तक का संघर्ष
करीब 35 साल पहले एक आम नागरिक के रूप में, बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के, बावनकुले ने सामाजिक समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाने से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। दीवारों पर नारे लिखना, पर्चे बांटना, गांव-गांव साइकिल से, मोटरसाइकिल से, या पैदल यात्रा करके भाजपा की नीतियों का प्रचार करना… यह उनका रोजमर्रा का काम बन गया। तब शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन वे महाराष्ट्र भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष बनेंगे।

2022 में मिली सबसे बड़ी जिम्मेदारी
12 अगस्त 2022 का दिन उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ लेकर आया, जब उन्हें भाजपा महाराष्ट्र का प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त किया गया। यह सिर्फ एक पद नहीं था, बल्कि उन हजारों कार्यकर्ताओं के सपनों और संघर्षों की जिम्मेदारी थी, जो दशकों से पार्टी को मजबूत बनाने में जुटे थे। उत्तमराव पाटिल, गोपीनाथ मुंडे, नितिन गडकरी, देवेंद्र फडणवीस और सुधीर मुनगंटीवार जैसे दिग्गज नेताओं के बाद इस पद की बागडोर संभालना खुद में एक चुनौती थी। लेकिन बावनकुले ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। बता दें कि चंद्रशेखर बावनकुले ने महाराष्ट्र में भाजपा के लिए वो कर दिखाया जो पार्टी के लिए एक सपना जैसा था। लेकिन बावनकुले ने अपनी अथक मेहनत ईमानदारी के बल पर पार्टी को ऐतिहासिक जीत का मुंह दिखाने में बड़ा अहम रोल निभाया।
मीडिया भी इसका गवाह बनी जब चंद्रशेखर बावनकुले सुबह 6 बजे उठकर अपने चुनावी अभियान के लिए निकलते थे। और देर रात अपने घर वापस लौटते थे। ये सफर उन्होंने बिना थके, बिना रुके पूरा किया।
राज्य के कोने-कोने तक पहुंचा संदेश
अपने कार्यकाल में उन्होंने महाराष्ट्र के हर जिले, हर तहसील, हर गांव तक पहुंचने का प्रयास किया। चांदा से लेकर बांदा तक, उन्होंने पार्टी के सामान्य कार्यकर्ता से लेकर वरिष्ठ नेताओं तक, सभी के बीच तालमेल बैठाने का काम किया। उन्होंने संगठन पर्व के माध्यम से पार्टी की सदस्यता बढ़ाने का लक्ष्य रखा और भाजपा को महाराष्ट्र में सबसे बड़ा राजनीतिक दल बना दिया, जिसकी सदस्य संख्या आज डेढ़ करोड़ से भी ज्यादा है।

चुनौतियों भरा रहा अध्यक्षीय कार्यकाल
उनके कार्यकाल के दौरान दो बड़े चुनावी पड़ाव आए। लोकसभा चुनाव में मिली हार ने जरूर निराशा दी, लेकिन उन्होंने हार मानने की बजाय आत्ममंथन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में उन्होंने रणनीति बदली और विधानसभा चुनाव में भाजपा- महायुती को ऐतिहासिक जीत दिलाई। इस जीत के साथ भाजपा एक बार फिर महाराष्ट्र में सत्ता में लौट आई।
संघर्ष, सफलता और आत्ममंथन की कहानी
बावनकुले का यह कार्यकाल केवल जीत-हार की कहानी नहीं था। यह एक ऐसे नेता की यात्रा थी जिसने हर परिस्थिति में कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखा। अपने संबोधन में उन्होंने खुद स्वीकार किया कि कार्यकाल के दौरान उनसे यदि कोई गलती हुई हो, तो वे उसके लिए सभी कार्यकर्ताओं से क्षमा चाहते हैं। यह उनके विनम्र स्वभाव और कार्यकर्ताओं के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
अब राजस्व मंत्री के रूप में नई जिम्मेदारी
कार्यकर्ताओं के लिए एक प्रेरणा
“राष्ट्र प्रथम, फिर पार्टी और अंत में स्वयं” – इसी मूलमंत्र के साथ चंद्रशेखर बावनकुले ने तीन दशकों तक निस्वार्थ भाव से पार्टी के लिए काम किया। आज उनका सफर हर छोटे से छोटे कार्यकर्ता के लिए यह विश्वास देता है कि मेहनत, ईमानदारी और समर्पण से कुछ भी असंभव नहीं।
आर्टिकल : मनीष कुमार अंकुर, एसोसिएट एडिटर, खबर 24 एक्सप्रेस
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