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जब औरत आदमी को मारती है तो सनसनीखेज खबर बनती है लेकिन महिलाएं जो सदियों से सहती आ रही हैं?

कासगंज (यूपी): वो औरत भी किसी की बेटी थी। किसी की बहन थी। फिर एक दिन वो पत्नी बनी। उम्मीदों के साथ, भरोसे के साथ, उसने एक घर बसाया — लेकिन बदले में क्या मिला?

अपमान, पीड़ा, गालियां, और अंत में — खामोशी।

ये कहानी सिर्फ कासगंज की नहीं है।
ये कहानी हर उस स्त्री की है जो रोज़ मरी जाती है…
पर उसकी मौत कभी ब्रेकिंग न्यूज नहीं बनती।
ना कोई डिबेट, ना कोई TRP, ना कोई न्याय की गुहार… क्योंकि वो औरत है, वो औरत जो सदियों से अत्याचार सहती आ रही है। वो औरत जिसे सिर्फ बच्चा पैदा करने वाली, मर्दों की भूख मिटाने वाली, घर की साफ सफाई करने वाली, घर की देखभाल करने वाली माना जाता है। कभी कभी तो उसे अपने ही ससुराल में नौकरानी से बद्तर माना जाता है। वो औरत जो अपना पेट काटकर अपने बच्चों का पेट भरती है। अपनी खुशियों की परवाह किए बिना अपने पति की खुशी के लिए वो सब कुछ करती है। वो न खाना देखती है और न ऐशो आराम। वो सिर्फ अपने परिवार की खुशी देखती है। और बदले में उसे क्या मिलता है? पति की मार, सास के ताने, नंद की गालियां और ससुर की डांट। इतना सब कुछ सकते हुए भी वो उफ्फ नहीं करती है।


“सुर्खियों में मर्द की मौत, महिलाओं के ऊपर सदियों से हो रहे अत्याचार पर सन्नाटा…”

जब कोई महिला गलती करती है — तो मीडिया जग जाता है।
“Exclusive”, “Double Murder”, “Crime Patrol” जैसी हेडलाइंस बनती हैं।

लेकिन जब वही औरत सालों तक मानसिक प्रताड़ना झेलते हुए… अपनी बेटी के लिए चुपचाप सब सहती है… तो उसकी आवाज़ बस एक लाइन में दबा दी जाती हैं।

ऐसी कितनी महिलाएं हैं जिन्हें दहेज के लिए मार दिया गया हो, या पति का दूसरा अफेयर चल रहा हो इसके लिए उसे रस्ते से हटा दिया गया हो, खाना समय पर नहीं मिला तो मार, कर सी आवाज निकाली तो मार…. लेकिन कोई आवाज नहीं।


कासगंज की वो औरत — जो अब बस जी रही है, मरने के इंतज़ार में…

आज एक ऐसी ही कहानी हमारे पास है। जो सच्ची है बस नाम नहीं है क्योंकि वो नहीं चाहती कि उसका घर बिगड़े, उसके पति की इज्जत उछले।

कभी वो कॉलेज जाती थी। सपने देखती थी।
फिर शादी हुई। रिश्तों के लिए, समाज के लिए सब कुछ छोड़ दिया।

लेकिन पति ने क्या किया? पति अपनी भाभी के चक्कर में महिला पर अत्याचार करने लगा। पत्नी पर पैसे का दबाव डालता। उसकी बड़ी भाभी जो मां समान होती है वो उसी के साथ रंगरेलियां मानता। पत्नी विरोध करती तो वो उस पर हाथ उठाया जाता।

अपने नाजायज संबंधों की वजह से उसे न तो अपनी पत्नी दिखाई दे रही है और न ही अपनी मासूम बेटी।

पत्नी के पास जो कुछ था वो सब पति ने हड़प लिया। महिला के न पिता हैं और न ही मां.. उसके पति को पता है कि मां बाप के बाद बेटी का कोई नहीं होता। जबतक मां बाप हैं तबतक भाई भी मजबूरन बहन को देखते हैं, मां बाप के जाते ही बहन की खोज खबर भी नहीं लेते। पति ने महिला के…

👉 सारे गहने बेच दिए
👉 कार बेच दी, बैंक अकाउंट खाली कर दिया
👉 अब सोशल मीडिया पर पत्नी की तस्वीरें, नंबर और चरित्र पर हमला किया जा रहा है।

उसे बदनाम करो, तोड़ो, डराओ — ताकि वो खुद ही मर जाए… या तलाक मिल जाए।

वहीं बता दें कि पति, ननद, सास और जेठानी द्वारा महिला को इस इतना मानसिक आघात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि महिला परेशान होकर आत्महत्या जैसा क़दम उठा ले। पति ने तो वाकायदा अपनी पत्नी का नंबर और फेसबुक अकाउंट तक सोशल मीडिया में शेयर कर दिया है ताकि लोग भी पत्नी को परेशान करें।

वहीं पति अपनी गलतियों को छिपाने के लिए खुद सोशल मीडिया में अपनी पत्नी के खिलाफ लिखकर बेचारा बनने की कोशिश कर रहा है। जबकि सच्चाई बिल्कुल उलट है।

इस बीच वो महिला — अपनी छोटी बच्ची का हाथ थामे —दर-दर भटकती है, न घर, न खाना, न इंसाफ़।


और वो मासूम बच्ची…?

उसका कसूर सिर्फ इतना है — वो उस औरत की बेटी है जो अत्याचार का शिकार हुई।

ना स्कूल, ना खाना, ना कोई सुरक्षा.. मां की सिसकियों में वो हर दिन टूट रही है।


समाज का सन्नाटा — सबसे बड़ा अपराध

हमारी संवेदनाएं तब जागती हैं जब TRP मिलती है। जब मर्द मरे तो — देश हिलता है। लेकिन जब एक औरत अपनी आत्मा रोज़ मरते देखती है — तो हम कहते हैं — “घरेलू मामला होगा…”


अब चुप रहना गुनाह है…

👉 मानसिक प्रताड़ना भी अपराध है
👉 साइबर बुलीइंग और चरित्र हनन पर सख्त कानून ज़रूरी हैं
👉 महिलाओं के लिए मानसिक, भावनात्मक और कानूनी सुरक्षा ढांचा मजबूत करना समय की ज़रूरत है


एक सवाल… जो हर पाठक से है

अगर ये दर्द आपकी बहन, बेटी या माँ का होता — क्या आप भी ऐसे ही चुप रहते…?


ये सिर्फ एक खबर नहीं… ये एक चेतावनी है —

अगर आज भी हम नहीं जागे, तो कल किसी और की बहन बस “एक लाइन की खबर” बन जाएगी।


रिपोर्ट: खबर 24 एक्सप्रेस टीम, कासगंज से



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