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अबतक की सबसे बड़ी खबर, प्रियंका के सामने फीका पड़ा मोदी का जादू, भाजपा में चिंतन, मोदी नहीं बल्कि ये हो सकते हैं भाजपा का अगला चेहरा

देश की राजनीति से एक बड़ी तूफानी खबर आ रही है। खबर है कि मोदी का जादू फीका पड़ रहा है। उनकी रैलियों से भीड़ भी नदारद है। इन सबकी वजह है, भाजपा आईटी सेल और भाजपा के खुद के नेता।

सोशल मीडिया में मोदी सपोर्टर्स की अभद्रता, जिन्हें आज मोदी भक्त कहा जा रहा है, जैसे ही मोदी विरोध में कोई ख़बर चलती है भाजपा आईटी सेल सक्रिय हो जाता है और उसके बाद शुरू हो जाता है ज़ाहिलता और गंदगी भरा खेल।

वहीं भाजपा नेता भी किसी आईटी सेल से कम नहीं हैं बल्कि वे भी आजकल बढ़ चढ़कर, ऊल जलूल बयान दे रहे हैं, जैसे गिरिराज सिंह का हालिया बयान, उन्होंने कहा था कि “जो मोदी की रैली में नहीं जाता वो देशद्रोही है।” मतलब नेता इतने गिर सकते हैं शायद ये किसी ने भी नहीं सोचा होगा।

यह भी एक बड़ा कारण है कि लोग भाजपा से दूरी बना रहे हैं। इतना ही नहीं लोग अब मोदी की रैली में जाने से कतरा रहे हैं। यहां तक कहा जा रहा है कि पीएम मोदी की रैलियों में भीड़ को पैसों का, खाने का, दारू इत्यादि का लालच दिया जा रहा है। तब कहीं जाकर लोग भीड़ का हिस्सा बन रहे हैं।

दूसरी ओर कांग्रेस की महासचिव बनी प्रियंका गांधी भी एक वजह बन रही हैं। प्रियंका गांधी जब से कांग्रेस की महासचिव बनी हैं तब से पार्टी में नई जा सी आ गयी है। अभी 3 दिन पहले कांग्रेस की गांधीनगर में महारैली थी। गांधीनगर क्या गुजरात को मोदी का गढ़ माना जाता है लेकिन मोदी के गढ़ में प्रियंका की ललकार सुनने देखने लायक थी। जिस तरह भीड़ वहां पर इकठ्ठा थी वो भाड़े की नहीं लग रही थी। भीड़ रैली के अंत तक डटी रही।

प्रियंका गांधी भीड़ जुटाने में तो सक्षम दिख ही रही हैं वहीं कांग्रेस का आत्मविश्वास वापस आना भी बड़ी वजह है। अकेले पंजाब के दम पर भाजपा से लड़ रही कांग्रेस को नई जान दी छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्यप्रदेश ने…. इसके अलावा देशभर में उपचुनाव भी कांग्रेस के लिए संजीवनी बनकर आये।

अब बात करते हैं भाजपा की… तो भाजपा को कहीं न कहीं बड़ा नुकसान होता दिख रहा है। नोटबंदी, जीएसटी, महँगाई, बेरोजगारी, राफेल, बैंकिंग जैसे घोटाले और इन सबसे ऊपर मोदी समेत भाजपा नेताओं, मंत्रियों के बयान…. भाजपा की मुसीबत का कारण बन गए हैं। न्यूज़ टीवी चैनल के सर्वे में भी सामने आया कि मोदी का जनाधार घटेगा….।
मीडिया का एक तरफा हो जाना भी एक बड़ा कारण बन गया है। न्यूज़ टीवी चैनल्स पर रोजाना की पेड डिबेट, एक तरफा खबरें… मीडिया की बदनामी तो करा ही रहा है, लोगों के मन से अपनी विश्वसनीयता पर भी घटा रहा है।

खैर देश में 2019 लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। चुनावों की तारिखों का ऐलान हो चुका है।
भले चुनाव को लेकर बीजेपी वापसी करने का जोरदार दावा कर रही हो लेकिन बीजेपी के बड़े नेता भी जानते हैं कि पार्टी को बड़ा नुकसान हो रहा है। वे भलीभांति जान रहे हैं कि 2014 की तरह वापसी तो नहीं कर पाएंगे।

तो वहीं कांग्रेस सत्ता में आने का सपना सजोये हुए है। कांग्रेस का कहना है कि वो नरेंद्र मोदी सरकार को उखाड़ फेंकेगी और 5 साल बाद फिर से सत्ता में वापसी करेगी। लेकिन सर्वे और आंकड़ों के हिसाब से कांग्रेस का सपना …. सपना ही नज़र आ रहा है।

सर्वे और राजनीतिज्ञों के हिसाब से बीजेपी किसी तरह सत्ता में वापसी तो कर लेगी, लेकिन 23 मई के परिणाम के बाद गठबंधन की मजबूरियों के चलते नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री पद से छुट्टी हो जाएगी। इसके बाद केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हो सकते हैं।
हो सकता है कि 2019 में मोदी ही प्रधानमंत्री बनें, लेकिन गठबंधन की खींचतान मोदी को ज्यादा नहीं झेल पायेगा। और इसके बाद भाजपा उन्हें बदलने पर विचार कर सकती है, नितिन गडकरी को प्रधानमंत्री का चेहरा बना सकती है। नितिन गडकरी का नाम इसलिए क्योंकि मोदी के बाद गडकरी से बड़ा चेहरा भाजपा के पास नहीं है।

बता दें कि पिछले दिनों कुछ निजी सर्वेक्षणों में भी दावा किया गया था की 2019 में बीजेपी का जनाधार खिसक रहा है। इसका ज्यादा फायदा कांग्रेस को तो नहीं मिल पायेगा बस कांग्रेस की सीट बढ़ सकती हैं और यह कह सकते हैं कि विपक्ष मजबूत हो जाएगा।

बाकी ये सब हमारे आंकलन हैं। लोगों, पक्ष और विपक्ष के नेताओं से बातचीत के आधार पर हैं। ये गलत सही भी हो सकते हैं।
देश की जनता, वोटर सबसे ज्यादा समझदार हैं। वे जो फैसला करते हैं वह सभी को मान्य होता आया है।
ये वही जनता है जिसने कांग्रेस को भी खूब मौके दिये तो वहीं एक मुख्यमंत्री पर भरोसा कर दिल्ली की गद्दी पर आसीन करवाया।
जनता माईबाप है। वो गली के गुंडे को भी नेता बना देती है। अपराधी को विधायक, सांसद, मंत्री बना अपने सर पर बिठा लेती है। जनता है सब जानती है। ये वही करती है जो उसे अच्छा लगता है भले परिणाम कुछ भी हो, कैसा भी हो।

भारत में गरीबी और भुखमरी आलम भी देखिए 100 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक वोटों का मोल लगाया जाता है। शराब, कबाब, शबाब भी वोट दिला देता है, यहां पैसे के बल पर लोकतंत्र खरीदा जाता है।

हो सकता है बहुत सारे लोग मेरे शब्दों से इत्तेफाक़ न रखें, कुछ लोग मुझे गालियां दें। लेकिन सच्चाई यही है। इस तरह के साफ आरोप लगते भी आये हैं और साबित भी हुए हैं। नेता चुनावों में पैसे बांटते हैं, चुनावों के दौरान कितनी बार करोड़ों रुपये पकड़े जाते हैं। पैसे बांटने में नेताओं, पार्टियों का नाम खुलेआम सामने आता रहा है लेकिन बावजूद इसके न तो उनकी सदस्यता जाती है, न ही वो गिरफ्तार होते हैं।
देश है, चल रहा है, छल रहा है, जनता सब जानती है। जनता ही माईबाप है।
लेकिन इस बार आपसे अपील करना चाहूंगा कि आप जिसको भी वोट दें पहले सोच समझ लें कि आपका एक वोट आपका ही नहीं बल्कि देश का भी भविष्य तय करता है। कृपया अपने बच्चों और देश के भविष्य को ध्यान में रखकर वोट करें। नेता की भक्ति देश बर्बाद करती है। देश की भक्ति देश बनाती है, सच्ची देशभक्ति कहलाती है। देशभक्त बनिये, नेता भक्त नहीं।
वोट जुमलों पर नहीं बल्कि हकीक़त के आधार पर करिये, लेकिन वोट जरूर करिये।

………………..

मनीष कुमार “अंकुर”
+919654969006

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