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8 मार्च, महिला दिवस पर विशेष, सद्गुरू स्वामी श्री सत्येन्द्र जी महाराज के अनमोल वचन व महिलाओं को समर्पित उनकी कविता

8 मार्च विश्व महिला दिवस पर सत्यास्मि मिशन की और से स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी का अपनी दूसरी लिखी इस कविता के माध्यम से नारी के आत्मसम्मान की सभी और व्रद्धि करने और कराने में सभी पुरुषों का कितना सहयोग रहा और है?,ये इस कविता में उद्धभाषित संदेश है-नारी आंदोलन की प्राचीनता का…

जब जब धर्म की हानि हुयी है
तब तब लिए पुरुष धर्म अवतार।
देव दैत्य मनुष्य युद्ध में
नारी विधवा हुयी नर संहार।।
नर मरे नारी विधवा हुयी
चाहे कोई युग हो अवतार।
राम राज्य में लंका हुयी विधवा
कृष्ण युग में भील ले गए नार।।
सीता झुब्ध यूँ ही है जंगल
यही पीड़ा उकेरी लव कुश प्रसंग।
सभी पुरुषों के दम्भ मिटाने
सीता का नर विरुद्ध नर संग।।
इन अत्याचार नारी संग चलते
सीता नही अयोध्या आयी।
श्री बिन सदा अयोध्या नगरी
शाप दे सीता माँ धरा समायी।।
कृष्ण अर्जुन अहं प्रसंगिक चलते
लाखों नारी ले गए भील।
उन्हीं से उपजा आज का भारत
उज्जड गंवार भील हरी नारी की शील।।
अरे गर्वित किस जाति पर करते
पुरखे कौन और कौन का वंश।
झिंझोर कर रख देगा ये चिंतन
उस कलिक काल से नारी पीड़ित दंश।।
नारी उत्पीड़न छिपा दिया है
पुरुष युद्ध विजय अवतार।
उल्लेख तक नही किया है इसका
क्या किया हुआ नारी उद्धार।।
और अब भी घोषित करते अवतारा
कल्कि ही करेगा नारी उद्धार।
पुरुष अहं कितना और बढ़ेगा
नारी पर नर का कितना उधार।।
प्राचीन ग्रीस में लिसिसट्राटा नारी
किया प्रथम युद्ध विरोधी आंदोलन फ़्रांस क्रांति।
फ़ारसी महिलाओं ने वरसेल्स में
अनावश्यक युद्ध मोर्चा निकाला शांति।।
प्रथम द्धितीय विश्वयुद्ध की
नारी का वेधव्य अंध विभीषिका।
नर जल मर जाता अपने निज अहं में
छोड़ जाता जलती नारी दग्धिषिका।।
और थोपता यही कह कह कर
नारी ही इन युद्धों का कारण।
नारी सम्मान का मैं तो रक्षक
नारी ना होती क्यों युद्ध अकारण।।
नर का प्रेम भी नारी को लेकर
निज भरा पुरुषत्त्व अहंकार।
नारी को समझे वृक्ष फल भांति
जिसे तोड़ गिरा प्रेम नाम उपकार।।
हे-नर अब बंद कर अपना
ये पुरुष पुरुष का अहं घोष।
नारी ने ही जन्मा है तू
नारी को ही देता तू दोष।।
नर तू केवल बीज मात्र है
जिसे ले चैतन्य करती मैं नारी।
पालती पोषती गर्भ से धर्भ तक
तेरी समस्त स्वत्रंत्रता नारी आभारी।।
हमारी ही इच्छा से जन्मे
ले हमारा ही पुत्रवत् मोह।
हम ही मारे निज की नारी
पुत्री का कर कर विछोह।।
अब यही बदलेंगी अपने ज्ञान को
और अपने को जनेंगी निज आत्मदेह।
अपना करेंगी कुंडलिनी जागरण
कर अपने श्रीभग ध्यान विदेह।।
तभी आएगा स्वर्ण युग नारी
और जिसमे होगा नारी सम्मान।
हम इच्छित होगा प्रेमज्ञान भी
संतुलित दिव्य प्रेम रास प्रतिभान।।
आओ नारी करें षोढ़षी कला जागरण
नारी को दे नारित्त्व पूर्णिमाँ ज्ञान।
ध्यान करो स्वयं में स्वयं का
पुत्र पुत्री गुनो नारी पूर्णिमाँ भगवान।।

जय स्त्री महाशक्ति महावतार पूर्णिमाँ
स्वामी सत्येंद्र “सत्य साहिब जी
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
www.satyasmeemission.org


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