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कब होगी आपकी शादी? क्यों हो रही है देरी? क्या है अड़चन? ज्योतिष से संबंधित इस विषय को बता रहे हैं श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

शादी में अड़चन? शादी में देरी? हाँ? तो फिर चिंता मत कीजिये, अब न आपकी शादी में अड़चन आएगी न होगी देरी। क्योंकि ज्योतिष शास्त्र में इसका बड़ा जिक्र है। ज्योतिष शास्त्र में इसका उल्लेख मिलता है। इसी को लेकर स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज आज सभी कारण और विधान विस्तार से बता रहे हैं। जिसके बाद आपकी इससे संबंधित सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी।


कब होगी आपकी शादी, क्यों हो रही है इसमें देरी, जानिए क्या है इसके ज्योतिषीय कारण-इस विषय में अनेक ज्योतिष योगों के बारे विश्लेषण देते हुए बता रहें हैं-राजयोगी स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी…

अनेक बार लड़के हो या लड़कियां उन्हें देर से शादी होने के परिणामस्वरूप कई बार उपयुक्त जीवन साथी नहीं मिल पाता है,और साथ ही शादी में देर से मतलब उस समय से है जब की आप शादी करना चाहते हो और प्रयत्न के बाद भी विवाह योग नहीं बन पा रहा हो यानि कहीं कोई बात ही बन नहीं पा रही हो।ज्योतिष गणना भी आज के युग में बदलाव ले रही है,क्योकि पुराने समय में जब बाल विवाह होते थे, तब अट्ठारह से बीस की उम्र को भी समाज में बहुत अधिक आयु में विवाह होना माना जाता था।और अब वेसे ही विवाह आयु 26 से 28 और 30 तक पहुँचती जा रही है,यो आज विवाह के लिए योग का कोई मापदंड नहीं रह गया है।

वेसे आपकी जन्मकुंडली में सातवां घर ये बताता है कि आपकी शादी किस उम्र में होगी। शादी के लिए दिशा कौन सी उपयुक्त रहेगी, जहां आपके प्रयास और उस सम्बंधित उपाय करने पर जल्द ही शादी हो सके।और विशेषकर ये सातवां घर व्यक्ति के विवाह में आने वाली सभी प्रकार की बांधाएं,चाहे वो किसी पूर्व जन्म का शाप हो या वो किसी का तंत्र मंत्र या जादू जैसी बुरी शक्तियों के विवाह बन्धन किया या कराया हो,उसे और उसका निवारण भी बताता है।यो सावधानी से अपने सातवें घर का अध्ययन करें।

वैसे विवाह के लिए शुक्र, बुध, गुरु और चन्द्र यह सब शुभ ग्रह हैं। इनमें से कोई एक ग्रह यदि शुभ होकर आपकी जन्मकुंडली के सातवें घर में बैठा हो तो शादी में आने वाली रुकावटें अपने आप ही समाप्त हो जाती हैं। ऐसे जातक को विवाह के लिए अधिक इंतजार नहीं करना पड़ता है। परन्तु यदि इन ग्रहों के साथ यदि कोई अन्य विरोधी या क्रूर ग्रह भी हो तो जातक की शादी में व्यवधान अवश्य आता है। राहू, मंगल, शनि, सूर्य यह सब विवाह सम्बंधित फल देने को क्रूर यानि अशुभ ग्रह हैं। इनका सातवें घर से किसी भी प्रकार का सीधा या द्रष्टि संबंध हो, तो शादी या दाम्पत्य के लिए शुभ यानि अनुकूल नहीं होगा।ये ही ग्रह और इनका योग बताएगा की किस कारण विवाह नहीं हो पा रहा है।यानि आपकी जीवन साथी से विवाह और पार्टनरशिप क्यों नही सफल हो रही है।

20 से 25 वर्ष की उम्र में शादी के योग:-

इस सम्बंध में बुध ग्रह शीघ ही शादी करवाता है। सातवें घर में शुभ यानि मित्र व् स्वराशि का बुध हो तो शादी जल्दी होने के योग होते हैं।तब बीस वर्ष की उम्र में शादी होती है। यदि बुध पर कोई किसी अन्य क्रूर ग्रह का प्रभाव न हो तो। बुध यदि सातवें घर में हो तो सूर्य भी एक स्थान पीछे या आगे होगा या फिर बुध के साथ सूर्य के होने की संभावना अधिक रहती है। सूर्य का बुध के साथ होने पर तो दो साल का विलम्ब शादी में अवश्य होगा। इस तरह 22 वर्ष की उम्र में शादी का योग बनता है। यदि सूर्य के अंश क्षीण या कम हों तो शादी केवल 20 से 21 वर्ष की आयु में हो जाती है।कहने का अर्थ यह है कि जब बुध सातवें घर में हो तब 20 से 25 की उम्र में शादी का प्रबल योग बनता है।
25 से 27 की उम्र में शादी के योग:-

यदि शुक्र, गुरु या चन्द्र की युक्ति यानि इनका योग आपकी कुंडली के सातवें घर में हैं तो जातक की 24- 25 की आयु में शादी होने की प्रबल संभावना रहती है।वेसे गुरु और शुक्र का यहां योग विवाह में अचानक किसी भी प्रकार का बदलाव या विवाह के बाद पति पत्नी के जीवन में बड़ा बदलाव लाता है।

यदि शुभ गुरु सातवें घर में हो तो शादी पच्चीस की उम्र में होती है। गुरु पर सूर्य या मंगल का साथ या द्रष्टि प्रभाव हो तो शादी में एक साल की देर तो पक्का समझें। राहू या शनि का प्रभाव हो तो दो साल की देर यानी 27 के प्रारम्भ या अंत के साल की आयु में शादी होती है।

यदि शुक्र ग्रह सातवें घर में हो तो 24 वे वर्ष में और शुक्र पर मंगल, सूर्य का प्रभाव हो तो शादी में दो साल की देर अवश्यम्भावी है।और रिश्ते में टूटन भी बनती है और शनि का प्रभाव होने पर एक साल यानी छब्बीस साल की उम्र में और वर वधु के आयु में बड़ा अंतर भी देखने में आता है,अब चाहे आयु छिपायी गयी हो और यदि राहू का प्रभाव शुक्र पर हो तो रिश्ता होकर शादी में दो साल की देरी होती है।ये प्रेम योग भंग होने के उपरांत और समझोते जेसी अनैच्छिक विवाह योग भी बनाता है।

यदि चन्द्र सातवें घर में हो 19 व 23 वे वर्ष में विवाह और उसमें स्त्री पक्ष की दखलन्दाजी अधिक बनती है और चन्द्र पर मंगल, सूर्य में से किसी एक का प्रभाव हो तो शादी 26 साल की उम्र में होने का प्रबल योग बनेगा। शनि का प्रभाव मंगल पर हो तो शादी में तीन साल का विलम्ब होता है। राहू का प्रभाव होने पर 27 या 29 वे वर्ष की उम्र में बहुत विघ्नों यानि टलते रहने जेसे योग के बाद संदेह स्थिति में शादी संपन्न होती है।

कुंडली के सातवें घर में यदि सूर्य हो और उस पर किसी अशुभ ग्रह का प्रभाव न हो तो 19 वे वर्ष में प्रेम योग बने और 27 वर्ष की उम्र में शादी का शुभ योग बनता है। शुभ ग्रह सूर्य के साथ हों तो विवाह के होने जल्दी योग बनता है।

28 से 32 वर्ष की उम्र में शादी के योग:-

मंगल, राहू केतु में से कोई भी एक ग्रह यदि सातवें घर में हो, तो शादी में बहुत देर अनेक विध्न बांधाओं से हो सकती है। जितने अशुभ ग्रह सातवें घर में होंगे शादी में देर भी उतनी ही अधिक और विघ्नों और तनाव के साथ होगी। मंगल सातवें घर में 27 या 28 वर्ष की उम्र से पहले शादी नहीं होने देता।तथा राहू ग्रह यहां होने पर आसानी से विवाह तो ही नहीं सकता।रिश्ता और विवाह की बात पक्की होने के बावजूद भी रिश्ते होकर टूट जाते हैं।यही केतु सातवें घर में होने पर अफवाहों के चलते यानि गुप्त शत्रुओं की वजह से शादी में अडचनें और देरी बढ़ती जाती है।

यदि शनि ग्रह सातवें हो तो विवाह बड़ी उम्र में लगभग 32 या 36 वे वर्ष में और बड़ी उम्र के जीवन साथी पर समझदार से और विश्वासपात्र से होता है। सातवें घर में शनि विवाह के लिए योगकारक होता है फिर भी शादी में बहुत देर ही होती है।उम्र पक जाती है।यदि शनि पर मंगल की दृष्टि हो तो विवाह समय या विवाह के बाद अवश्य विछोह योग और संघर्ष योग बनता है।

32 से 40 वर्ष की उम्र में शादी के योग:-

वेसे शादी में इतनी देर तब ही होती है जब एक से अधिक अशुभ ग्रहों का प्रभाव सातवें घर पर हो। शनि, मंगल या शनि राहू, मंगल राहू या शनि और सूर्य या सूर्य व मंगल, सूर्य व् राहू एक साथ सातवें या आठवें घर में हों तो विवाह में बहुत अधिक देरी होने की पूरी संभावना रहती है। वेसे तो इस सभी ग्रहों की राशि और उसके बलाबल पर भी बहुत कुछ भविष्य फल निर्भर करता है। परन्तु ऐसा कुछ भी हो,तब भी इन ग्रहों का सातवें घर में होने से शादी शीघ्र होने की कोई संभावना नहीं होती है।

यहां विवाह के योगों को बहुत मोटे तौर पर समझाने को मेने यो सब संछिप्त में ग्रह योग और फल कहे है।गुरु मंत्र जप और दान पूण्य आदि के प्रताप से इन सभी नियमों को शुद्ध किया जा सकता है।कर्म बलवान है।बस गुरु इष्ट शरण और उनके नियमों पर श्रद्धा करके बिना उनकी आज्ञा के बदलाव किये चलने से शीघ्र लाभ मिलता है।यो ये सर्वोत्तम उपाय है।

ये नीचे दिया विवाह महामंत्र विवाह में आने वाली सभी ग्रहों की अशुभ द्रष्टियों से आयी बांधाओँ को शीघ्र मिटा कर विवाह योग बना देता है,इसके करने यानि जपने में कोई नियम और शुद्धि अशुद्धि का बंधन नहीं है,बस चलते फिरते सोते कार्य समय इसे जपते रहें-

सर्व काले शुभम् करेषु,विवाह कारके आनंद रूपा।
सर्व विध्न नाशं चतुर्थ धर्म धारकं,श्री सत्य ॐ सिद्धायै नमः भूपा।।


स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
www.satyasmeemission.org

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