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Home / Breaking News / हस्तरेखा विज्ञान (भाग-12), हाथ की रेखाएं पढ़ने के सरल उपाय जाने, और जाने अपने भविष्य की महत्त्वपूर्ण जानकारियां, श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

हस्तरेखा विज्ञान (भाग-12), हाथ की रेखाएं पढ़ने के सरल उपाय जाने, और जाने अपने भविष्य की महत्त्वपूर्ण जानकारियां, श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

 

 

 

 

हस्तरेखा विज्ञान के बारहवें भाग में आज श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज से आप जानेंगे हाथ की रेखाओं को पढ़ने के सरल व आसान उपाय, जिससे कि आप अपने भविष्य के बारे में भी जान सकेंगे।

 

“स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज इस अद्भुत और अकल्पनीय ज्ञान के लिए किसी से कोई धन नहीं लेते हैं वे सिर्फ अज्ञानता को दूर कर ज्ञान को बांटने का काम करते हैं।
श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज, श्री सत्यसिद्ध शानिपीठ और सत्यस्मि मिशन के संस्थापक हैं। स्वामी जी गरीब बच्चों के लिए स्कूल खोल रहे हैं तो दूसरी ओर सत्यस्मि मिशन के माध्यम से महिलाओं के उत्थान का भी कार्य कर रहे हैं। संक्षिप्त में बताते हुए अगर कोई इन सबको आगे बढ़ाने में, पूण्य कार्य करने में सहयोग करना चाहता है तो आप भी स्वामी जी के आशीर्वाद से पुण्य के भागीदार बन सकते हैं। लेख के अंत में सभी जानकारियां हैं आप पढ़ें और दूसरों को भी पूण्य कमाने के लिए प्रोत्साहित करें”।

 

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हस्तरेखा विज्ञान (भाग-11), अगर आपके हाथ में चंद्र पर्वत है, तो जानिए उसके शुभ अशुभ लाभ, बता रहे हैं श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

हस्तरेखा विज्ञान (भाग-11), अगर आपके हाथ में चंद्र पर्वत है, तो जानिए उसके शुभ अशुभ लाभ, बता रहे हैं श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

 

 

तो आइए जानते हैं हस्तरेखा विज्ञान को समझने व पढ़ने के आसन उपाय : –

 

 

[भाग-12]

प्राचीनकाल से ही मनुष्य अद्रश्य के प्रति जागरूक रहा और उसी की खोज में उसने सबसे पहले अपने को देखा और परखा,जिसमें उसे अपने हाथ जो कर्म के प्रतीक और प्रतिनिधि है,उन्हीं को जांचना प्रारम्भ किया और पाया की-उनमें बहुत कुछ छिपा है और उस पर निरन्तर ध्यान देने से उसने मनुष्य के जीवन के सभी पहलुओं के ज्ञात और अज्ञात तथ्यों को इकट्ठा किया और उसका वहीं ज्ञान इकट्ठा होकर बना हस्तरेखा शास्त्र।यही हस्तरेखाओं का पढ़ना, जिसे हस्तरेखा विज्ञान अथवा सामुद्रिक शास्त्र भी कहते हैं, सारी दुनिया में विस्तार से प्रचलित है। इसका प्रारम्भ ऋषियों ने अपने शिष्यों के चरित्र का आंकलन और उसमें कैसे सुधार करें से हुआ और फिर उसमें उस शिष्य के वतर्मान आदतों को ध्यान में रखते हुए,उसे कुछ प्राकृतिक दिनचर्या के नियम बनाकर दिए और उससे उसके भविष्य के व्यवहारों में बड़ा भारी परिवर्तन पाया,यो ऋषियों ने माना और जाना की-व्यक्ति में सभी पूर्व कर्म से परिवतर्न हुए है।यो उसके कर्म करने की पद्धति को उसे समझा कर सहीकरने की दिशा में उसे सहयोग भी दिया जाये।तो इसका भविष्य भी कर्म से ही बदला जा सकता है।तभी गीता का मूल मंत्र-कर्म किये जा,भविष्य स्वयं तेरे हाथों में होगा।सत्य सिद्ध हुआ।

आओ हस्तरेखा के मूल सिद्धांतों को जाने:-

1-हस्तरेखाओं के अध्ययन से किसी व्यक्ति के चरित्र अथवा भविष्य का आकलन कैसे करें:-

आप चाहे ज्ञान बढ़ाने को हस्तरेखाएँ पढ़ने वाले हों, या केवल आनन्द से समय बिताने के लिए पढ़ने वाले हों या केवल मित्रों को प्रभावित करने के लिए पढ़ने वाले हों।तब आप अपना ओर किसी दूसरे का हाथ अपने हाथ में ले कर भविष्य अंतर्दृष्टि प्राप्त कर सकते हैं,उसकी विधि ऐसे है:-

विधि 1:-

पहले हाथ की प्रमुख रेखाओं को समझें:-
सबसे पहले अपने ही हाथ की छाप बनाये-कैसे बनाये जाने:-
इसके लिए पहले एक आवश्यक काम करें।क्योकि अपने हाथ को कबतक खोलकर पढ़ेंगे और किसी के हाथ को उसकी उँगलियों की और से पढ़ने में बड़ी परेशानी होगी,यो मेरे बताये तरीके से अपनी और अन्य हाथों की छाप इकट्ठी करें-
एक बड़े सफेद कागज को एक तरफ से कपूर को जलाकर उसके धुएं से पूरी तरहां से काला कर लें।अब उसे एक गद्देदार स्थान पर रखे और उसके ऊपर आराम से अपना उलटा हाथ को रख के धीरे से दबाये और उठा ले,तो आप देखेंगे की-आपके हाथ की छाप उस कागज पर स्पष्ट छप गयी है।और ऐसे ही एक और कागज तैयार करके उसपर अपने सीधे हाथ की छाप लें और उस छाप वाले कागज के उलटी यानि दूसरी तरफ से उसे नाखुनो की पालिश मिटाने वाली या मेथेलिक स्प्रिट को रुई में भिगो कर हल्का हलका घिस ले।इससे आपके हाथ की छाप,पक्की होकर आपके पास रखने लायक हो जायेगी।या फोटो स्टेट की मशीन पर अपने हाथ ढकवा कर रख,चित्र खिंचवा ले और उसका अध्ययन आसानी से बैठकर करें।ऐसे ही अनेक हाथ की छापे मेने भी तैयार करके सीखा था।अब उसे अपने सामने रख कर आराम से अध्ययन करते रहे।

हस्तरेखा में कहते है कि-
महिलाओं में उनका उल्टा हाथ वर्तमान और भविष्य का ज्ञान बताता है और सीधा उनके पति का होता है और
पुरुषों के लिए सीधा हाथ वर्तमान जन्म से भविष्य जन्म तक का फल बताता है।जबकि ये गलत है।बल्कि स्त्री हो या पुरुष हो,उसका उल्टा हाथ पूर्वजन्म से मिले कर्म और उसके वर्तमान जन्म को मिले कर्म फल को बताता है और सीधा वर्तमान से भविष्य के कर्म और उसके फल को बताता है।यो पहले उलटे हाथ का अध्ययन करें,फिर सीधे हाथ का अध्ययन करें।

प्रत्येक हाथ में 9 ग्रह के 9 पर्वत यानि स्थान क्षेत्र होते है और मुख्य 4 रेखा और 5 उपरेखाएं होती है।

2-हाथ में चार मुख्य रेखायें होती है और अन्य उपरेखाएं होती है:-

वेसे इन रेखाओं में छोटी छोटी रेखाओं से कटन या दरारें हो सकती हैं या वे छोटी हों, परंतु कम से कम उनमें से मुख्य तीन रेखा तो वहाँ होती ही हैं।जो इस प्रकार से है-
(1)हृदय रेखा
(2)मस्तिष्क रेखा
(3)जीवन रेखा
(4)भाग्य रेखा (ये केवल कुछ ही लोगों के हाथ में अच्छी और पूरी होती है)

3-हृदय रेखा का अध्ययन करें:- हस्तरेखा पठान की परम्पराओं के अनुसार, इस रेखा को किसी भी दिशा से पढ़ा जा सकता है,ये रेखा कंग की ऊँगली के नीचे से तर्जनी ऊँगली के नीचे तक होती है और इसे कनिष्ठिका से तर्जनी की ओर अथवा तर्जनी से कंग की ऊँगली की और के क्रम से।ये यह रेखा मनुष्य में प्रेम और भावनाओं में स्थिरता,व्यवहारिक दृष्टिकोण,हर्ष और विषाद एवं हृदय के विषय में अच्छे या बुरे स्वास्थ्य का ज्ञान देती है।ये यदि तर्जनी के नीचे से शुरू होती है तो – जीवन में प्रेम से संतुष्ट मिलती है।क्योकि प्रेम के व्यवहारिक पक्ष को समझते हुए,दूसरे को भी स्व्तंत्रता देते है।

मध्यमा के नीचे से शुरू होती है तो –ऐसे व्यक्ति प्रेम या सामाजिक या व्यवसायिक कार्य हो,उसके मामले में अपना लाभ पहले देखते है,यो स्वार्थी होता है।

पहली ऊँगली और मध्यमा ऊँगली के बीच में से शुरू होती है तो –ये व्यक्ति प्रेम के भूखे होने से, आसानी से प्रेम में पड़ जाते हैं।

ये सीधी और छोटी हो तो –ऐसे व्यक्ति को प्रेम और भावनात्मक रिश्तों में कम रुचि होती है।

यदि ये नीचे आकर या इससे कोई रेखा जीवन रेखा को छूती है –तो ऐसे व्यक्ति की सदा प्रेम और सेवा का फल नहीं मिलता और उसे अंत में धोखा मिलता है।यो दुखी रहते है।

ये यदि लंबी तथा वक्र यानि तीज के चाँद के आकार की हो-तो व्यक्ति को अपनी भावनाओं एवं प्रेम का खुला प्रदर्शन करने में और उसे स्वीकारने में आनन्द आता है।प्रेम सम्बन्ध होने या उसके टूटने पर भी ये विश्वनीय होते है।

एक दम सीधी एवं मस्तिष्क रेखा के समानान्तर –केवल अपनी भावनाओं की पूर्ति के लिए ये किसी भी हद तक जा सकते है।और उसकी पूर्ति होने पर उस सम्बन्ध को तोड़ कर भूल जाते है,यो भावनाओं पर कठोर नियंत्रण होने से निष्ठुर होते है।

ज्यादा वक्र यानि गोलाकार में हो –तो व्यक्ति के अनेक प्रेम और गुप्त संबंध होते है,यो इनमें गंभीर सम्बन्धों का अभाव रहता है।

ह्रदय रेखा पर गोल चिन्ह हो –तो व्यक्ति सदा दुख एवं विषाद पाता है।

ये टूटी हुई रेखा हो –यानि कंग की ऊँगली के नीचे तो व्यापारिक सम्बंधों में धोखे हो,सूर्य के नीचे तो,नोकरी,पिता,भाई,पुत्र,अधिकारी से धोखा हो,शनि के नीचे तो,एक्सिडेंट से या अचानक भाग्य में धोखा हो।गुरु के नीचे टूटी या कमजोर हो तो,शिक्षा में विध्न,पद ओर प्रतिष्ठा में देरी और बांधाये हो, यो भावनात्मक आघात मिलता है।

छोटी छोटी रेखाओं द्वारा हृदय रेखा को काटा जाना – तो सभी प्रकार के सम्बंधों में भावनात्मक धोखे से दुःख और आघात मिले।

4-अब मस्तिष्क रेखा का अध्ययन करें:-
यह मस्तक यानि स्मरण शक्ति,मेघा शक्ति,अन्तर्द्रष्टि, विद्वत्ता, सम्प्रेषण पद्धति, बौद्धिकता एवं ज्ञान ओर उसकी पिपासा की स्थिति बताती है।
ये वक्र यानि टेढ़ी रेखा कल्पनात्मक और सृजनात्मकता एवं स्वच्छंदता से सम्बद्ध होती है, जबकि एक सीधी रेखा व्यावहारिकता एवं सधे हुये दृष्टिकोण को दर्शाती मानी जाती है।मुख्य अध्ययन इस प्रकार से हैं:-
इसका प्रारम्भ तर्जनी ऊँगली यानि गुरु पर्वत के नीचे से या जीवन रेखा के साथ साथ या हथेली के बाहर से शुरू होता है।
ये यदि छोटी रेखा हो – तो व्यक्ति में उच्चज्ञान और उच्च समझ की उपलब्धियों के स्थान पर, शरीर की उपलब्धियों पर यानि मोज मस्ती पर ज्यादा ध्यान होता है।

ये वक्र यानि घूमती हुयी ढलवां रेखा हो –तो व्यक्ति में कल्पनाशीलता,सुंदरता की पहचान और उसको अभिव्यक्त करने या सृजनात्मकता का बहुत अच्छा गुण व् प्रतिभा होती है।

जीवन रेखा से थोड़ी से अलग हो –तो व्यक्ति दुसरो की अपेक्षा,पहले अपने ही विषय में स्वतंत्र चिंतन करने वाला,खुलेपन, साहसी, जीवन को उत्साह से भरपूर जीने वाला होता है।दूसरे की साहयता से लाभ पाने और अंत में उससे किनारा करने वाली आदत होती है।यो जल्दी भाग्य चमकता है।

ये रेखा यदि जीवन रेखा से थोड़ी दूर तक जुडी हो या ज्यादा जुडी हो-तो व्यक्ति परम्परावादी और धार्मिक होता है।नए चिंतन को देर से और अपनी तरहां से समझकर कार्य करने वाला होता है।यो ही देर से भाग्य चमकता है।

लहराती हुई रेखा –कमजोर और छोटी याददाश्त यानि रट्टू तोता होता है।पिता की स्थिति भी कमजोर होती है।

गहरी, लंबी रेखा हो –तो व्यक्ति सूझबूझ वाला,मनोवैज्ञानिक सोच वाला,एक काम पर केन्द्रित और उसे निपटा कर आगे बढ़ने वाला एवं दूसरे को स्पष्ट राय देता है।

सीधी रेखा – यथार्थवादी

यदि मस्तिष्क रेखा में काटकूट अथवा गोल चिन्ह हो –तो व्यक्ति भावनाओं में बहकर,दूसरे के कर्मो से खुद पर संकट बुलाने वाला होता है।सिर दर्द रहे।

भंग मस्तिष्क रेखा –अपना कोई विचार विशेष ज्ञान नहीं होता,बल्कि वो न अपने से न हितेषी के विचारों पर अधिक देर तक नहीं चलता है,यो संशय रखने की आदत से बीच में ही सब छोड़ देता है।यो उसका व्यक्तिगत विशेष विकास रुक जाता है।पिता को हानि होती है।

मस्तिष्क रेखा पर अनेक काटकूट के चिन्ह –वो महत्वपूर्ण निर्णय लेने में देरी करता है।इससे पिछड़ जाता है।

5-जीवन रेखा का अध्ययन करें:- यह अंगूठे के निकट और तर्जनी ऊँगली के नीचे से शुरू होती है और धनुषाकार हो कर कलाई तक जाती है। यह व्यक्ति की जीवनशक्ति,छमता, शारीरिक स्वास्थ्य, सामान्य डील डौल तथा जीवन के महत्वपूर्ण घटनाओं में होने वाले सभी परिवर्तनों (जैसेअचानक घटनाओं,रोग दोष, शारीरिक चोटों एवं स्थान परिवर्तन,पुरुष के वीर्य और स्त्री के रज की शक्ति)आदि को बताती है। इसकी अधिक लंबाई होने से,अधिक आयु के होने से विशेष सम्बद्ध नहीं होता है।आओ कुछ और बातों को जाने:-
ये यदि अंगूठे के निकट की और ज्यादा रहती है –तो व्यक्ति में अधिकतर जीवन शक्ति की कमी से थकान और उसके सभी सुख और एश्वर्य में कमी बनी ही रहती है।

सही से गोलाकार यानि वक्र हो –तो व्यक्ति बहुत ऊर्जावान,साहसी,सुखी होता है।

ये लंबी, गहरी स्पष्ट हो –तो व्यक्ति अपने जीवन और लोगों के सम्बंधों को लेकर सदा उत्साही और खुश बना रहता है।

छोटी व् आगे चलकर बिखरी सी छिछली –तो व्यक्ति दूसरों के बहकावे में जल्दी जल्दी आने से सदा धोखा खा कर दुखी रोगी रहता है।

पहले कुछ उठकर अर्धवृत्ताकार चक्र बनाये फिर सीधी हो –तो व्यक्ति किसी भी काम में शुरू में जोर शोर से शक्ति एवं उत्साह से लगेगा और अंत में उत्साहीन होकर उसे छोड़ या हट या देर से पूरा मुश्किल से करता है।

सीधी एवं हथेली के किनारे के और ज्यादा जाये –तो व्यक्ति सभी संबधों के बनाने में बड़ा संशय और सतर्कता बरतता है।सम्बन्ध अच्छे से नहीं निभाता।

साथ साथ चलती अनेक साहयक जीवन रेखाएँ हो –तो व्यक्ति के अनेक मित्र भी और प्रेम प्रसंग रहते है।पर स्थायी किसी में नहीं रहता है।इसके जीवन में अनेक संकट आते है और उससे बच जाता है।

रेखा में गोल चिन्ह हो –तो अनेक बार या उस समय चोट अथवा अस्पताल में भर्ती होने के योग बनते हैं।

रेखा भंग हो –तो अचानक जीवन शैली में परिवर्तन हो,कोई नया बड़ा निर्णय ले और दुर्घटना में जान हानि हो।

6-भाग्य रेखा का अध्ययन करें:- यह भाग्य रेखा यानि अतिरिक्त कर्म का मिलने वाला फल होने से इसे नियति रेखा भी कहते है। और यह बताती है कि- किसी व्यक्ति का जीवन उसके नियंत्रण के बाहर की परिस्थितियों से किस स्तर तक प्रभावित होता है।उसे जब भी जरूरत होगी,तब साहयता मिलेगी या नहीं।
३-यह हथेली के नीचे से या कहीं से भी शुरू होती हुयी अंत में शनि ऊँगली के नीचे या बराबर में समाप्त होती है।
गहरी रेखा हो –तो भाग्य सदा का संग देगा।

रेखा भंग एवं दिशा परिवर्तन करें तो –व्यक्ति को अपनी किसी भी कारण से, परिस्थितिवश जीवन में अनेक बार जाने अनजाने परिवर्तनों को करने की बिना कारण ही आवश्यकता पड़ती है।

प्रारम्भ में जीवन रेखा से जुड़ी हुई हो –तो व्यक्ति बिना परिवार और मित्रों आदि के अलग विषय को लेकर,अपने ही स्वनिर्मित भाग्य और कार्य खड़ा करता है।देर से भाग्य चमकता है।पर व्यक्ति, शीघ्र ही इन कारणों से अति महत्वाकांक्षी भी हो जाता है।

चन्द्र क्षेत्र से चलकर लगभग बीच में पहुँच कर जीवन रेखा से जुड़ जाती है और फिर ऊपर को बढ़ती है –तो जहाँ जुड़ती और हटती है,वो समय व्यक्ति के जीवन का वह काल दर्शाता है जब दूसरों के या परिवार या प्रेम आदि के कारण दूसरे के कल्याण के लिए अपने के हितों का बलिदान कर देता है,और फिर से अलग अपना दोबारा भाग्य बनाता है।

यदि ये अंगूठे के पास के आधार से आरम्भ हो कर, जीवन रेखा को काटती है–तो मित्रों एवं संबंधियों द्वारा सहायता से भाग्य और कार्य बनता है।।

2-अब आप हाथ एवं अंगुलियों आदि का अध्ययन कैसे करें,ये जाने:-

 

1-पहले हाथ का आकार देखें:-

प्रत्येक मनुष्य का हाथ का आकार अलग अलग होता है।यो हाथ का अलग अलग आकार व्यक्ति के चरित्र की किसी न किसी अलग कम या ज्यादा विलक्षणता का प्रतिनिधि होता है। हथेली की लंबाई कलाई से लेकर,उसकी अंगुलियों के आधार तक नापि जाती है।और उँगलियों की भी लम्बाई देखी जाती है।जो इस प्रकार से यहाँ बताये अनुसार देखे:-

”वर्गाकार हाथ”:–इस हाथ में हथेली चौड़ी ओर वर्गाकार,स्थूल होती है तथा उँगलियाँ खुरदुरी, सुर्ख लालिमा लिए रंग, हथेली तथा अंगुलियों की लंबाई लगभग बराबर की होती है।
ये हाथ वाले व्यक्ति जीवन के प्रत्येक कार्य और क्षेत्र या व्यवहार को, उसके मूल्य और लाभ हानि के तोल से देखते है,यो इनका स्वभाव कभी कभी हठीला,तो कभी व्यावहारिक एवं ज़िम्मेवार,तो कभी कभी भौतिकतावादी दिखाई देता है।ये
अपने हाथों से काम करने वाले एवं उसी में सुखी रहने वाले होते है।ये पृथ्वी तत्व की अधिकता लिए होने प्रकर्ति प्रधान लोग होते है।
”आयताकार हाथ”:–ऐसे व्यक्तियों की लंबी अंगुलियों के साथ वर्गाकार अथवा आयताकार हथेलियाँ होती है,और कभी कभी बाहर को निकले हुये उँगलियों के गठान वाले पोर होते है, नीचे को दबा हुआ अंगूठा और शुष्क त्वचा होती है; अंगुलियों की लंबाई से छोटी हथेलियाँ होती है और ये
मिलनसार, बातुनी एवं हाजिरजवाब होते है।इनका छिछला, ईर्ष्यालु एवं भावशून्य स्वभाव,इन्हें दूसरों से अलग और अपने स्वच्छंद तरीके से कार्य करने वाला बनाता है।ये वायु प्रधान लोग होते है।
“शंखाकार हाथ”:– लंबी शंक्वाकार अंगुलियों के साथ इनकी हथेली लंबी और अंडाकार होती है।इनकी हथेली की लंबाई भी, अंगुलियों की लंबाई के बराबर होती है, परंतु हथेंली के सबसे चौड़े भाग की चौड़ाई से कम होती है।ये जल तत्व प्रधान लोग होते है।ऐसे व्यक्तियों में नवीन सृजनात्मक कल्पना, अनुभवी और संवेदनशील स्वभाव की अधिकता और जरा सी बात पर तुनकमिजाजी, भावुक एवं संकोची हो जाना व्
अंतर्मुखी होकर शांतचित्त एवं सहजज्ञान से कार्य करने वाला स्वभाव होता है।
”कलात्मक हाथ”:-इनकी वर्गाकार अथवा आयताकार हथेलियाँ होती है,तथा लाल अथवा गुलाबी आभा वाली त्वचा और छोटी अंगुलियाँ व् अंगुलियों से लंबी हथेली होती है।ये सहज, उत्साही एवं आशावादी स्वभाव के और
कभी कभी अपनी ही सोच से अहंवादी बन जाते है,साथ ही मनमौजी एवं असंवेदनशील
बहिर्मुखी यानि बेपरवाह दिखाई देते है और निडरतापूर्वक, सहजज्ञान से कार्य करने वाला इनका व्यक्तित्व होता है।ये अग्नि तत्व प्रधान लोग होते है।
यहाँ इन सबका मिश्रित तत्वों वाला यानि आकाश तत्व के गुणों वाला “मिश्रित हाथ” नहीं होता है।

2-अब पर्वतों को देखिये:- वेसे पर्वतों के विषय में साक्षात् हाथ को ही देख कर अध्ययन करना चाहिए।क्योकि ये हाथ की छाप में साफ रूप से पता नहीं चलता है।की पर्वत उभरें है या दबे है।

पर्वत यानि ग्रहों के क्षेत्र:- ये आपकी उँगलियों के पोरों के नीचे का मांसल भाग होता है। इनको देखने के लिए अपने हाथ को थोडा सिकोड़ कर, कप जैसा बनाइये।अब आप देख पाएंगे की कौन सा पर्वत बड़ा,उभरा है,और कौन सा सबसे छोटा और दबा हुआ है?
1-शुक्र पर्वत:- (आपके अंगूठे के नीचे वाला भाग)ये उठा और गद्देदार हो तो,व्यक्ति भोगवादी, सुखवादिता,प्रेम में रसिक स्वच्छंदता एवं क्षणिक देर में संतुष्टि पाना,जेसी आवश्यकता के स्वभाव को बताता है। शुक्र पर्वत की अनुपस्थिति यानि दबे से,या कमजोर होने पर,व्यक्ति के पारिवारिक मामलों में,दायित्वों के प्रति उदासीनता को दर्शाता है।
2-तर्जनी के नीच के पर्वत को बृहस्पति पर्वत या गुरु पर्वत कहते हैं। इसके उन्नत होने का अर्थ है कि- आप प्रभावी,अपने में ही आत्मकेंद्रित रहने वाले एवं अति महत्वाकांक्षी हैं। और इसकी कमजोर होने का अर्थ है कि- आप में विश्वास की कमी और शिक्षा से विवाह,सन्तान आदि सभी सुखों में देरी और बाँधा रहती है।
3-आपकी मध्यमा के नीचे शनि पर्वत होता है।ये पर्वत उभरा होने पर, आपके हठी, चिड़चिड़े एवं विषादग्रस्त होने के स्वभाव को बताता है। यदि यह कुछ दबा हुआ है तो यह उथलापन, सतहीपन एवं अव्यवस्था को बताता है।ये सामान्य ही उत्तम होता है।
4-सूर्य पर्वत आपकी अनामिका के नीचे होता है। यदि ये पर्वत सूर्य उच्च है, तो आप जल्दी क्रोधित हो जाने वाले,व्यर्थ के शाहखर्च और अभिमानी यानि गर्वीले स्वभाव के हैं। दबा हुआ सूर्य पर्वत आपके स्वभाव में सौंदर्य और कलपनाहीनता का आभाव बताता है।
5-बुध पर्वत आपकी कनिष्ठिका के नीचे होता है।ये यदि उभरा हुआ है तो, आप बहुत तार्किक और चिंतनशील व् बौद्धिक, वाचाल हैं। दबे हुये पर्वत का अर्थ इसके विपरीत है, आप दब्बू और तर्कहीन व् शर्मीले हैं।

अब नाखूनों का अध्ययन करें:-

गोल,लंबे नखों का अर्थ है कि- आप दयावान हैं और किसी के भी बताई बातों के रहस्यों के उत्तम रखवाले हैं।कल्पनाशील और कलाकार होते है।
छोटे नाखूनों का अर्थ है कि- आप किसी भी बात की तह में उसे हर तरफ से देख परख कर जानने वाले है।ऐसे व्यक्ति व्यंग्यात्मक भाषा वाले होते हैं। यदि ये छोटे नाख़ून बादाम के आकार के हैं, तब आप स्नेही और मधुर एवं व्यवहार कुशल स्वभाव के हैं।
चौड़े नाख़ून वाले:-ज्यादा परिश्रमी और कम परिणाम पाने वाले होते है।
चोकोर नाख़ून वाले:-प्रेम में व्यवहारिक नहीं होने से,अच्छी भली चल रही गृहस्थी जीवन को कलही बना लेते है।
वेसे इस सब विषय पर मैं अन्य लेखों में विस्तार से बता चूका हूँ।यो वहाँ अध्ययन करें।
और शेष आगामी लेखों में बताऊंगा।

 

“इस लेख को अधिक से अधिक अपने मित्रों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों को भेजें, पूण्य के भागीदार बनें।”

 

अगर आप अपने जीवन में कोई कमी महसूस कर रहे हैं? घर में सुख-शांति नहीं मिल रही है? वैवाहिक जीवन में उथल-पुथल मची हुई है? पढ़ाई में ध्यान नहीं लग रहा है? कोई आपके ऊपर तंत्र मंत्र कर रहा है? आपका परिवार खुश नहीं है? धन व्यर्थ के कार्यों में खर्च हो रहा है? घर में बीमारी का वास हो रहा है? पूजा पाठ में मन नहीं लग रहा है?
अगर आप इस तरह की कोई भी समस्या अपने जीवन में महसूस कर रहे हैं तो एक बार श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के पास जाएं और आपकी समस्या क्षण भर में खत्म हो जाएगी।
माता पूर्णिमाँ देवी की चमत्कारी प्रतिमा या बीज मंत्र मंगाने के लिए, श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज से जुड़ने के लिए या किसी प्रकार की सलाह के लिए संपर्क करें +918923316611

ज्ञान लाभ के लिए श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के यूटीयूब

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श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः


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