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अजित पवार की चिता की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई… और कुर्सी पर फैसला हो गया

Ajit Pawar News | Sunetra Pawar | Maharashtra Politics | Bureau Report Akash Dhake | Khabar 24 Express


महाराष्ट्र की राजनीति में शोक को पीछे छोड़कर सत्ता ने रफ्तार पकड़ ली है। Ajit Pawar के निधन को अभी एक हफ्ता भी नहीं हुआ और उनकी राजनीतिक विरासत पर कब्ज़े की जंग अपने अंजाम तक पहुँच गई। जिस कुर्सी पर अजित पवार बैठे थे, अब उसी कुर्सी पर Sunetra Pawar बैठ चुकी हैं।

यह वही दौर है जब अजित पवार की चिता की राख अभी ठंडी नहीं हुई थी, और उनकी ही पार्टी के नेता सत्ता के गणित में जुट चुके थे। शोक सभाओं के बीच बंद दरवाज़ों में बैठकें चल रही थीं। सवाल सिर्फ एक था—कुर्सी किसकी होगी?

अजित पवार के अंतिम संस्कार के कुछ ही दिनों बाद एनसीपी के दिग्गज नेता मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis से मिले। Praful Patel, Chhagan Bhujbal और Sunil Tatkare की इस मुलाकात को उस वक्त शिष्टाचार कहा गया, लेकिन असल में यह सत्ता की पटकथा लिखी जा रही थी।

आज नतीजा सबके सामने है। सुनेत्रा पवार डिप्टी सीएम बन चुकी हैं। साथ ही अजित पवार के अहम विभाग—वित्त, नियोजन और आबकारी—एनसीपी के पास ही बने रहे। सत्ता संतुलन साध लिया गया, सरकार सुरक्षित कर ली गई।

सबसे बड़ा सवाल यही है ये वही लोग हैं जो कल तक चाचा–भतीजे को एक नहीं होने दे रहे थे।


ये वही चेहरे हैं जो एनसीपी के विलय में रोड़े अटका रहे थे।
और आज वही लोग एकजुट होकर सिर्फ कुर्सी के लिए खड़े दिखाई दे रहे हैं।

पार्टी के भीतर यह तर्क दिया गया कि कार्यकर्ताओं का भावनात्मक जुड़ाव ‘पवार’ नाम से है। इसी भावनात्मक कार्ड को सत्ता की ढाल बनाया गया। शोक को राजनीति में बदला गया और विरासत को कुर्सी में तब्दील कर दिया गया।

गौरतलब है कि Nationalist Congress Party के 40 विधायक सरकार की स्थिरता की रीढ़ हैं। इसी मजबूरी ने सत्ता को जल्दबाज़ी में फैसला लेने पर मजबूर किया।

एक तरफ सत्ता का यह खेल पूरा हो चुका है, दूसरी तरफ अजित पवार के विमान हादसे की जांच अब भी जारी है। डीजीसीए, एएआईबी और सीआईडी की जांच इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना रही है।

अजित पवार अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी राजनीति पर फैसला बहुत जल्दी कर लिया गया।
शोक थमा नहीं था, लेकिन सत्ता थम नहीं सकती थी।

अगर आप महाराष्ट्र की राजनीति की हर सच्चाई, हर सौदे और हर सत्ता-चाल को बिना लाग-लपेट जानना चाहते हैं, तो Khabar 24 Express से जुड़े रहिए। कमेंट में बताइए क्या यह राजनीति मजबूरी थी या सत्ता की भूख?


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