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घोटाले की फाइल मेरे पास…10 दिन में हो गई मौत, संजय राउत के बयान से महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल

Ajit Pawar News | Sanjay Rout Shivsena News | Bureau Report Akash Dhake | Khabar 24 Express


28 जनवरी 2026… यह तारीख अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है। एक विमान हादसा, दो घंटे का सन्नाटा और फिर खबर आई कि महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम Ajit Pawar अब इस दुनिया में नहीं रहे।

देश शोक में था, लेकिन राजनीति उसी वक्त करवट ले चुकी थी। महज 80 घंटे के भीतर सत्ता की तस्वीर बदल गई और अब इस मौत पर ऐसा बयान आया है, जिसने पूरे महाराष्ट्र की सियासत में आग लगा दी है।

28 जनवरी की सुबह जब प्लेन क्रैश की खबर सामने आई, तब हर किसी को उम्मीद थी कि शायद अजित पवार बच गए हों। सोशल मीडिया पर हर मिनट अपडेट्स खंगाले जा रहे थे, लेकिन दो घंटे बाद पुष्टि हो गई कि हादसा जानलेवा था।

पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई, लेकिन इसी बीच राजनीतिक घटनाक्रम असामान्य तेजी से आगे बढ़ा। अजित पवार के निधन के महज 80 घंटे के भीतर उनकी पत्नी को डिप्टी सीएम पद की शपथ दिला दी गई, जिस पर पहले ही कई सवाल उठ चुके थे।

अब इसी मामले को लेकर शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेता Sanjay Raut ने ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है।

2 फरवरी को मीडिया से बात करते हुए संजय राउत ने कहा कि अजित पवार जैसे बड़े नेता की विमान हादसे में मौत और उसके बाद सामने आ रहे तथ्य, अपने आप में कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं। राउत ने साफ शब्दों में कहा कि इस मौत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

संजय राउत का आरोप है कि अजित पवार ने हाल ही में “घर वापसी” यानी अपनी पुरानी राजनीतिक धारा में लौटने की इच्छा जताई थी। इसके बाद उन्हें बीजेपी की ओर से सिंचाई घोटाले की फाइलों को लेकर दबाव और धमकियां दी गईं।

राउत के मुताबिक, अजित पवार ने इन धमकियों का जवाब भी दिया था और उसके महज 10 दिन बाद उनकी रहस्यमय मौत हो गई। राउत ने इस पूरे घटनाक्रम की तुलना जस्टिस लोया केस से करते हुए कहा कि संयोग बहुत खतरनाक तरीके से मेल खा रहे हैं।

जिस सिंचाई घोटाले की बात हो रही है, वह महाराष्ट्र के सबसे बड़े कथित घोटालों में से एक माना जाता है। डैम, नहर और बैराज जैसी परियोजनाओं में लागत कई गुना बढ़ा दी गई, ठेके नियमों को ताक पर रखकर बांटे गए और कई जगह काम या तो अधूरा रहा या फिर घटिया गुणवत्ता का पाया गया। इन अनियमितताओं से राज्य को हजारों करोड़ रुपये के नुकसान की बात पहले ही सामने आ चुकी है।

इस पूरे मामले में एनसीपी के भीतर चल रही हलचल ने भी सियासत को और गरमा दिया है। दावा किया जा रहा है कि अजित पवार दोनों एनसीपी गुटों के विलय की दिशा में आगे बढ़ चुके थे और इसके लिए 12 फरवरी की तारीख तक तय हो चुकी थी। यूबीटी गुट का कहना है कि अजित पवार का सपना अधूरा रह गया, जबकि महायुति और बीजेपी इस दावे को सिरे से खारिज कर रही है।

इसी बीच Sharad Pawar की पार्टी को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं कि अगर विलय होता, तो महाराष्ट्र की राजनीति की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती थी। लेकिन उससे पहले ही सब कुछ खत्म हो गया।

अब सवाल सिर्फ एक हादसे का नहीं है, सवाल उस फाइल का है… सवाल उन 10 दिनों का है… और सवाल उस जल्दबाजी का है, जिसमें सत्ता के फैसले लिए गए। क्या यह सिर्फ एक दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई सियासी साजिश? यह आने वाला वक्त बताएगा।

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