Crime Report | Zishan Alam | UP Fake Aadhaar Scam | Pramod Nishad Arrested | STF Action
उत्तरप्रदेश से सामने आया एक ऐसा डिजिटल महाघोटाला, जिसने देश की पहचान प्रणाली और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हैरानी की बात यह है कि इस रैकेट में 0 से 18 साल तक के बच्चों के भी फर्जी आधार कार्ड बनाए गए। उत्तरप्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड प्रमोद निषाद को गिरफ्तार कर लिया है।
जनसेवा केंद्र से शुरू हुआ फर्जीवाड़े का खेल
एसटीएफ जांच में सामने आया है कि बहराइच जिले का रहने वाला 28 वर्षीय प्रमोद निषाद बीएससी पास है। उसने साल 2021 में एक जनसेवा केंद्र खोला था, जहां शुरुआत में सरकारी योजनाओं से जुड़े ऑनलाइन काम किए जाते थे। लेकिन धीरे-धीरे प्रमोद ने सरकारी डिजिटल सिस्टम की कमजोरियों को समझा और उसी का फायदा उठाकर फर्जीवाड़े का जाल बुन दिया।
टेलीग्राम से मिला फर्जी पोर्टल का रास्ता
2024 के अंत में प्रमोद का संपर्क टेलीग्राम के जरिए अकील सैफी नाम के व्यक्ति से हुआ। इसी संपर्क ने पूरे फर्जीवाड़े को बड़े स्तर पर पहुंचा दिया। 35 हजार रुपये के बदले प्रमोद को ऐसे पोर्टल, यूजर आईडी और पासवर्ड मुहैया कराए गए, जिनसे कूटरचित जन्म प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र बनाए जा सकते थे।
1–2 मिनट में बन जाता था फर्जी आधार
प्रमोद ने अपने सिस्टम में फर्जी सॉफ्टवेयर, आधार नामांकन और संशोधन से जुड़े अवैध टूल इंस्टॉल कर लिए थे। हालात ये थे कि सिर्फ 1 से 2 मिनट में फर्जी डिजिटल दस्तावेज तैयार हो जाता था। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर नया आधार कार्ड बनाया जाता या पुराने आधार में नाम, जन्मतिथि और पता बदल दिया जाता था।
बच्चों के आधार तक से किया गया खिलवाड़
इस रैकेट का सबसे गंभीर पहलू यह है कि 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों को भी निशाना बनाया गया। कई मामलों में ऐसे लोगों के आधार बनाए गए जिनके पास कोई वैध दस्तावेज तक मौजूद नहीं था। यह सीधे तौर पर सरकारी योजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य में सुरक्षा से जुड़ा गंभीर खतरा है।
AnyDesk से पूरे नेटवर्क को कंट्रोल
प्रमोद ने AnyDesk सॉफ्टवेयर के जरिए दर्जनों लोगों को अपने सिस्टम का रिमोट एक्सेस दे रखा था। हर यूजर आईडी के बदले 45 हजार रुपये लिए जाते थे, जिसमें से 35 हजार रुपये अकील सैफी को दिए जाते थे और बाकी रकम प्रमोद खुद रखता था।
एक यूजर आईडी से रोजाना 20 से 25 फर्जी आधार कार्ड बनाए जा रहे थे।
19 हजार से ज्यादा आधार कार्ड में हेराफेरी
पूछताछ में प्रमोद निषाद ने कबूल किया कि उसके नेटवर्क के जरिए करीब 18 से 19 हजार आधार कार्ड बनाए या संशोधित किए गए हैं। यह पूरा रैकेट नेपाल बॉर्डर से सटे इलाकों में तेजी से फैल रहा था, जिससे इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है।
नेपाल भागने की तैयारी में STF ने दबोचा
एसटीएफ को सूचना मिली थी कि प्रमोद नेपाल भागने की फिराक में है। इसके बाद 12 दिसंबर की सुबह करीब 4:30 बजे रजनवा नेपाल बॉर्डर के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपी के पास से लैपटॉप, बायोमैट्रिक स्कैनर, रेटिना स्कैनर, कई मोबाइल फोन, एक कार और बड़ी मात्रा में अहम दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
देश की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। जब हजारों फर्जी आधार कार्ड बनाए जा सकते हैं, तो इनके जरिए आतंकवाद, अवैध घुसपैठ, संगठित अपराध और सरकारी योजनाओं की लूट जैसे खतरों से इनकार नहीं किया जा सकता। एसटीएफ अब इस नेटवर्क की हर कड़ी खंगाल रही है और संभावना है कि आने वाले दिनों में और बड़े नाम सामने आएंगे।
यह खुलासा देश की डिजिटल पहचान प्रणाली की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा अलार्म है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
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