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Patanjali Ghee Lab Test Fail: सरकारी जांच में खाने लायक नहीं निकला पतंजलि का देसी घी, कोर्ट ने ठोका जुर्माना

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“Patanjali Ghee Lab Test Fail News: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में सरकारी लैब जांच में पतंजलि का गाय का घी फेल, कोर्ट ने Patanjali Ayurved Limited, डिस्ट्रीब्यूटर और दुकानदार पर लगाया 1.40 लाख का जुर्माना। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।”


योग, आयुर्वेद और शुद्धता… इन्हीं तीन शब्दों पर बनी पहचान आज गंभीर सवालों के घेरे में है। जिस पतंजलि कंपनी पर देश के करोड़ों लोग आंख मूंदकर भरोसा करते हैं, उसी कंपनी का देसी घी सरकारी लैब जांच में फेल हो गया है।

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से सामने आए इस मामले ने पतंजलि के “शुद्धता के दावों” की पोल खोल दी है। जिस घी को रोज़ाना हजारों परिवार अपने खाने में इस्तेमाल कर रहे थे, वही घी खाने लायक भी नहीं पाया गया


कहां और कैसे हुआ खुलासा?

यह पूरा मामला 20 अक्टूबर 2020 का है। पिथौरागढ़ में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने रूटीन जांच के दौरान एक दुकान से Patanjali गाय के घी का सैंपल लिया।

सबसे पहले यह सैंपल राज्य सरकार की लैब, रुद्रपुर भेजा गया।
रिपोर्ट आई – और अधिकारी भी चौंक गए।
घी क्वालिटी स्टैंडर्ड पर फेल घोषित कर दिया गया।

इसके बाद सैंपल को दोबारा जांच के लिए राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशाला, गाजियाबाद भेजा गया। 26 नवंबर 2021 को नेशनल लैब की रिपोर्ट भी आ गई – और यहां भी पतंजलि का घी मानकों पर खरा नहीं उतरा।


“लोग बीमार भी पड़ सकते हैं” – खाद्य विभाग का बयान

खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन, पिथौरागढ़ के असिस्टेंट कमिश्नर आर.के. शर्मा ने साफ तौर पर कहा कि:

अगर किसी ने यह घी खाया है तो उसे साइड इफेक्ट हो सकते हैं, यहां तक कि लोग बीमार भी पड़ सकते हैं।
मतलब – रिपोर्ट में यह तक कहा गया कि यह घी खाने के लिए सुरक्षित ही नहीं है।


3 साल 8 महीने चली सुनवाई, फिर आया सख्त फैसला

मामला कोर्ट तक पहुंचा और पूरे 1,348 दिन यानी करीब 3 साल 8 महीने तक इसकी सुनवाई चली।

आखिरकार कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाते हुए:

  • Patanjali Ayurved Limited पर 1 लाख रुपए का जुर्माना
  • डिस्ट्रीब्यूटर ब्रह्म एजेंसी पर 25 हजार रुपए
  • दुकानदार पर 15 हजार रुपए का जुर्माना लगाया

कुल जुर्माना – 1 लाख 40 हजार रुपए


असली सवाल जुर्माना नहीं, जनता की सेहत है

यहां सबसे बड़ा सवाल यह नहीं कि जुर्माना कितना लगा…
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो घी देश की जनता रोज़ खा रही थी, क्या वह वाकई सुरक्षित था?

अगर सरकारी जांच में वह फेल हो चुका है, तो वर्षों से किए जा रहे “शुद्धता” के दावे आखिर कितने मजबूत हैं?


पहले भी विवादों में घिर चुका है पतंजलि

यह पहली बार नहीं है जब पतंजलि के किसी प्रोडक्ट पर सवाल उठे हों:

  • शहद में मिलावट के आरोप
  • सोन पापड़ी के मामले में एक सीनियर अधिकारी को जेल
  • कई देशों में पतंजलि के कुछ प्रोडक्ट्स पर बैन

यानि शुद्धता के बड़े-बड़े दावों के पीछे बार-बार गंभीर सवाल खड़े होते रहे हैं।


अब भरोसा करे जनता या सवाल उठाए?

आज सवाल सिर्फ एक कंपनी का नहीं है…
सवाल उस भरोसे का है, जो देश की जनता ने सालों से इस ब्रांड पर किया। क्या जनता अब भी आंख मूंदकर भरोसा करेगी?
या फिर अब “शुद्धता के दावों की असलियत” पर सवाल पूछे जाएंगे?


Exclusive Report : Manish Kumar Ankur


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