
Report Saurabh Wadhwa | नई दिल्ली, 28 अक्टूबर:
छठ पूजा जैसे पवित्र पर्व पर जब दिल्ली के लाखों लोग श्रद्धा से यमुना तट पहुंचे, तो वहां की हकीकत देखकर हर किसी का माथा ठनक गया। यमुना का पानी साफ नहीं, बल्कि बदबूदार नाले जैसा था। किनारों पर कचरा और कीचड़ की मोटी परत जमी थी। इसके बावजूद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने दावा किया कि उन्होंने “साफ पानी और स्वच्छ घाट” तैयार किए हैं।
लेकिन सच्चाई कुछ और ही निकली। वासुदेव घाट पर बनाया गया एक “कृत्रिम यमुना घाट” अब चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि यहां प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए भाजपा सरकार ने “फिल्टर किया हुआ पानी” डालकर एक “नकली साफ यमुना” तैयार की ताकि कैमरों में दिल्ली चमकती हुई दिखे और सीएम रेखा गुप्ता की छवि ‘विकासशील’ बने।

‘आर्टिफिशियल यमुना’ का सच
स्थानीय लोगों के अनुसार, घाट पर केवल कुछ घंटों के लिए साफ पानी डाला गया था। वास्तविक यमुना की हालत वहीं की वहीं है — गंदी, मैली और जहरीली। छठ व्रतियों को नाले जैसे पानी में डुबकी लगानी पड़ी। सवाल उठता है कि क्या रेखा गुप्ता सरकार के लिए धार्मिक आस्था केवल ‘फोटो-ऑप’ का माध्यम बन गई है?
प्रदूषण पर भी ‘फिल्टर’ चाल
सीएम रेखा गुप्ता की मुश्किलें सिर्फ यमुना तक सीमित नहीं हैं। अब दिल्ली की हवा पर भी बड़ा सवाल उठ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, राजधानी में जहां-जहां प्रदूषण मापा जा रहा था, वहां साफ पानी का छिड़काव किया गया ताकि हवा साफ दिखाई दे और प्रदूषण स्तर ‘कागजों में’ घटा हुआ दिखे।
लेकिन आंकड़े झूठ नहीं बोलते दिवाली के बाद दिल्ली का एक्यूआई (AQI) पहले से भी ज्यादा खराब निकला।

AAP का बड़ा आरोप: “डेटा में हेरफेर और सेंसर बंद”
आप नेता सौरभ भारद्वाज ने भाजपा सरकार पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि दीवाली की रात दिल्ली सरकार ने प्रदूषण के असली आंकड़े छिपाने के लिए निगरानी केंद्र ही बंद करा दिए।
भारद्वाज के मुताबिक, जहां असली AQI 1700 के पार चला गया था, वहीं सरकारी डेटा में 350 दिखाया गया। इतना ही नहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, आईएमडी और IITM के सेंसर एक ही समय पर “तकनीकी खराबी” के नाम पर बंद कर दिए गए और हवा साफ होने के बाद ही उन्हें दोबारा चालू किया गया।
जिम्मेदारी से बचाव और ‘पराली’ का बहाना
दूसरी ओर भाजपा सरकार ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए एक बार फिर पंजाब की पराली को दोषी ठहराया। लेकिन सवाल यह है कि अगर हर बार दोष दूसरों पर ही डालना है, तो दिल्ली में सरकार क्या कर रही है?
जनता के बीच बढ़ा गुस्सा
छठ पूजा के मौके पर जब व्रती महिलाएं और बच्चे यमुना किनारे खड़े हुए, तो उनके चेहरे पर नाराजगी साफ झलक रही थी। लोगों ने कहा “हर साल वादे किए जाते हैं कि यमुना साफ होगी, लेकिन पूजा के वक्त नाले का पानी हमारे सामने होता है। अगर मुख्यमंत्री खुद यहां आकर देख लें तो उन्हें हकीकत समझ आए।”
और अंत में..
छठ पूजा पर दिल्ली सरकार के ‘साफ-सुथरे’ दावे एक बार फिर ध्वस्त हो गए हैं। सीएम रेखा गुप्ता पर अब सवाल यह है कि क्या वह यमुना को सच में साफ करना चाहती हैं, या केवल “आर्टिफिशियल यमुना” और “फिल्टर हवा” से जनता की आंखों में धूल झोंकना चाहती हैं?
धर्म, आस्था और पर्यावरण के नाम पर जो दिखावा किया गया, उसने साफ कर दिया है कि दिल्ली की राजनीति में “छवि सुधार” ही प्राथमिकता है, “पर्यावरण सुधार” नहीं।
ब्यूरो रिपोर्ट : सौरभ वाधवा, नई दिल्ली
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Tags:
Rekha Gupta, CM Rekha Gupta, Yamuna Pollution, Chhath Puja 2025, Delhi Air Pollution, AAP vs BJP, Saurabh Bharadwaj, Delhi Environment, Artificial Yamuna, Delhi CM Controversy
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