Manish Kumar Ankur | Exclusive Report | यवतमाल/वणी: महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में अगर कोई नाम है, तो वो है वणी विधानसभा क्षेत्र के कद्दावर नेता विजय चोरड़िया का।
भाजपा के पूर्व प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रहे विजय चोरड़िया ने आखिरकार पार्टी से किनारा करते हुए एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम लिया है।
उनके इस कदम से न केवल वणी विधानसभा, बल्कि पूरे विदर्भ की राजनीतिक गणित में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
भाजपा से मोहभंग और शिवसेना (शिंदे गुट) में एंट्री
विजय चोरड़िया लंबे समय से भाजपा से जुड़े हुए थे।
उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में भाजपा संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए दिन-रात मेहनत की।
पार्टी के हर निर्देश को उन्होंने निष्ठा और ईमानदारी से निभाया।
लेकिन जब 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव आए, तो पार्टी ने उन्हें पूरी तरह से नज़रअंदाज कर दिया।
वणी से टिकट ऐसे उम्मीदवार को दे दिया गया जिससे जनता पहले से ही नाराज थी।
परिणाम यह हुआ कि भाजपा को वणी में करारी हार का सामना करना पड़ा।
लगातार अनदेखी और बढ़ती नाराजगी
चुनाव के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ।
पार्टी ने आश्वासन दिया था कि चोरड़िया की अनदेखी नहीं होगी, लेकिन दस महीने बीत जाने के बावजूद उन्हें न तो संगठन में कोई जिम्मेदारी दी गई, न ही सम्मानजनक भूमिका।
विजय चोरड़िया ने इस दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेताओं—पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण, और RSS के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी मुलाकात की।
केंद्रीय मंत्रियों तक अपनी बात पहुंचाई, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
जब हर स्तर पर उन्हें नजरअंदाज किया गया, तब उन्होंने अपने स्वाभिमान और सम्मान के लिए भाजपा छोड़ने का फैसला किया।
वणी में सैकड़ों कार्यकर्ताओं का सामूहिक इस्तीफा
विजय चोरड़िया के साथ ही वणी के सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी को अलविदा कहते हुए एकनाथ शिंदे की शिवसेना में प्रवेश किया।
इस सामूहिक इस्तीफे ने भाजपा के स्थानीय संगठन को बड़ा झटका दिया है।
चोरड़िया का संगठन पर गहरा पकड़ थी — वे यवतमाल और चंद्रपुर जिलों में एक सशक्त राजनीतिक प्रभाव रखते हैं।
उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके निर्णय के बाद भाजपा के कई अन्य स्थानीय नेता भी असमंजस में हैं और कुछ ने पार्टी छोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है।
विदर्भ की राजनीति पर पड़ेगा गहरा असर
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि विजय चोरड़िया के इस कदम से विदर्भ की राजनीति में नया समीकरण बन सकता है।
एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को अब विदर्भ में मजबूत आधार मिल सकता है, जो पहले भाजपा का गढ़ माना जाता था।
वहीं भाजपा के लिए यह घटना आत्ममंथन का विषय है कि आखिर क्यों एक समर्पित और जमीनी नेता को संगठन में उपेक्षित रखा गया।
विजय चोरड़िया बोले – “संगठन ने बदले में कुछ नहीं दिया”
शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल होने के बाद विजय चोरड़िया ने कहा “मैंने संगठन की तरफ से जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा से निभाया।
संगठन को मजबूत करने में कभी कोई कमी नहीं छोड़ी, लेकिन जब बदले में सम्मान नहीं मिला, तो यह निर्णय लेना पड़ा।
मैंने हमेशा जनता और कार्यकर्ताओं के हित को प्राथमिकता दी है और आगे भी वही करूंगा।”
अब आगे क्या होगा?
राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि आने वाले महीनों में विजय चोरड़िया की एंट्री से शिवसेना (शिंदे गुट) को न सिर्फ वणी में, बल्कि पूरा यवतमाल-चंद्रपुर बेल्ट में नई ऊर्जा मिलेगी।
साथ ही यह भाजपा के लिए आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही, तो विदर्भ के कई और नेता चोरड़िया के रास्ते पर चल सकते हैं।
और अंत में…
विजय चोरड़िया का भाजपा छोड़कर शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल होना सिर्फ एक दल-बदल नहीं, बल्कि विदर्भ की राजनीति में शक्ति संतुलन का संकेत है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस चुनौती से कैसे निपटती है और शिंदे गुट इस अवसर को कितनी तेजी से भुना पाता है।
फिलहाल इतना तय है कि वणी से शुरू हुई यह राजनीतिक लहर पूरे विदर्भ को प्रभावित करने वाली है।

Exclusive Report Manish Kumar Ankur, Nagpur
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