
नई दिल्ली | 30 अगस्त 2025 | मनीष कुमार अंकुर: आज हम एक बहुत ही बड़ी खबर पर बात करने जा रहे हैं। खबर इथेनॉल (Ethanol) के ऊपर है। आजकल सोशल मीडिया (Social Media) पर इथेनॉल से गाड़ियों में होने वाले नुकसान के बारे में बात हो रही है। तो लगे हाथों हम भी इसके ऊपर बात कर लेते हैं। कि कैसे इथेनॉल से किसी के कारोबार बनाया जा रहा है और इससे किसकी जेब ढीली और किसका नुकसान हो रहा है?
कुछ समय पहले नितिन गडकरी ने जनता से वादा किया था कि अगर पेट्रोल में इथेनॉल (E20 Fuel Policy) मिलाया जाएगा तो पेट्रोल सस्ता होगा और गाड़ियों का माइलेज बढ़ेगा। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट निकली।
आज न पेट्रोल सस्ता हुआ और न माइलेज बढ़ा। उल्टा गाड़ियों के इंजन और पार्ट्स खराब होने लगे, रिपेयरिंग का खर्च बढ़ गया और जनता को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।

गडकरी का वादा और हकीकत
- वादा: पेट्रोल सस्ता होगा और माइलेज बढ़ेगा।
- हकीकत: पेट्रोल अब भी 100 रुपये से ऊपर, माइलेज घटा और गाड़ियों में खराबी बढ़ी।
अब बड़ा सवाल उठता है कि क्या नितिन गडकरी ने सचमुच देश का भला सोचा, या फिर यह पूरा खेल उनके बेटों की कंपनियों को फायदा पहुँचाने के लिए रचा गया?
हरदीप पुरी और नितिन गडकरी की भूमिका
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का काम था इथेनॉल ब्लेंडिंग पर फैसला लेना। लेकिन असल में घोषणा सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने की। नितिन गडकरी की घोषणा के बाद हरदीप पुरी को मजबूरी में उस पर मुहर लगानी पड़ी।
यानी नीति का फायदा जनता को कम और गडकरी परिवार को ज़्यादा मिला। अब आप सोच रहे होंगे कि इससे गडकरी परिवार को क्या फायदा मिला। तो शायद आपको पता नहीं होगा कि नितिन गडकरी एक सफल और बड़े बिजनेसमैन हैं। इनके बिजनेस के बारे में फिर कभी विस्तार से बात करेंगे फिलहाल पूरा आर्टिकल आप पढ़ें तो खेल समझ आ जाएगा।
गडकरी परिवार का इथेनॉल कारोबार
- निखिल गडकरी, बड़े बेटे, CIAN Agro Industries से जुड़े हैं, जो इथेनॉल उत्पादन करती है।
- सारंग गडकरी, छोटे बेटे, Manas Agro Industries & Infrastructure Ltd. और अन्य ग्रीन एनर्जी कंपनियों से जुड़े हैं।
- CIAN Agro का शेयर हाल ही में ₹40 से ₹668 तक पहुंचा यानी लगभग 1,500% की जबरदस्त तेजी।
यह साफ दिखाता है कि सरकारी नीतियों से गडकरी बेटों की कंपनियों को सीधा फायदा मिला।

इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (E20) से गाड़ियों पर नुकसान
1. माइलेज कम होना
- इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम है।
- माइलेज 5–10% तक घट जाता है।
2. इंजन के पार्ट्स पर असर
- इथेनॉल नमी खींचता है, जिससे फ्यूल इंजेक्टर, पिस्टन रिंग्स, सिलेंडर वॉल जल्दी खराब होते हैं।
3. रबर और प्लास्टिक पार्ट्स खराब होना
- पुरानी गाड़ियों के रबर सील, गैसकेट और फ्यूल पाइप इथेनॉल से फट जाते हैं।
4. ठंड में गाड़ी स्टार्ट न होना
- इथेनॉल का वाष्प दबाव कम होने से कोल्ड स्टार्ट प्रॉब्लम होती है।
5. टैंक और फ्यूल सिस्टम में पानी जमना
- इथेनॉल हवा से नमी सोखता है, जिससे फ्यूल टैंक में पानी और जंग लगती है।
6. पिक-अप और परफॉर्मेंस पर असर
- गाड़ी की पावर घटती है और ड्राइविंग स्मूदनेस कम हो जाती है।
7. इंजन ज्यादा गर्म होना (Overheating)
- इथेनॉल तेजी से जलता है, जिससे इंजन का तापमान बढ़ जाता है और गाड़ी की उम्र घटती है।
जनता को नुकसान, गडकरी परिवार को फायदा
- जनता के लिए पेट्रोल महंगा ही रहा।
- माइलेज घटा, रिपेयरिंग का खर्च बढ़ा।
- गाड़ियों की उम्र और परफॉर्मेंस घट गई।
इसके उलट, गडकरी के बेटों की इथेनॉल कंपनियों ने करोड़ों का मुनाफा कमाया और शेयर आसमान छूने लगे।
नतीजा: किसका भला हुआ?
यह सवाल अब सीधा है..
क्या नितिन गडकरी ने यह फैसला देशहित के लिए लिया, या फिर जनता को गुमराह कर अपने बेटों की कंपनियों को फायदा पहुँचाने के लिए?
जनता महंगे पेट्रोल और घटते माइलेज की मार झेल रही है, जबकि गडकरी परिवार का कारोबार चमक रहा है।
स्पेशल रिपोर्ट : मनीष कुमार अंकुर
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