
Maharashtra की राजनीति में कुछ नाम ऐसे हैं, जो न सिर्फ जनता के बीच लोकप्रिय हैं, बल्कि संगठनात्मक मजबूती और ज़मीन से जुड़ाव के प्रतीक भी बन चुके हैं। ऐसा ही एक नाम है – चंद्रशेखर बावनकुले। एक सामान्य किसान परिवार से निकलकर महाराष्ट्र सरकार में राजस्व मंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जैसे अहम पदों तक पहुंचने वाले बावनकुले का सफर प्रेरणादायक है।
चंद्रशेखर बावनकुले राजनीतिक जीवन एक मिसाल है कि अगर इरादे साफ हों, नीयत मजबूत हो और जनता के लिए कुछ करने की लगन हो, तो कोई भी नेता आम से खास बन सकता है।

भाजपा युवा मोर्चा से सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने के बाद उन्होंने ज़मीनी स्तर पर पार्टी के लिए कड़ी मेहनत की। 2004 में वे पहली बार कामठी विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने। इसके बाद 2009 और 2014 में भी लगातार जीत हासिल की। उनकी लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे हमेशा अपने क्षेत्र में जनता के सीधे संपर्क में रहे। वे जनता की समस्याएं सुनते हैं, मौके पर समाधान करते हैं और कभी-कभी बिना किसी सरकारी तामझाम के खुद ही निरीक्षण करने पहुंच जाते हैं।

देवेंद्र फडणवीस की पहली सरकार में उन्हें ऊर्जा मंत्री बनाया गया। इस जिम्मेदारी को उन्होंने पूरी निष्ठा से निभाया। उनके कार्यकाल में राज्य में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में बड़ा सुधार हुआ, सौर ऊर्जा को बढ़ावा मिला और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली पहुंचाने के कई योजनाएं सफलतापूर्वक लागू की गईं। बावनकुले ने मंत्रालय में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी। उन्हें एक ऐसा मंत्री माना गया, जो फाइलों पर बैठने के बजाय फील्ड में जाकर स्थिति का जायजा लेना पसंद करते हैं।
2022 में जब भाजपा को महाराष्ट्र में संगठन को नई दिशा देने की जरूरत थी, तब पार्टी ने चंद्रशेखर बावनकुले को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। एक ओबीसी नेता के रूप में उन्होंने सामाजिक समीकरणों को साधने और पार्टी को जमीनी स्तर पर मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में भाजपा ने कई नगर निकाय चुनावों और पंचायत चुनावों में दमदार प्रदर्शन किया।
आज वे महाराष्ट्र सरकार में राजस्व मंत्री हैं। यह मंत्रालय सीधे तौर पर किसानों, ग्रामीण जनता और आम लोगों की ज़मीन व संपत्ति से जुड़ा है। बावनकुले इस जिम्मेदारी को भी गंभीरता से निभा रहे हैं। वे नियमित रूप से जिलों का दौरा करते हैं, जमीन विवादों के समाधान के लिए कैंप आयोजित करवाते हैं और डिजिटल लैंड रिकॉर्ड जैसी परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि राजस्व विभाग में पारदर्शिता लाकर ही जनता का भरोसा जीता जा सकता है।
बावनकुले की सबसे बड़ी ताकत है – उनकी सादगी। वे किसी भी बड़े नेता की तरह दिखने का प्रयास नहीं करते, न ही दिखावे की राजनीति करते हैं। वे आज भी आम कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर भोजन कर लेते हैं, खुद गाड़ी चलाकर सभा में पहुंच जाते हैं, और अगर किसी गांव में रात रुकनी हो, तो वहीं किसी किसान के घर पर रुक जाते हैं।
उनकी छवि बेदाग है, और यही वजह है कि भाजपा नेतृत्व उन पर पूरा भरोसा करता है। वे न केवल संगठन के लिए एक मज़बूत आधार हैं, बल्कि शासन में भी एक ज़िम्मेदार और संवेदनशील मंत्री के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।
चंद्रशेखर बावनकुले उन नेताओं में से हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम भी हो सकती है। वे आज के युवा नेताओं के लिए एक प्रेरणा हैं – कि कैसे मेहनत, निष्ठा और जनता से जुड़े रहकर भी ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है।
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