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Jalgaon Pune के Deepstambh Foundation Manobal ने Divya Tej Program में लोगों को रुला दिया


कहते हैं न कि सफलता किसी की मोहताज नहीं होती, जब कोई अपने जीवन में कुछ करने की ठान ले तो उसके आड़े आने वाली हर मुसीबत बोनी साबित हो जाती है। सफलता सही रास्ते पर चलने और कठिन मेहनत करने से मिलती है, न कि दूसरों की मदद पर निर्भर रहने से। जो खुद की क्षमता पर विश्वास करते हैं और निरंतर प्रयास करते हैं, उन्हें सफलता जरूर हासिल होती है।

कभी-कभी जीवन हमें शारीरिक सीमाओं और सामाजिक असमानताओं के साथ चुनौती देता है, लेकिन सच्ची ताकत उन लोगों में होती है जो इन सीमाओं को अपने रास्ते का हिस्सा नहीं मानते। आँखें न होने के बावजूद कोई अपनी दुनिया को रंगीन बना सकता है, एक पैर पर खड़ा होकर कोई अपनी आत्मा को झूमने दे सकता है, और जिनके हाथ नहीं हैं, वे अपनी कला को अभिव्यक्त करने के लिए नए तरीके खोज सकते हैं।


अनाथ बच्चे भी दुनिया को यह दिखा देते हैं कि जीवन में मुश्किलों से कैसे निकलना है।
ऐसे लोग सिखाते हैं कि सफलता केवल बाहरी चीजों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह हमारे अंदर की इच्छाशक्ति और संघर्ष की शक्ति पर टिकी होती है। अगर हमारी सोच मजबूत हो, तो हम किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं, और अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। “जब इरादा मजबूत हो, तो कोई भी सीमा हमें रोक नहीं सकती है।”
आज हम बात कर रहे हैं दीपस्तंभ फाउंडेशन, यानी मनोबल की… इसके संस्थापक हैं यजुरवेंद्र महाजन हैं… जिनका कोई नहीं होता उनके ईश्वर होते हैं। अब भगवान तो खुद मदद करने आ नहीं सकते तो ऐसे में वे यजुरवेंद्र महाजन जैसे लोगों को दूसरों की मदद के लिए भेज देते हैं।
बता दें कि दीपस्तंभ फाउंडेशन में अनाथ, ट्रांसजेंडर, और फिजिकली चैलेंज्ड बच्चे रहते हैं। यानी जिनकी मदद के लिए अच्छे भले लोग कतराते हैं। तो वहीं यजुरवेंद्र महाजन दीपस्तंभ फाउंडेशन के साथ उनके कंधे से कंधा मिलाए खड़े नजर आते हैं।
जितने भी लोग दीपस्तंभ फाउंडेशन से जुड़े हैं वे सही मायने में असली सेलिब्रिटी हैं।
इन सभी ने 22 फरवरी को नागपुर के सूराबर्डी क्लब में दिव्य तेज नाम के एक प्रोग्राम में हिस्सा लिया, जिससे वहां मौजूद हर किसी की आंखों में आंसू आ गए। इस कार्यक्रम का आयोजन माधवेंद्र जैन जी ने अपने माता पिता स्वर्गीय कमला देवी और विद्यासागर जैन जी की स्मृति में दिव्य तेज नाम से सूराबर्डी क्लब में करवाया था।
इस कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे सभी ने दिखाया कि शारीरिक सीमाएँ किसी की क्षमता को निर्धारित नहीं कर सकतीं हैं। अगर हमारी सोच और आत्मविश्वास मजबूत हो, तो हम किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं।
खैर दीपस्तंभ फाउंडेशन से जुड़ी ऐसी अनेक कहानियाँ हैं, जहाँ लोग बिना हाथ, बिना पैरों, या बिना दृष्टि के भी अपनी राह पर चलकर सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँच रहे हैं। ये लोग हमें यह सिखा रहे हैं कि असली सफलता हमारे शरीर की क्षमता में नहीं, बल्कि हमारी मानसिकता और संघर्ष की शक्ति में होती है।
यजुरवेंद्र महाजन और इस संस्था से जुड़े लोगों को हम सैल्यूट करते हैं कि आप जैसे लोगों की वजह से ऐसे लोग इतने आगे बढ़ सके…

मनीष कुमार अंकुर


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