
गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी में एक केबल पुल के टूटने से कई लोगों की मौत हुई है। बता दें कि जिस वक्त पुल टूटा उस वक्त करीब 400 लोग पुल पर ही थे। हादसे में कम से कम 80 लोगों की मौत हुई है और दर्जनों घायल हैं। यह घटना कोई आम घटना नहीं बल्कि 80 लोगों की मौत इस पुल को बनाने में हुए भ्रष्टाचार की वजह स्व हुई है। 80 लोगों की हादसे में मौत नहीं बल्कि भ्रष्टाचार ने मासूम लोगों की बलि ले ली है।
गुजरात को भारत का मॉडल कहा जाता है। लेकिन इस मॉडल में हो रहे भ्रष्टाचार को अनदेखा कर दिया जाता है।

सबसे बड़ी बात यह है कि इस पुल पर इतनी बड़ी संख्या में लोग कैसे पहुंचे? क्या पुलिस प्रशासन वहां मौजूद नहीं था? क्या महज 500-600 लोगों का वजन यह पुल सहन नहीं कर पाया?
वे कौन से इंजीनियर थे जिन्होंने इस पुल की मरम्मत करवाई जो यहां तक अंदाजा नहीं लगा पाए कि यह पुल महज एक दिखावा है, ये पुल वजन सहने लायक नहीं है।
अब इस पुल के बारे में हम आपको विस्तृत जानकारी दे दें।
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गुजरात के मोरबी में हादसे का शिकार हुआ झूलता ब्रिज काफी पुराना है। आजादी से पहले 1887 के आसपास इस ब्रिज का निर्माण मोरबी के तत्कालीन राजा वाघजी रावाजी ठाकोर ने करवाया था। मच्छु नदी पर बना यह ब्रिज मोरबी के लोगों के एक प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट था। मोरबी के शासकों के जमाने में बने इस पुल की खासियत यह थी कि जब इसका निर्माण किया गया था तो यूरोप में मौजूद सबसे आधुनिक तकनीक इसके निर्माण में इस्तेमाल की गई थी। इसके बाद अंग्रेजों के शासन काल में भी यह ब्रिज अच्छी इंजीनियरिंग का प्रतीक बना रहा। पिछले कई सालों से समय-समय पर इसकी मरम्मत की जा रही थी। दिवाली पर के पर्व खोले जाने से पहले यह पुल सात महीने तक मरम्मत के लिए बंद था। यही वजह है कि यह पुल खोला गया, तो बड़ी संख्या लोग सैर-सपाटे के इस ब्रिज पर पहुंचे और तभी यह हादसा हो गया। 1.25 मीटर चौड़ा यह ब्रिज दरबार गढ़ पैलेस और लखधीरजी इंजीनियरिंग कॉलेज को जोड़ता है। इसके मरम्मत पर 2 करोड़ रुपये खर्च किए थे।

राजकोट जिले से 64 किलोमीटर की दूरी पर मच्छु नदी पर बना यह पुल लोगों के आर्कषण का केंद्र था। इसीलिए इंजीनियरिंग कला और पुराने होने के कारण इस गुजरात टूरिज्य की सूची में किया गया था। इस ब्रिज को नए साल पर आम लोगों के लिए खोला गया था। इससे पहले यह ब्रिज सात महीने से बंद था, इसे ठीक किया जा रहा था। जब इसे खोला गया था तब कहा गया था कि विशेषज्ञों की मदद से इस ठीक कर लिया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पुल पर क्षमता से ज्यादा लोग मौजूद थे, इसीलिए यह हादसा हुआ। इस पुल की कुल लंबाई 765 फुट और चौड़ाई साढ़े चार फुट की है। जानकारी के अनुसार पुल के नवीनीकरण के लिए सरकारी टेंडर ओधवजी पटेल के स्वामित्व वाले ओरेवा ग्रुप को दिया गया था। इसी ग्रुप को अगले 15 साल तक इस ब्रिज की देखरेख करनी थी, लेकिन खुलने के पांचवें दिन ही यह ऐतिहासिक पुल नदी में गिर गया।
ब्यूरो रिपोर्ट : मनीष कुमार अंकर
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