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महावीर स्वामी के जन्मोत्सव पर उनके अद्भुत जीवन व चरित्र को बताती सद्गुरु स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज की यह कविता

महावीर स्वामी जन्मोदिवस पर स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी अपनी इस कविता के माध्यम से उनके अद्धभुत जीवन ओर सिद्धांत चरित्र के जैन धर्म सार को भक्तों के सामने रखते कहते है कि…

चैत्र शुक्ल त्रियोदर्शी को जन्मे
त्रिशाला-सिद्धार्थ इक्ष्वाकुंवशी।
वर्धमान नाम राजपुत्र कर धारण
यशोदा पत्नी प्रियदर्शनी हंसी।।
मार्गशीष कृष्णा दशमी को
श्रामणी दीक्षा ग्रहण बने निग्रँथ त्यागी।
मन पर्याय ज्ञान से महासिद्धि तक
बारह वर्ष रहे अखण्ड वीतरागी।।
पुरंदर ने दे इन्हें यंत्रणा
अनेक पशु देव से पा कष्ट।
मेरु की तरह अचल अटल रह
साक्षी बन रहे निर्द्वन्द तटस्थ।।
तप से अष्ट सिद्धि को पाकर
आत्म धर्म दिया जग उद्धारा।
णमोकार महामंत्र कल्याणी
इंद्र ने नाम महावीर पुकारा।।
पंचशील व्रत को जग देकर
नियम से नियमतीत बनाया।
तन को अम्बर से निर्लिप्त बनाकर
तन मन आत्मा एक दिगम्बर अपनाया।।
सभी दोषों का एक निवारण
क्षमा सदा अपनाओ सब।
क्षमा काटती सभी कर्मों को
क्षमा ही देती निर्वाण तत अब।।
ग्यारह गणधर कैवल्यज्ञान दे
बहत्तर वर्ष जीवन की लीला।
अमावस दीवावली मोक्ष हो स्थिर
पावापुरी की तीर्थ अन्तर्लीला।।
मैंने कोई भी पाप किया हो
वे सभी पाप वर्ति हो निष्फल।
वैर नही किसी से मेरा
सदा जैन धर्म हो सिद्धफल।।
जय हो महावीर स्वामी की
जय हो उनके पौरुष तत्व।
नर हो या हो जग नारी
अपनाकर पाए आत्मगत तत्व।।

स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
www.satyasmeemission.org

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One comment

  1. Bhut sundr kavita h guru ji

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